कांग्रेस नेता
राहुल गांधी
ने कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने के लिए जिला अध्यक्षों को ताकत देने का फैसला लिया था। इसके बाद संगठन सृजन अभियान के तहत जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई और उन्हें सियासी ताकत देने की कोशिश की गई। हाईकमान ने पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर जिला अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया शुरू की और राहुल गांधी का कहना है कि आने वाले चुनावों में टिकट वितरण से लेकर संगठन के अहम फैसलों में जिला अध्यक्षों की राय ली जाएगी।
संगठन मजबूती की दिशा में कांग्रेस हाईकमान ने जिला कांग्रेस कमेटियों को सियासी पावर देने का फैसला लिया था। ऐसे में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए हाईकमान ने खुद जिम्मेदारी संभाली और दूसरे राज्यों से पर्यवेक्षक भेजे। उनकी रिपोर्ट पर आलाकमान जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा करता है। इस मॉडल का मूल मकसद संगठन को मजबूत करना और कुछ नेताओं के हाथ में सत्ता सीमित ना रखना मुख्य उद्देशय था।
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राजस्थान में जिला अध्यक्ष की पिटाई
राजस्थान के बीकानेर में कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। एक कार्यक्रम के दौरान चार युवकों ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ चांटे व मुक्कों से मारपीट की। इसकी एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। पिटाई करने वाले भी कांग्रेस के ही नेता थे जिन्होंने मदन मेघवाल पर टिकट काटने का आरोप लगाया था। इसके बाद राजस्थान में सियासी बवाल मच गया और कई नेताओं ने उन युवकों की निंदा की। राजस्थान में स्थानीय चुनावों के दौरान कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं।
जिला अध्यक्ष मॉडल बना मुश्किल?
राजस्थान में स्थानीय निकाय के चुनाव हो रहे हैं और इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी अपने सिंबल पर उम्मीदवार मैदान में उतार रही है। पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा लास्ट समय तक नहीं की गई। कई जगहों पर टिकटों को लेकर बवाल देखने को मिला। कई जिलों में कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष और स्थानीय विधायक या पूर्व विधायक और अन्य नेताओं में विवाद देखने को मिला। कई दिनों तक पार्टी के बीच टिकटों को लेकर मंथन हुआ। राहुल गांधी का कहना था कि सांसद और विधायकों के टिकट तय करने में भी जिला अध्यक्षों की भूमिका होगी लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव में भी जिला अध्यक्षों की नहीं चली।
ज्यादातर जिलों में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस के पुराने स्थापित नेता अपने समर्थकों को टिकट दिलाने में सफल रहे। कई विधायक और पूर्व विधायक, मंत्री टिकट के लिए जयपुर तक पहुंच गए। कांग्रेस पार्टी के अंदर गुटबाजी इस दौरान खुलकर सामने आई। पार्टी के अंदर जिला अध्यक्षों की टिकट वितरण में नहीं चली बल्कि उनके कारण गुटबाजी और ज्यादा बढ़ने की खबरें सामने आई।
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क्या फेल हो गया जिला अध्यक्ष मॉडल?
जिला अध्यक्ष मॉडल का मूल उद्देश्य कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को उत्साहित करना और संगठन को मजबूत करना है। कांग्रेस पार्टी के इस मॉडल को खुद राहुल गांधी प्रमोट कर रहे हैं और खुद जिला अध्यक्षों की नियुक्ति और ट्रेनिंग पर नजर रख रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि जिला अध्यक्षों का सियासी ताकत दी जाएगी और टिकट वितरण में उनकी अहम भूमिका रहेगी। हालांकि, राजस्थान स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी की यह रणनीति उल्टी पड़ती हुई नजर आई। आने वाले दिनों में राज्य विधानसभा चुनावों के लिए जब टिकट वितरण होगा तो फिर से कांग्रेस के सामने इस तरह की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में यह मॉडल कांग्रेस के लिए परेशानी बन सकता है। राहुल गांधी के मॉडल पर राजस्थान में हुए घटनाक्रम से सवाल उठने लगे हैं।