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UP विधानसभा चुनाव से पहले MLC की 10 और सीटों पर चुनाव, SP और BJP क्या करेंगी?

UP में विधानसभा चुनाव से पहले दिसंबर में सियासत का बड़ा शक्ति परीक्षण होगा। विधान परिषद की दस एमएलसी सीटों पर होने वाले चुनाव में बीजेपी व सपा की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। दोनों दलों के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती होगी।

yogi adityanath and akhilesh yadav

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव, Photo Credit: ChatGPT

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दिसंबर में सियासत का बड़ा शक्ति परीक्षण होने जा रहा है। विधान परिषद की 10 एमएलसी सीटों पर होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। दोनों दलों के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती होगी। यह चुनाव सिर्फ उच्च सदन में संख्या बल बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विधायकों की निष्ठा, टिकट की दावेदारी और 2027 से पहले राजनीतिक समीकरणों की भी परीक्षा लेगा। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा में हुई क्रॉस वोटिंग के बाद इस बार दोनों दल अतिरिक्त सतर्कता बरतेंगे।

 

विधान परिषद की स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र की 10 सीटों पर निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल अगले साल 30 जनवरी को पूरा हो रहा है। ऐसे में दिसंबर में चुनाव कराए जाने की संभावना है। वर्ष 2021 में इन सीटों पर जनवरी में चुनाव हुआ था। इस बार कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है।

10 सदस्यों का कार्यकाल होगा पूरा

इन 10 सीटों पर बीजेपी और सपा के सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इनमें बीजेपी के कुंवर मानवेन्द्र सिंह, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, स्वतंत्र देव सिंह, अरविंद कुमार शर्मा, अश्विनी त्यागी, गोविंद नारायण शुक्ल, धर्मवीर प्रजापति, सलिल विश्नोई और डॉ. सुरेंद्र चौधरी शामिल हैं। वहीं, सपा के राजेंद्र चौधरी का कार्यकाल भी पूरा हो रहा है।

 

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संख्या बल में बीजेपी गठबंधन मजबूत

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी गठबंधन की स्थिति मजबूत है। बीजेपी के पास 255 विधायक हैं, जबकि सपा के 101 विधायक हैं। अपना दल (सोनेलाल) के 13, रालोद के नौ, सुभासपा के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक हैं। कांग्रेस और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो-दो विधायक हैं। इसके अलावा तीन असंबद्ध विधायक हैं और सात सीटें रिक्त हैं।सहयोगी दलों को मिलाकर बीजेपी गठबंधन की संख्या 291 बताई गई है। तीन असंबद्ध विधायकों को जोड़ने पर यह संख्या 294 तक पहुंच जाती है। दूसरी ओर सपा और कांग्रेस को मिलाकर विपक्षी खेमे में 103 विधायक हैं।

आठ सीटों पर बीजेपी गठबंधन की नजर

संख्या बल के हिसाब से बीजेपी गठबंधन आठ सीटें जीतने की स्थिति में है। वहीं, सपा के सामने दो सीटें जीतने के बाद तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती होगी। एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता के वोटों का कोटा माना जा रहा है। इस हिसाब से तीन सीटों के लिए सपा को 111 वोटों की जरूरत होगी। सपा और कांग्रेस के पास फिलहाल 103 विधायक हैं। ऐसे में तीसरी सीट जीतने के लिए उसे कम से कम आठ अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना होगा।बीजेपी गठबंधन के लिए भी नौवीं सीट की राह आसान नहीं होगी। इसके लिए अतिरिक्त समर्थन और वरीयता मतों का गणित साधना पड़ेगा। ऐसे में छोटे दलों और असंबद्ध विधायकों की भूमिका भी अहम हो सकती है।

क्रॉस वोटिंग बिगाड़ सकती है गणित

वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग से पार्टी को बड़ा झटका लगा था। इस बार विधान परिषद चुनाव में भी ऐसी स्थिति से बचना सपा के लिए बड़ी चुनौती होगी। टिकट की दावेदारी और राजनीतिक भविष्य को लेकर विधायकों का रुख चुनावी गणित प्रभावित कर सकता है।बीजेपी भी अपने सहयोगी दलों और समर्थक विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति बनाएगी। यदि किसी दल के विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं तो सीटों का समीकरण बदल सकता है।

 

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2027 से पहले दलों की परीक्षा

विधान परिषद की इन 10 सीटों का चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के संगठनात्मक प्रबंधन की परीक्षा भी बनेगा। टिकट चयन, विधायकों की नाराजगी और गठबंधन की एकजुटता जैसे मुद्दे दोनों दलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। दिसंबर में होने वाला यह चुनाव बताएगा कि किस दल की अपने विधायकों पर कितनी मजबूत पकड़ है और विधानसभा चुनाव से पहले कौन अपने राजनीतिक समीकरणों को बेहतर स्थिति में पहुंचा पाता है।


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