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7 सांसद टूटने से पंजाब में आम आदमी पार्टी के वोट बैंक पर क्या असर होगा?

आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में चले जाने से पार्टी के जनाधार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आइए जानते हैं कि इससे पार्टी पर क्या असर पड़ेगा?

AAP Punjab

आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता।

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आम आदमी पार्टी को शुक्रवार को उस समय जोरदार झटका लगा जब राघव चढ्ढा के नेतृत्व में 7 सांसदों ने पार्टी से बगावत कर दी। सभी सांसदों ने ऐलान किया कि वह पार्टी को दो तिहाई के बहुमत से तोड़कर बीजेपी में विलय कर रहे हैं। दरअसल, राज्यसभा में कल तक आम आदमी पार्टी के 10 सांसद थे लेकिन सातों के चले जाने से पार्टी के अब 3 सांसद ही राज्यसभा में बचे हैं। पार्टी में इतनी बड़ी मात्रा में सांसदों का टूटना किसी भी दल को तोड़ देता है।

 

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब पार्टी से 7 सांसद टूट गए हैं तो इससे पंजाब में आम आदमी पार्टी के वोट बैंक पर क्या असर होगा?

चार सांसद फुल टाइम नेता नहीं

दरअसल, आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसद बीजेपी में चले गए इनमें चार सांसद फुल टाइम नेता नहीं हैं। अशोक मित्तल पढ़ाई और मिठाई के कोराबार, विक्रम साहनी पंजाब के बड़े कारोबारी भारत से लेकर अफ्रीका तक कारोबार फैला, राजेंद्र गुप्ता कपड़े, पेपर और फर्टिलाइजर के कारोबारी हैं वहीं, हरभजन सिंह भारत के मशहूर क्रिकेटर रहे हैं। ऐसे में राघव चड्डा, स्वाति मालीवाल और संदीप पाठक ही फुल टाइम नेता हैं।

 

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विधायकी और सांसदी का नहीं जीते चुनाव

इसमें से भी राघव चड्डा, स्वाति मालीवाल और संदीप पाठक फुल टाइम नेता तो जरूर हैं लेकिन ये तीनों ही जन नेता नहीं। तीनों नेताओं के पास जनता का कोई आधार नहीं है। एक तरह से तीनों सांसद संगठन के नेता रहे हैं। साथ ही इनमें से कोई भी अभी तक विधायकी और सांसदी का चुनाव नहीं जीता है। ऐसे में आम आदमी पार्टी को पंजाब में वोट बैंक के आधार पर कोई खास असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है।

 

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पंजाब में कितना जनाधार?

वास्तविकता यह है कि सातों दलबदलुओं सांसदों में से किसी एक का भी पंजाब में कोई जनाधार नहीं। अगले साल पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी को दिल्ली में हार मिलने के बाद पंजाब से काफी उम्मीदें हैं। पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल लगातार पंजाब में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। पंजाब में जनाधार के तौर पर देखा जाए तो केजरीवाल खुद, सीएम भगवंत मान और मनीष सिसोदिया मजबूत जनाधार वाले नेता हैं।

 

इस परिस्थिती में इन सातों सांसदों के आम आदमी पार्टी से बगावत करने से पंजाब में पार्टी का बड़ा नुकसान नहीं होता दिखता है। हां, यह जरूर है कि इनके दलबदल करने से आम आदमी पार्टी के संगठन, नेतृत्व और ढांचा कमजोर होगा। साथ ही पार्टी की छवि और फंडिंग को भी नुकसान पहुंचेगा।

 


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