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पार्टी छोड़ी फिर भी सांसद बने रहेंगे AAP के 7 बागी सांसद? BJP का प्लान समझिए

आम आदमी पार्टी के 7 बागी सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और तीन ने आधिकारिक तौर पर बीजेपी का दामन थाम लिया है। BJP ने कुछ ऐसा प्लान बनाया है कि इन सभी की राज्यसभा सदस्यता बरकरार रहेगी।

Raghav Chadha Joined bjp

बीेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा, Photo Credit: ANI

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राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा लंबे समय से पार्टी लाइन से बाहर जाकर काम कर रहे थे। कुछ दिन पहले ही पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था। इसके बाद कल उन्होंने पार्टी के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की घोषणा कर दी। देर शाम बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें और उनके साथ AAP के दो अन्य सांसदों को बीजेपी में शामिल करवा लिया। नियमों के अनुसार, एक पार्टी छोडड़कर दूसरी पार्टी में जाने पर सांसद की सदस्यता खत्म हो जानी चाहिए लेकिन बीजेपी ने कुछ ऐसा प्लान तैयार किया है कि इन सभी सात सांसदों की सदस्यता बरकरार रहेगी। 

 

कल राघव चड्ढा ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर AAP को छोड़ने की घोषणा की तो उन्होंने जो शब्द कहे उन्हें ध्यान से सुना जाए तो समझ आ जाएगा कि उनकी राज्यसभा सदस्यता क्यों बरकरार रहेगी। राघव चड्ढा ने कहा, 'हम AAP पार्टी के राज्यसभा के दो तिहाई सदस्य अपनी पार्टी का मर्जर बीजेपी के साथ करते हैं।' कानूनी जानकारों का कहना है कि मर्जर के कारण उनकी राज्यसभा की कुर्सी को कोई खतरना नहीं है। चलिए जानते हैं कि कानून क्या कहता है-

 

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गुट का विलय 

राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आज भारत के संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने बीजेपी में विलय कर लिया है। सात सांसदों ने उस लेटर पर सिग्नेचक किए हैं, जिसे राज्यसभा के अध्यक्ष को सौंपा गया था। कल तक राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद थे लेकिन उन में से 7 ने कल पार्टी को अलविदा कह दिया। ऐसे में दल बदल कानून के तहत आम आदमी पार्टी इनकी सदस्यता रद्द करने की मांग कर रही है लेकिन ऐसा होने की संभावना ना के बराबर है। 

 

BJP का प्लान 

आमतौर पर अगर कोई विधायक या सांसद अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाता है तो उसकी सदस्यता दल बदल कानून के तहत रद्द कर दी जाती है। हालांकि, यहां मामला इसलिए फंस जाता है क्योंकि राघव चड्ढा ने सिर्फ पार्टी छोड़ने की नहीं बल्कि बीजेपी के साथ मर्जर की बात कही है। बीजेपी का प्लान है कि सभी 7 सांसद आम आदमी पार्टी भी छोड़ दें और उनकी राज्यसभा सदस्यता भी बरकरार रहे। बीजेपी ऐसा पहले महाराष्ट्र में कर चुकी है जहां पार्टी छोड़ने के बावजूद विधायकों की सदस्यता रद्द नहीं हुई। 

 

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संविधान क्या कहता है?

संविधान की 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 2 में यह प्रावधान है कि अगर कोई सदस्य अपनी मर्जी से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है या पार्टी व्हिप के खिलाफ वोट करता है तो उसे दल-बदल के आधार पर डिसक्वालिफाई कर दिया जाएगा। अब राघव चड्ढा और 7 अन्य सांसदों पर दलबदल कानून लागू होना चाहिए लेकिन यहां मामला कुछ दूसरा है। 

 

इस मामले में दल बदल कानून लागू नहीं होगा क्योंकि 10वीं अनुसूचि के पैराग्राफ 4 में कहा गया है कि विलय के मामले में दल-बदल के आधार पर तब अयोग्यता लागू नहीं होगी जब संबंधित विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य विलय के लिए सहमत हो जाते हैं।  शिवसेना के विधायकों पर दलबदल कानून लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई थी। इस बहस के दौरान कोर्ट ने कहा था कि सदन का दल के दो तिहाई मेंबर्स अगर अपनी पार्टी के दल का विलय दूसरी किसी दल में करें या खुद का गुट बनाएं तो उन पर दल बदल कानून लागू नहीं होता है। राघव चड्ढा के दावे के अनुसार, उनके साथ दो तिहाई से ज्यादा सदस्य हैं। ऐसे में उनकी सदस्यता जाने की संभावना ना के बराबर है लेकिन अभी सभी सांसदों ने राघव चड्ढा के दावे की पुष्टि नहीं की है। 


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