घोटाले जो हर चुनाव में ममता बनर्जी की TMC पर आफत की तरह टूटते हैं
पश्चिम बंगाल में साल 2011 के विधानसभा चुनावों के बाद कोई सत्ता विरोधी लहर नहीं उठी। ममता बनर्जी अजेय रहीं हैं लेकिन हर चुनाव में उनकी पार्टी पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगते रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। Photo Credit: Khabargaon
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार इन दिनों कोयला घोटाले की जांच को लेकर बुरी तरह घिरी हुई है। चुनावी रणनीति तैयार करने वाली कंपनी आई-पैक के लिए ममता बनर्जी संरक्षण की भूमिका में आ गईं हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में 8 जनवरी को छापेमारी कर रहे थे। कंपनी के चीफ प्रतीक जैन के घर भी ईडी के अधिकारी पहुंचे। दोनों जगहों पर केंद्रीय एजेंसियों को रोकने के लिए ममता बनर्जी, अपने पूरे दल-बल के साथ खड़ी रहीं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आईपैक के प्रमुख प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पहुंची, ईडी के अधिकारियों से भिड़ीं और कार्रवाई रोक दी। ममता बनर्जी ने तब दावा किया था कि तृणमूल कांग्रेस के हार्ड डिस्क, आतंरिक दस्तावेज और संवेदनशील डेटा को ईडी के अधिकारी जब्त करना चाहते थे। उन्होंने इसे राजनीतिक रेड और असंवैधानिक बताकर इसे खारिज कर दिया। ममता बनर्जी पर बीजेपी, अब भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगा रही है।
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पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार मंत्री और पदाधिकारियों पर 2011 से अब तक कई संगीन घोटालों के आरोप लगे, जिनकी वजह से हर चुनाव में किरकिरी होती है-
शारदा चिटफंड स्कैम: निवेशकों का पैसा मिलेगा कब?
शारदा ग्रुप एक 200 से ज्यादा निजी कंपनियों का समूह था। सुदीप्तो सेन को इसे घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है। चिटफंड और कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम चल रहा था। लोगों को हाई रिटर्न का वादा किया गया था। इस स्कैम में 17 लाख से ज्यादा निवेशक फंसे, कुल घोटाला 2500 करोड़ से ज्यादा का रहा। कई निवेशकों, एजेंट्स और कर्मचारियों ने आत्महत्या की। इस स्कैम में टीएमसी, कांग्रेस और CPI (M) जैसी पार्टियों के नेताओं पर आरोप लगे। इसमें टीएमसी से जुड़े कई बड़े नेताओं के नाम आए थे। मदन मित्रा, कुणाल घोष, श्रिन्जॉय बोस, सुदीप्तो सेन और देबजानी मुखर्जी जैसे लोग ममता बनर्जी के करीबी रहे हैं। कई आरोपी जेल में हैं, ईडी ने संपत्तियों की कुर्की की, नीलामी की। ज्यादातर निवेशकों को निराशा ही हाथ लगी।
रोज वैली चिट फंड स्कैम, इंसाफ के इंतजार में लोग
रोज वैली चिट फंड स्कैम: रोजवैली स्कैम पश्चिम बंगाल के चर्चित चिट फंड घोटालों में से एक रहा है। रोजवैली ग्रुप ने 20 से ज्यादा कंपनियों के जरिए पोंजी स्कीम चलाई थी। होटल की मेंबरशिप, जमीन में हिस्सेदारी, महंगे ब्याज का वादा किया गया था। साल 2013 में हुए शारदा घोटाले के बाद यह सामने आया था। पश्चिम बंगाल, असम और बिहार के लाखों लोगों से करीब 17,000-17,520 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने परिसंपत्ति निपटान समिति के अध्यक्ष डीके सेठ को 515 करोड़ रुपये से ज्यादा का डिमांड ड्राफ्ट सौंपा था, जिससे पीड़ितों को राहत मिल सके।
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नारद स्टिंग ऑपरेशन स्कैम, जिससे हिल गई थी TMC
नारद स्टिंग ऑपरेशन स्कैम: साल 2014 से 2016 के बीच हुए इस स्टिंग ऑपरेशन की वजह से टीएमसी की खूब किरकिरी हुई। नारद स्टिंग ऑपरेशन में टीएमसी नेताओं को रिश्वत लेते कैमरे पर रिकॉर्ड किया गया, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। नारदा स्टिंग के हीरो मैथ्यू सैमुअल रहे। 2016 में तृणमूल कांग्रेस के फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा, सोवन चटर्जी समेत 12 नेताओं के वीडियो जारी हुआ था। CBI ने इस केस के वीडियो Tehelka ने जारी किए। CBI ने 2017 में FIR दर्ज की थी। ईडी भी इस केस की जांच कर रही है।
SSC स्कैम: कई बड़े नाम, गुनहगारों के साथ बड़े बेगुनाह भी फंस गए
पश्चिम बंगाल SSC घोटाला साल 2016 में सामने आया। WBSSC ने 24,640 शिक्षक और गैर-शिक्षक पदों की भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोपों का सामना किया। 23 लाख उम्मीदवारों के बीच 25,753 नियुक्तियां हुईं, जो पदों से ज्यादा थीं। OMR शीट्स में छेड़छाड़, फर्जी मेरिट लिस्ट और रिश्वत लेकर नियुक्तियां सामने आईं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सभी नियुक्तियां रद्द कीं। अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा और नई भर्ती का आदेश दिया। पूर्व शिक्षा मंत्री परथा चटर्जी सहित कई TMC नेता CBI जांच में फंसे हैं। ममता बनर्जी इसे गलत बताती हैं लेकिन इस प्रकरण में भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे हैं।
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प्राइमरी टीचर भर्ती स्कैम, संगीन मामला, जो दब गया
2016 में वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी एजुकेशन (WBBPE) ने 2014 TET पैनल के आधार पर हजारों प्राइमरी शिक्षकों की नियुक्ति की थी। जल्द ही बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कैश-फॉर-जॉब्स घोटाले के आरोप लगे। 2022 में 140 असफल अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की, जिसमें दावा किया गया कि कम अंक वाले और अप्रशिक्षित उम्मीदवारों को गैरकानूनी तरीके से नियुक्त किया गया। मई 2023 में जस्टिस गंगोपाध्याय की बेंच ने 32,000 नियुक्तियों को रद्द कर दिया और केवल 2,016 अभ्यर्थियों के लिए नई भर्ती का आदेश दिया। बाद में डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई। दिसंबर 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2023 के आदेश को पलट दिया। ममता बनर्जी सरकार की लेकिन खूब किरकिरी हुई।
कोयला तस्करी, जिस पर खिंच गई ममता बनर्जी और ED में तलवार
यह विवाद एक बार फिर चर्चा में है। पश्चिम बंगाल में कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 8 जनवरी को ED ने I-PAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह जांच 2020 के CBI FIR से जुड़ी है, जिसमें अनूप माझी के नेतृत्व वाले सिंडिकेट पर ECL क्षेत्रों से अवैध कोयला खनन और बिक्री का आरोप हैं। ED के मुताबिक 2,742 करोड़ रुपये के अवैध लाभ में से 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए I-PAC को गोवा ऑपरेशंस के लिए ट्रांसफर किए गए। ममता बनर्जी, इस घोटाले को लेकर बीजेपी, कांग्रेस और लेफ्ट के निशाने पर हैं।
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