पंजाब में अगले साल की शुरुआत में वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो जाएगा और अगली विधानसभा के लिए चुनाव होंगे। वैसे तो चुनावों में अभी समय है लेकिन लंबे समय से सत्ता से बाहर शिरोमणि अकाली दल ने अभी से 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी बिगुल फूंक दिया है। इस कड़ी में पार्टी 17 फरवरी से एक खास अभियान शुरू करने जा रही है।
पार्टी ने इस अभियान को 'पंजाब बचाओ, सरदार सुखबीर सिंह बादल लाओ अभियान' नाम दिया है। इस अभियान के तहत पार्टी पूरे पंजाब में रैलियों का आयोजन करेगी। इन रैलियों की अध्यक्षता पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल खुद करेंगे। पार्टी के इस अभियान से कार्यकर्ताओं में जोश है और पार्टी के नेताओं को भी उम्मीद है कि इस अभियान का फायदा पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव में मिलेगा।
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बैसाखी तक 40 रैलियां
पार्टी अब ऐक्शन मोड में नजर आ रही है। पार्टी के चंडीगढ़ स्थित ऑफिस में इन रैलियों को लेकर बैठक भी की गई, जिसमें रैलियों की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया है। पार्टी के सीनियर नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि बैसाखी तक पार्टी 40 रैलियों का आयोजन करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी 40 में से 28 रैलियां 31 मार्च तक कर ली जाएंगी और अन्य रैलियां 12 अप्रैल तक होंगी। बैसाखी तक पार्टी कुल 40 रैलियों को आयोजित कर जनता के सामने अपना पक्ष रखेगी और मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार पर हमला बोलेगी।
क्या बोले सुखबीर बादल?
पार्टी प्रधान सुखबीर बादल ने पार्टी के इस अभियान को लेकर कहा कि पार्टी पंजाब के मुद्दे उठाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि इन रैलियों के जरिए पार्टी पंजाब के ज्वलंत मुद्दों को उठाएगी और उन पर अपना विजन जनता के सामने पेश करेगी। सुखबीर बादल ने दावा किया कि शिअद ही पंजाब की अकाक्षांओं को पूरा करने में सक्षण है और पार्टी को जनता का समर्थन मिलेगा।
किन मुद्दों को उठाएगी पार्टी?
शिरोमणि अकाली दल पंजाब की राजनीति में लगातार पिछड़ता जा रहा है। ऐसे में पार्टी अपने पुराने आक्रामक रूप में वापिस जाती हुई नजर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन तोड़ने के बाद अब पार्टी फिर से 90 के दशक की राजनीति की ओर बढ़ती हुई नजर आ रही है।
इन रैलियों में पार्टी चंडीगढ़ को पंजाब को देने की मांग को प्रमुखता से उठाएगी। इसके साथ ही पंजाब के पानी के मुद्दे को हल करने के लिए भी केंद्र और पंजाब सरकार पर दबाव डालेगी। कानून-व्यवस्था और नशे के मुद्दे पर शिअद पंजाब सरकार पर हमला बोलेगी। इसके साथ ही पार्टी किसानों की समस्याएं और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाएगी।
क्या अकेले लड़ेगी चुनाव?
शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में दशकों तक राज किया लेकिन 2017 के बाद पार्टी का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। 2020 में पार्टी की राजनीति में एक बड़ा बदलाव तब आया जब पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी से किसानों के मुद्दे पर अलग होने का फैसला कर लिया। किसान कानून तो वापिस हो गए लेकिन गठबंधन फिर से नहीं हुआ। 2024 लोकसभा चुनाव और2022 विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद अब पार्टी कमबैक करना चाह रही है। ऐसे में पार्टी के नेता बीजेपी से गठबंधन की बात कर रहे हैं। पार्टी की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी गठबंधन को दोनों दलों के लिए फायदेमंद बताया लेकिन कुछ शर्तें भी रखी। बीजेपी अभी वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाती हुई दिखाई दे रही है। ऐसे में अकाली दल ने अकेले ही कैंपेन शुरू करने का फैसला किया है।