DMK मजबूत सहयोगी, फिर तमिलनाडु में विजय के करीब क्यों जा रही कांग्रेस?
तमिलनाडु के सत्ताधारी गठबंधन में होकर भी सरकार में शामिल न होने वाले कांग्रेस अब दो मोर्चों पर अपने विकल्प तलाश रही है। चर्चा है कि वह विजय के साथ भी गठबंधन कर सकती है।

विजय से मिले थे कांग्रेस नेता, Photo Credit: Khabargaon
तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) की सरकार है। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी दोनों ने साथ ही चुनाव लड़ा लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कई तरह के कयास लगने लगे हैं। चर्चा है कि कांग्रेस थलापति विजय की तमिलाना वेट्री कझगम (TVK) से संपर्क कर रही है। कांग्रेस ने DMK का साथ छोड़ने की खबरों को खारिज भी किया है लेकिन आए दिन कुछ न कुछ ऐसा हो रहा है जिससे तमिलनाडु के सत्ताधारी गठबंधन में खलबली मची हुई है। अब कांग्रेस के सांसद मणिकम टैगोर ने फिर से कहा है कि कांग्रेस और DMK साथ ही रहेंगे।
तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के रिश्तों में इस कथित दरार की हालिया वजह बने हैं प्रवीण चक्रवर्ती। राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले प्रवीण ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस के चेयरमैन हैं। उन्होंने विजय को तमिलनाडु की एक 'बड़ी ताकत' था। उनके इस बयान ने गठबंधन की संभावनाओं को थोड़ी और हवा दे दी थी। दूसरी तरफ कांग्रेस लगातार ऐसी बातों से इनकार कर रही है और DMK को 'नेचुरल साथी' बता रही है। रोचक बात यह है कि विजय की TVK ने कांग्रेस को अपना सबसे 'नेचुरल साथी' बता दिया है।
प्रवीण और विजय की मीटिंग में क्या हुआ?
थलपति विजय से मुलाकात के बारे में प्रवीण चक्रवर्ती कहते हैं 'हां, मैं विजय से मिला था। मैं इतना ही कह सकता हूं। लोगों के मिलने में क्या दिक्कत है? विजय एक बड़ी ताकत हैं और कोई इससे इनकार नहीं कर सकता है।' प्रवीण चक्रवर्ती यह भी कहते हैं कि अब तमिलनाडु में कांग्रेस को मजबूत करने का वक्त आ गया है क्योंकि पिछले 60 साल में पार्टी इस राज्य में कमजोर हुई है।
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इससे पहले, 29 दिसंबर को प्रवीण चक्रवर्ती ने तमिलनाडु के कर्ज की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे जिसने DMK-कांग्रेस के संबंधों को हिलाकर रख दिया। कहा जाता है कि एमके स्टालिन इससे बेहद नाराज हैं लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से कहा है कि इस पर कोई बयानबाजी न करें। दूसरी तरफ कांग्रेस के राज्य प्रभारी गिरीश चोडनकर की अगुवाई में स्टालिन से कांग्रेस नेता मिले थे लेकिन सीट शेयरिंग पर कोई बात नहीं बनी।
2019, 2021 और 2024 में क्या हुआ?
2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और DMK ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन में कुछ अन्य दल भी थे। 234 विधानसभाओं वाले तमिलनाडु में कांग्रेस को सिर्फ 25 सीटें मिली थीं। DMK ने खुद 176 सीटों पर चुनाव लड़ा और बाकी सीटें अन्य गठबंधन सहयोगियों में बांटी गईं। नतीजे आए तो DMK ने अकेले ही बहुमत हासिल कर लिया और 133 सीटों पर जीत हासिल की। कांग्रेस 25 में से 18 सीटें जीत गई। इससे पहले 2016 में 41 सीटों पर लड़कर 8 सीटें जीती थी और 2011 में 63 सीटें लड़कर 5 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी।
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 9 और DMK 23 सीटों पर चुनाव लड़ी। DMK ने सभी 23 सीटें जीतीं और कांग्रेस ने 9 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की। 2024 के लोकसभा चुनाव में लगभग वैसा ही फॉर्मूला चला। इस बार कांग्रेस 9 और DMK 22 सीटों पर चुनाव जीती।
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क्या चाहती है कांग्रेस?
दरअसल, लंबे समय से तमिलनाडु में कांग्रेस का छोटा भाई बनकर चल रही कांग्रेस अब अपना रोल बड़ा करना चाहती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस इस बार 25 नहीं 40 सीटें चाहती है। वहीं, DMK 32 से ज्यादा सीटें देना नहीं चाहती है। यही वजह है कि कांग्रेस के कुछ नेता बड़ा भाई बनने की चाहत में विजय और अन्य दलों को साथ लेकर एक नया गठबंधन बनाना चाहते हैं।
खुद राहुल गांधी के करीबी और कांग्रेस के सांसद मणिकम टैगोर ने कहा था, 'पार्टी सिर्फ सीटों पर गठबंधन नहीं चाहती बल्कि हम सरकार में भी हिस्सेदारी चाहते हैं।' रोचक बात है कि मौजूदा वक्त में तमिलनाडु की सरकार में कांग्रेस का एक भी मंत्री नहीं है। अब कांग्रेस इसी से उबरना चाहती है। यही वजह है कि गठबंधन में सीटों के अलावा पावर की भी बात होने लगी है।
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पहले प्रवीण चक्रवर्ती ने अपने बयानों से तमिलनाडु में जो आग लगाई, उसमें घी डालने का काम TVK के प्रवक्ता फेलिक्स गेराल्ड ने कर दिया था। फेलिक्स ने कहा था कि राहुल गांधी और विजय दोस्त हैं और दोनों के गठबंधन की बहुत संभावनाए हैं।
बिहार जैसा न हो हाल
मौजूदा हालात दिखा रहे हैं कि कांग्रेस में एक बार फिर से कन्फ्यूजन की स्थिति बन रही है और कुछ नेता ज्यादा सीटों की मांग कर रहे हैं। बिहार में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था। कांग्रेस 60 सीटें चाहती थी लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इस पर राजी नहीं थी। इसका नतीजा यह हुआ कि गठबंधन के बावजूद कभी औपचारिक एलान ही नहीं हुआ कि कौन, कितनी सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। नतीजों ने इस गठबंधन को हैरान कर दिया और अब बिहार में चर्चा है कि आरजेडी-कांग्रेस का गठबंधन टूट भी सकता है।
तमिलनाडु में भी बिहार की तरह ही सीटों की संख्या और सत्ता में भागीदारी बढ़ाने की मांग हो रही है। कई महत्वाकांक्षी नेता चाहते हैं कि कांग्रेस को ज्यादा सीटें मिले और सरकार में भागीदारी करके वह खुद को तमिलनाडु में मजबूत करे।
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