इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं। संभव है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और असम में अप्रैल-मई में चुनावी तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग करे। इन राज्यों में बड़ी राजनीतिक दलों ने अपना चुनाव अभियान शुरू कर दिया है और जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है चनावी अभियान भी तेज हो रहा है। पश्चिम बंगाल में जहां टीएमसी-बीजेपी-कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां चुनावी मैदान में हैं। असम में बीजेपी-कांग्रेस में सीधी टक्कर है, जबकि तमिलनाडु में डीएमके गठबंधन और एनडीए गठबंधन आमने आमने होंगे।
मगर, इन राज्यों में पुराने क्षेत्रिय पार्टियों के अलावा कुछ नए दल भी उभरकर सामने आए हैं। यह नए दल अपने-अपने राज्यों में 2026 के विधानसभा चुनाव में पहली बार अपनी किस्मत आजमाने जा रहे हैं। तमिलनाडु में इस बार अभिनेता थलापति विजय ने साल 2024 में 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) पार्टी लॉन्च की। वह अपनी इस नई नवेली पार्टी को लेकर 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने राज्य में बड़ी रैलियां करके खुद को DMK और AIADMK के विकल्प के रूप में पेश किया है।
यह भी पढ़ें: नॉर्थईस्ट का बैनर! टिपरा मोथा-NPP की असम पर नजर, जानें नया समीकरण
हुमायूं कबीर की नई पार्टी
इसी तरह से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 2025 के अंत में 'जनता उन्नयन पार्टी' नाम की नई पार्टी बनाई है। कबीर अपने शुरुआती बयानों से साफ कर चुके हैं कि वह अल्पसंख्य वोटरों को अपने पाले में लुभाएंगे। यह तय है कि इन नए राजनीतिक दलों को पहले से स्थापित दलों को चुनौती देने में भारी संघर्ष करना पड़ेगा।
बड़े दलों को चुनौती देना आसान नहीं
हालिया चुनावी आंकड़े बताते हैं कि नई पार्टियों के लिए स्थापित बड़े दलों को चुनौती देना आसान नहीं है। इस लिस्ट में दिल्ली के अन्ना आंदोलन से निकली 'आम आदमी पार्टी' अपवाद है, जो दिल्ली के साथ में पंजाब में सरकार चला चुकी है। साथ ही कई राज्यों में विकल्प के तौर पर उभर रही है।
यह भी पढ़ें: चेन्नई के पास की सीटों से चुनाव क्यों लड़ना चाहती है विजय की पार्टी TVK?
थलापति विजय की TVK मैदान में...
तमिल सिनेमा पर राज करने वाले थलापति विजय ने फिल्मों से संन्यास लेकर पूरी तरह राजनीति में आने का फैसला किया है। दरअसल, साल 2016 के तमिलनाडु विधानसभा में 88 दलों ने चुनाव लड़ा था। इसमें से सिर्फ 4 दलों को ही सीटें मिली थी। जबकि, 2021 के चुनाव में 106 पार्टियों में से केवल 8 ही सीटें जीतने में सफल रही थीं। यह पैटर्न कुछ ऐसा है कि छोटी पार्टियां अक्सर वोट तो काटती हैं लेकिन सीटें जीतने में सफल नहीं हो पातीं।
मुर्शिदाबाद में मस्जिद और हुमायूं
ऐसे ही हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के बागी निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 2025 के अंत में जनता उन्नयन पार्टी बनाई है। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला किया है। मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान करके कबीर ने मौजूदा ममता बनर्जी सरकार को हराने का संकल्प लिया है। यह वह पार्टियां हैं, जो खबरों में आ जाती हैं। मगर, इनके अलावा चुनावों के दौरान दर्जनों पार्टियां बनती और खत्म होती हैं तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेती हैं।
सिर्फ तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और असम ही नहीं बल्कि केरल उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र आदि जैसे राज्यों में भी नई दल बनते और खत्म होते रहते हैं। मगर, यह दल चुनावों में कुछ खास असर नहीं दिखा पाते। हालांकि, जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आएंगी। इन राज्यों में और नए दलों के उभरने की संभावना है, लेकिन क्या इनका नतीजों पर कोई बड़ा असर पड़ेगा? यह तो समय ही बताएगा। मगर, हर चुनाव अपने आप में अनोखा होता है और पिछले आंकड़े सिर्फ एक संकेत मात्र होते हैं।