असम की 126 विधानसभा सीटों पर अप्रैल-मई 2026 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की असम में सरकार है। कांग्रेस पार्टी, मुख्य विपक्षी दल है। कांग्रेस के अलावा, तृणमूल कांग्रेस भी असम चुनावों में उतरती है। असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल जैसे राजनीतिक दल की मजबूत मौजूदगी के बाद भी असम में बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) का दबदबा बना है। AIUDF, असम की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है।
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने साल 2021 में हुए विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी। यह पार्टी, असम की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। AIDUF का जनाधार, अल्पसंख्यक बाहुल जिलों में बेहद मजबूत है। इतना मजबूत कि इन जिलों में अल्पसंख्यकों की हितैषी कही जाने वाली पार्टी कांग्रेस भी AIUDF का वोट शेयर कम नहीं कर पाती है। अब ऐसी अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी इस चुनाव में AIUDF के साथ उतर सकती है।
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अगर असदुद्दीन ओवैसी और बदरुद्दीन अजमल, असम में हाथ मिलाते हैं तो राज्य की 34 फीसीदी मुस्लिम आबादी में ध्रुवीकरण का रंग और गहरा होगा। असदुद्दीन ओवैसी, अल्पसंख्यक राजनीति करते हैं, मुंबई के नगर निगम चुनावों में उनकी पार्टी के 100 से ज्यादा पार्षद जीते हैं, ऐसे में अब उनकी नजरें असम में हैं। कांग्रेस, बदरुद्दीन अजमल को सांप्रदायिक बताती है। बीजेपी के खिलाफ कांउटर नैरेटिव में AIUDF की यही कामयाबी भी है। उनका व्यापक जानाधार, असम में उन्हें और मजबूत बना रहा है।

गौरव गोगोई, कांग्रेस अध्यक्ष, असम:-
बदरुद्दीन अजमल हिमंत बिस्वा शर्मा की लाइफलाइन हैं। जब भी हिमंत को जरूरत पड़ती है, वे 108 नंबर डायल कर लेते हैं। इस बार अजमल अकेले काफी नहीं होंगे, इसलिए हिमंत असदुद्दीन ओवैसी को भी बुला रहे हैं।

कितने मजबूत हैं असम में बदरुद्दीन अजमल?
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की सबसे बड़ी ताकत, अल्पसंख्यक वोट है। बदरुद्दीन अजमल, अपने बयानों से बांग्लाभाषी मुसलमानों को एकजट करने में हर बार सफल हो जाते हैं। AIUDF, असम के बांग्ला भाषी मुसलमानों की सबसे बड़ी पार्टी है। साल-दर-साल इस पार्टी का जनाधार बढ़ता गया है। असम में अब मुस्लिम आबादी 34 फीसदी है।
असम की 126 विधानसभा सीटों में बहुमत का आंकड़ा 64 है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा खुद मान चुके हैं कि राज्य की 22 सीटें ऐसी हैं, जहां भारतीय जनता पार्टी कमजोर है। विपक्ष का एक धड़ा कहता है कि परिसीमन से पहले 29 सीटें ऐसी थीं, जो अल्पसंख्यक बाहुल थीं, अब उनकी संख्या घटकर 22 हो गई है। मुस्लिम मतदाताओं की बढ़ती संख्या ही बदरुद्दीन अमजल की ताकत है।

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इन 22 सीटों पर कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती अब कांग्रेस ही है। पिछले चुनाव का गठबंधन, अब टूट गया है। AIUDF अपने अस्तित्व के बाद से ही राज्य में मजबूत स्थिति में है। साल 2006 में AIUDF के पास 10 विधानसभा सीटें थीं, 2011 तक यह पार्टी 18 सीटों पर आ गई। 2016 में 13 सीटों पर कामयाबी मिली फिर 2021 में 16 सीटों पर जीत मिली। हर साल, पार्टी का जनाधार बढ़ा है, मजबूत हुई है।

किसके लिए बड़ी चुनौती AIUDF?
बदरुद्दीन अजमल, अब कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। असम में कभी अल्पसंख्यक मतदाता, कांग्रेस के कोर वोटबैंक रहे हैं, अब वे AIUDF पर शिफ्ट हो गए हैं। असम में कांग्रेस का जनाधार गिरता जा रहा है। साल 2024 के विधानसभा चुनाव में लेकिन यह पार्टी, कमजोर हो गई। इस चुनाव में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एक सीट नहीं जीत पाई। लोकसभा चुनावों में मोदी फैक्टर हावी था लेकिन अब विधानसभा चुनावों के समीकरण, लोकसभा से अलग होते हैं। बदरुद्दीन अजमल, अपना असर दिखा सकते हैं।

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क्या AIUDF के पक्ष में है?
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी, नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) को लेकर अल्पसंख्यकों के निशाने पर रही है। कई मुस्लिम परिवारों के लोगों को प्रक्रिया में खामी या कागजी जटिलताओं की वजह से डिटेंशन सेंटर जाना पड़ा, बांग्लादेशी और रोहिंग्या बताया गया। सरकारी सतर्कता के बाद भी कुछ लोग परेशान हुए हैं। अल्पसंख्यक मतदाताओं में इसे लेकर खीझ है। बदरुद्दीन अजमल इसे चुनावों में भुना सकते हैं।
