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'ऐसी राजनीति से यही होगा', कांग्रेस को नसीहत दे रहे पूर्व बिहार अध्यक्ष अखिलेश

बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसी ही राजनीति हुई तो यही होगा।

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अखिलेश प्रसाद सिंह, File Photo Credit: PTI

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बिहार के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक बदलाव किया था। अखिलेश प्रसाद सिंह को हटाकर राजेश राम को अध्यक्ष बनाया गया था। चुनाव नतीजों में कांग्रेस समेत पूरे गठबंधन की करारी शिकस्त हुई। अब इसी पर पूर्व बिहार कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को जमकर सुनाया है। उन्होंने बिहार कांग्रेस के सह-प्रभारी शाहनवाज आलम के सामने ही कहा कि इन लोगों ने ही उन्हें (अखिलेश प्रसाद सिंह को) हटाया। अखिलेश ने 'जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' वाली नीति पर कांग्रेस पर ही सवाल उठाए और कहा कि अगर इस तरह की राजनीति होती रही तो यही होगी। अखिलेश के मुताबिक, उन्होंने चुनाव नतीजों के बाद राहुल गांधी से भी सवाल पूछे थे। 

 

रोचक बात है कि अखिलेश प्रसाद को लालू यादव का करीबी माना जाता था। बिहार चुनाव के समय प्रभारी बनकर पहुंचे कृष्णा अलावरू, कन्हैया कुमार और शाहनवाज आलम की तिकड़ी काफी हद तक निर्णायक भूमिका में थी। इसी तिकड़ी ने राजेश राम को अध्यक्ष बनाया। कृष्णा अलावरू की जिद के चलते ही कांग्रेस 60 सीटों से कम पर राजी नहीं हो रही थी और आखिर तक कनफ्यूजन की स्थिति बनी रही। इस सबके के बीच अखिलेश प्रसाद सिंह एकदम हाशिए पर हो गए थे और उनकी कोई राय भी नहीं ली जा रही थी। तब से अब तक ज्यादातर शांत रहे अखिलेश प्रसाद ने अब पार्टी के नेताओं के सामने ही अपनी बात रखी है।

कांग्रेस नेताओं पर ही खूब बरसे अखिलेश प्रसाद

अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा है, 'मैं उस समय अध्यक्ष था। शाहनवाज जी उस समय AICC के सेक्रेटरी बनकर गए। इनके साथ एक और साथी गए। एक और प्रभारी बनकर गए। सबसे पहले इन लोगों ने मुझे हटाया। हटाने के बाद जो परिणाम आया वह समझने लायक है। हम रहते तो शायद ऐसा नहीं होता कि कांग्रेस 5-6 सीट जीतती। उतना तो हम 4 सीट सांसदी की जिताकर लाए थे। सलमान साहब हमको जानते हैं, हम इनके अखाड़े के व्यक्ति हैं। बिहार को भी अच्छी तरह से जानते हैं, उत्तर प्रदेश को भी जानते हैं और बाकी राज्यों को भी जानते हैं। जिनको राजनीति से कोई वास्ता नहीं, वे लोग प्रभारी बना दिए जाते हैं।'

 

उन्होंने आगे कहा, 'वहां नारा चला कि जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी है। बहुत दिन से हम लोग सुन रहे थे। जगदेव बाबू के जमाने से, कर्पूरी जी के जमाने से  और लालू जी भी वही कर रहे थे, मुलायम सिंह भी वही कर रहे थे, कुछ हद तक नीतीश जी भी कर रहे थे। उसी काम को बढ़ा-चढ़ाकर कांग्रेस भी वहां करने लगी। क्या हुआ? सबसे ज्यादा आबादी वहां मुसलमानों की है, 18 प्रतिशत। हिंदुओं में सबसे ज्यादा यादवों की है कि हम भी 14-15 पर्सेंट हैं। हालांकि, गणना के बाद उसे 4-5 दिन तक दबाकर रखा गया था। शायद कम आ रहा था लेकिन लालू जी के कहने पर उसे बढ़ाया गया।'

राहुल गांधी से भी की शिकायत

अखिलेश प्रसाद सिंह ने मंच से ही शाहनवाज को नसीहत देते हुए कहा, 'मुस्कुराइए मत शाहनवाज साहब, इस सच्चाई को स्वीकार करना पड़ेगा। जिसकी जितनी उतनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी। मुस्लिम जो 17-18 प्रतिशत थे, वे सिर्फ 11 जीतकर आए। यादव भाई लोग 28 जीतकर आए। जिसको 3.45 प्रतिशत गिना गया वे ठाकुर लोग 32 जीत गए। हालांकि, मैंने अपनी जाति में पैदा होने के लिए आवेदन नहीं दिया था लेकिन हमारी जाति की आबादी 2.89 प्रतिशत गिनी गई थी लेकिन वे भी 27 जीत गए। ब्राह्मण 3.5 पर्सेंट थे और वे 17 जीते। कायस्थ यानी नितिन नवीन की जाति के भी 3-4 जीत गए।'

 

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, '9.99 प्रतिशत जिनकी आबादी थी, वे 80 जीत गए। यानी 40 पर्सेंट विधायक अपर कास्ट के लोग चुनकर आ गए। मैंने राहुल जी से सवाल पूछा था कि अब कांग्रेस पार्टी को क्या करना चाहिए? अब तो हम लोगों को आंदोलन करना चाहिए कि अपर कास्ट के लोगों को 40 पर्सेंट भागीदारी कैसे मिल गई? इस तरह की राजनीति होगी तो यही होना है। कांग्रेस को या किसी भी राजनीतिक पार्टी को कन्फ्यूजन में नहीं आना चाहिए कि आप कहां से चले थे और कहां जा रहे हैं। आप अल्पसंख्यक पार्टी होकर अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं।'

 

बता दें कि साल 2025 के विधानसभा चुनाव में लगभग 60 सीटों पर उतरी कांग्रेस सिर्फ 6 सीटों पर चुनाव जीत पाई थी। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की अगुवाई में बने गठबंधन की बुरी हार हुई थी और जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल करके एक बार फिर से सरकार बना ली थी।

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