उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिलेश यादव
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना सियासी आधार मजबूत करने में जुटे हैं। दिवाली के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय लोकदल से जुड़े दो पूर्व मंत्रियों के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चा ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। पूर्व कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी और पूर्व मंत्री चौधरी नीरपाल सिंह सपा में वापसी करने जा रहे हैं। दोनों नेताओं के आने से पश्चिमी यूपी में सपा को सामाजिक और राजनीतिक समीकरण मजबूत करने का मौका मिल सकता है। खासकर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी की चुनावी रणनीति को नई धार मिलने की उम्मीद है।
पूर्व कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सैनी समाज के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। समाजवादी पार्टी से उनका पुराना जुड़ाव रहा है। अखिलेश यादव की सरकार में वह कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। जुलाई 2023 में उन्होंने सपा छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। अब उनकी सपा में वापसी को बीजेपी के लिए पश्चिमी यूपी में राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।साहब सिंह सैनी की वापसी के साथ सहारनपुर जिले की नकुड़ विधानसभा सीट भी चर्चा में है। इस सीट पर सैनी समाज की मौजूदगी और स्थानीय समीकरणों को देखते हुए 2027 के चुनाव में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है। हालांकि, नकुड़ से टिकट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। वर्तमान में इस सीट से बीजेपी के मुकेश चौधरी विधायक हैं।
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RLD के चौधरी नीरपाल सिंह भी करेंगे सपा में वापसी
दूसरे पूर्व मंत्री चौधरी नीरपाल सिंह भी दिवाली के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। नीरपाल सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल के सक्रिय नेताओं में रहे हैं। वह अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी के रूप में भी पहचान रखते हैं और अखिलेश यादव की पिछली सरकार में राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।राष्ट्रीय लोकदल में उन्हें खेल प्रोत्साहन प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी सपा में वापसी से पार्टी को पश्चिमी यूपी में संगठनात्मक मजबूती और युवाओं तथा खिलाड़ियों के बीच संपर्क बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, 2027 में उन्हें किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा, इसको लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सैनी समाज और पश्चिमी यूपी के समीकरण साधने की रणनीति
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान जातीय और सामाजिक समीकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में साहब सिंह सैनी की वापसी से सपा सैनी समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। वहीं चौधरी नीरपाल सिंह के जरिए क्षेत्रीय संपर्कों और संगठन को मजबूती देने की रणनीति दिखाई दे रही है।2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और RLD गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी विपक्षी गठबंधन को इस क्षेत्र में सफलता मिली। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव नए चेहरों और पुराने नेताओं की वापसी के जरिए बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
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बीजेपी और RLD के लिए बढ़ सकती है चुनौती
साहब सिंह सैनी का बीजेपी से सपा में लौटना पिछड़े वर्ग के मतदाताओं के बीच राजनीतिक संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है। वहीं चौधरी नीरपाल सिंह की वापसी से RLD को भी पश्चिमी यूपी में संगठनात्मक स्तर पर झटका लग सकता है। दोनों नेताओं के सपा में आने से पार्टी को स्थानीय स्तर पर अपनी चुनावी गतिविधियां तेज करने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, केवल नेताओं की वापसी से चुनावी जीत तय नहीं होती। सपा को स्थानीय प्रत्याशियों के चयन, जातीय समीकरणों, संगठन की मजबूती और गठबंधन की रणनीति पर भी काम करना होगा।2027 के चुनाव से पहले अखिलेश यादव का यह संभावित सियासी दांव पश्चिमी यूपी में बीजेपी, सपा और RLD के बीच मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दिवाली के बाद दोनों नेता औपचारिक रूप से सपा में कब शामिल होते हैं और पार्टी उन्हें चुनावी मैदान में किस भूमिका में उतारती है।