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7 महारथी, मिशन एक, क्या समाजवादी पार्टी ब्राह्मणों को साध पाएगी? रणनीति समझिए

यूपी चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने ब्राहमण वोट बैंक को साधने के लिए पूर्वाचंल, अवध और कानपुर तक 7 बड़े चेहरों को मैदान में उतार दिया है।

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अखिलेश यादव, Photo Credit: Social Media

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2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू कर दिया है। हाल ही में हुए ब्राह्मण सम्मेलन के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सात प्रमुख ब्राह्मण नेताओं को प्रदेशभर में सक्रिय भूमिका सौंपी है। पार्टी का मानना है कि करीब 10 से 12 फीसदी ब्राह्मण वोटरों को अपने पक्ष में लाकर वह कई सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकती है।

समाजवादी पार्टी की रणनीति केवल सम्मेलन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रवार प्रभाव रखने वाले नेताओं के जरिए ब्राह्मण समाज के बीच सीधी पहुंच बनाने की है। समाजवादी पार्टी, अपने सीनियर नेता माता प्रसाद पांडेय से लेकर आशुतोष उपाध्याय तक को भुनाने की तैयारी में है।

क्या समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण फॉर्मूला काम करेगा?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ब्राह्मण समाज अभी भी बड़े पैमाने पर भारतीय जनता पार्टी का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस वर्ग के एक हिस्से में नाराजगी की चर्चाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी का यह अभियान भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। हालांकि केवल सम्मेलन और नेताओं की नियुक्ति से वोटों का बड़ा बदलाव नहीं होगा, इसके लिए टिकट वितरण और स्थानीय नेतृत्व को भी मजबूत करना होगा।

समाजवादी पार्टी की रणनीति साफ है, पीडीए समीकरण के साथ ब्राह्मण समाज के प्रभावशाली वर्ग को जोड़कर भारतीय जनता पार्टी के सामाजिक समीकरण में सेंध लगाना। अब देखना होगा कि माता प्रसाद पांडे से लेकर पूजा शुक्ला और आशुतोष उपाध्याय तक, मैदान में उतारे गए ये सात महारथी ब्राह्मण समाज के बीच कितना असर छोड़ पाते हैं और 2027 के चुनावी रण में समाजवादी पार्टी को कितना राजनीतिक लाभ दिला पाते हैं।

माता प्रसाद पांडे: अनुभव और पूर्वांचल में मजबूत स्वीकार्यता

सिद्धार्थनगर से आने वाले नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे समाजवादी पार्टी के सबसे वरिष्ठ ब्राह्मण चेहरों में गिने जाते हैं। पूर्वांचल के ब्राह्मण समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन पर मजबूत पकड़ के कारण उनकी बात कार्यकर्ताओं और समाज दोनों में सुनी जाती है। समाजवादी पार्टी उन्हें ब्राह्मण समाज और वरिष्ठ मतदाताओं के बीच सबसे भरोसेमंद चेहरे के रूप में पेश कर रही है।

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 अमिताभ बाजपेई: कानपुर में मजबूत जनाधार और आक्रामक राजनीति

कानपुर की राजनीति में अमिताभ बाजपेई समाजवादी पार्टी का बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं। शहरी मतदाताओं और युवा वर्ग में उनकी सक्रिय पहचान है। विधानसभा के अंदर और बाहर भारतीय जनता पार्टी पर आक्रामक तेवरों के कारण वह लगातार चर्चा में रहते हैं। कानपुर मंडल के साथ-साथ आसमाजवादी पार्टीस के जिलों में भी उनकी राजनीतिक पहुंच मानी जाती है।

विनय तिवारी: पूर्वांचल में संगठन और सामाजिक नेटवर्क की ताकत

 

विनय तिवारी को पूर्वांचल में ब्राह्मण समाज के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से उनका मजबूत संपर्क माना जाता है। सामाजिक कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी उन्हें अलग पहचान देती है। समाजवादी पार्टी उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में ब्राह्मण समाज तक पहुंच बढ़ाने के लिए अहम भूमिका में देख रही है।

 

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 बैजनाथ दुबे: धार्मिक और सामाजिक मंचों पर प्रभाव

बैजनाथ दुबे की पहचान केवल राजनीतिक नेता के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े चेहरे के रूप में भी है। पूर्वांचल के कई जिलों में ब्राह्मण समाज के बीच उनकी स्वीकार्यता मानी जाती है। पार्टी को उम्मीद है कि वह पारंपरिक ब्राह्मण मतदाताओं के बीच समाजवादी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में मदद करेंगे।

 संतोष पांडे: संगठन और समाज के बीच मजबूत कड़ी

संतोष पांडे लंबे समय से संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय रहे हैं। ब्राह्मण समाज के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी लगातार रही है। समाजवादी पार्टी नेतृत्व उन्हें ऐसे चेहरे के रूप में देख रहा है जो पार्टी और समाज के बीच संवाद को मजबूत कर सकते हैं। पूर्वांचल और मध्य यूपी में उनके संपर्कों को समाजवादी पार्टी चुनावी लाभ में बदलने की कोशिश करेगी।

 पूजा शुक्ला: युवा और महिला ब्राह्मण मतदाताओं तक पहुंच का चेहरा

पूजा शुक्ला को समाजवादी पार्टी की नई पीढ़ी के प्रमुख चेहरों में माना जाता है। महिला मतदाताओं और युवाओं के बीच उनकी अच्छी पहचान है। सोशल मीडिया और जनसंपर्क अभियानों में उनकी सक्रियता पार्टी के लिए बड़ा हथियार मानी जा रही है। समाजवादी पार्टी उन्हें महिला ब्राह्मण मतदाताओं के बीच प्रभाव बढ़ाने की जिम्मेदारी दे रही है।

 

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 आशुतोष उपाध्याय: युवा नेतृत्व और पूर्वांचल में बढ़ती पहचान

आशुतोष उपाध्याय को समाजवादी पार्टी का उभरता हुआ ब्राह्मण चेहरा माना जाता है। युवाओं के बीच उनकी सक्रियता और संगठन में मजबूत पकड़ उन्हें अलग पहचान देती है। पूर्वांचल क्षेत्र में वह लगातार राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। समाजवादी पार्टी उन्हें भविष्य के बड़े ब्राह्मण नेतृत्व के तौर पर भी देख रही है।


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