आज झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग होगी और इन चुनावों को राज्य की राजनीति के लिए काफी अहम माना जा रहा है। वोटिंग से पहले दोनों पक्षों ने घेराबंदी की हुई है और विधायकों को टूटने से बचाने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं। महागठबंधन के पास जरूरी विधायक हैं लेकिन परिमल नथवानी ने उनके सामने चुनौती खड़ी कर दी है। परिमल नथवानी एक बार फिर चर्चा में हैं और राज्यसभा से बस एक कदम दूर हैं।
परिमल नथवानी ने झारखंड से राज्यसभा के लिए निर्दलीय नामांकन किया है और आज उनकी किस्मत पर विधायक फैसला सुनाएंगे। परिमल नथवानी तीन बार के राज्यसभा सांसद हैं। इससे पहले वह दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें एक बार आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस की तरफ से आंध्र प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था।
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उद्योग जगत में बड़ा नाम
परिमल नथवानी राजनीति में चर्चित रहने के साथ-साथ बिजनेस जगत का भी एक जाना माना नाम हैं। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट मामलों के डायरेक्टर हैं। उन्होंने धीरूभाई अंबानी और मुकेश अंबानी के साथ मिलकर काम किया है और गुजरात के जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी के लिए भूमि अधिग्रहण में भी शामिल रहे हैं। परिमल नथवानी ने रिलायंस में कई प्रोजेक्ट्स को लीड किया है। उन्होंने जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी की स्थापना में अहम भूमिका निभाई है। उन्हें मुकेश अंबानी का करीबी बताया जा रहा है।
कितनी है संपत्ति?
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में परिमल नाथवानी सबसे अधिक संपत्ति वाले उम्मीदवार हैं। चुनाव आयोग में दाखिल किए गए पत्र के अनुसार, उनके पास कुल 754. 86 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि उनकी वार्षिक आय 35.70 करोड़ रुपये है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज को प्रोफेशनल सेवाएं प्रदान करते हैं, जिसके बदले उन्हें हर साल 24.99 करोड़ रुपये की इनकम मिलती है। इसके अलावा उनकी पत्नी की सालाना कमाई 4.09 करोड़ रुपये है।
2008 में क्रॉस वोटिंग से जीते
परिमल नथवानी झारखंड की राजनीति का पुरान चेहरा हैं। उन्होंने 2008 और 2014 में झारखंड से ही चुनाव जीता था। उद्योग जगत से निकलकर उन्होंने पहली बार 2008 में राज्यसभा चुनाव में झारखंड से लड़ा था और वह एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे थे। उन्हें अलग-अलग राजनीतिक दलों के विधायकों का समर्थन मिला था। उस समय भी क्रॉस वोटिंग ने उनकी राह आसान कर दी थी। आरजेडी के विधायकों ने उनके पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।
2014 में बीजेपी ने भेजा राज्यसभा
2014 में परिमल नथवानी को निर्दलीय के तौर पर मैदान में नहीं उतरना पड़ा। बीजेपी और आजसू ने ने उन्हें समर्थन दिया। यह चुनाव वह निर्विरोध जीत गए थे। इस जीत के साथ ही वह लगातार दूसरी बार राज्यसभा सासंद चुने गए। इसके अलावा परिमल नथवानी को साल 2020 में भी राज्यसभा पहुंचने का मौका मिला। हालांकि, इस बार वह बीजेपी के समर्थन से नहीं बल्कि आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थन से राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इसी के साथ वह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे।
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क्या चौथी बार बनेंगे सांसद?
इस बार बीजेपी ने 2008 की तरह ही परिमल नथवानी को निर्दलीय के रूप में समर्थन दिया है। एनडीए और बीजेपी उनकी जीत के लिए तमाम कोशिशें कर रहा है। इसके साथ ही विपक्ष ने भी उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ महागठबंधन परिमल नथवानी को रोकने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल महागठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन है और यह दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में परिमल नथवानी सिर्फ क्रॉस वोटिंग से ही जीत सकते हैं।