logo

मूड

ट्रेंडिंग:

अमरोहा सदर सीट क्यों है खास? जयंत चौधरी से शमी की मुलाकात के क्या हैं मायने

UP विधानसभा चुनाव से पहले RLD प्रमुख जयंत चौधरी की क्रिकेटर मोहम्मद शमी की मुलाकात ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दी है। जैसे पश्चिम बंगाल में युसुफ पठान पर दांव लगाया गया इसी तरह शमी को भी चुनावी अखाड़े में उतारने की तैयारी की जा रही हैै।

Amroha Sadar seat

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के साथ मोहम्मद शमी Photo Credit : Social Media

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में क्रिकेट और राजनीति का कनेक्शन चर्चा में आ गया है। भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी की दिल्ली में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) अध्यक्ष जयंत चौधरी से मुलाकात हुई है। जयंत चौधरी ने भी मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। इसके बाद चर्चा तेज है कि क्या शमी राजनीति की पिच पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं और क्या उनकी नजर अपने गृह जिले की अमरोहा सदर विधानसभा सीट पर है? हालांकि, शमी या आरएलडी की ओर से चुनाव लड़ने को लेकर अभी कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।


मोहम्मद शमी अमरोहा सदर तहसील के सहसपुर अलीनगर गांव के रहने वाले हैं। यही वजह है कि जयंत चौधरी से उनकी मुलाकात को अमरोहा की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि अगर शमी राजनीति में आते हैं तो अपने गृह जिले से सियासी पारी शुरू कर सकते हैं।इस चर्चा को इसलिए भी हवा मिल रही है क्योंकि गठबंधन की स्थिति में अमरोहा सदर सीट आरएलडी के खाते में जाने की संभावनाओं की बात सामने आ रही है। हालांकि सीट बंटवारे और उम्मीदवार को लेकर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।

 

यह भी पढ़ें: UP में BJP की सियासी कवायद, योगी से मिलीं अदिति; संजय निषाद के घर पहुंचे तावड़े

अमरोहा सदर सीट का सियासी इतिहास क्या है?

अमरोहा सदर विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ था। मौजूदा सियासी तस्वीर में यह सीट समाजवादी पार्टी के मजबूत प्रभाव वाली सीट रही है। महबूब अली 2002 से इस सीट से चुनाव जीतते रहे हैं और पिछले चार चुनाव सपा के टिकट पर जीते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में महबूब अली ने बीजेपी के राम सिंह को करीब 71 हजार वोटों से हराया था। महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे, जबकि राम सिंह को 57,699 वोट हासिल हुए थे। 2022 में अमरोहा विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,13,755 मतदाता थे। इनमें 1,64,096 पुरुष, 1,49,640 महिला  मतदाता शामिल थे। उस चुनाव में यहां 71.54 फीसदी मतदान हुआ था।

बंगाल में यूसुफ पठान वाला उदाहरण क्यों अहम?

क्रिकेट और राजनीति के इस कनेक्शन में पश्चिम बंगाल का उदाहरण भी सामने आता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को बहरामपुर से उम्मीदवार बनाया था। पठान ने चुनाव में 5,24,516 वोट हासिल किए और कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी को 85,022 वोटों के अंतर से हराया।यानी क्रिकेट की लोकप्रियता वाले चेहरे को पार्टी ने सीधे चुनावी मैदान में उतारा और बहरामपुर में वह चुनाव जीतने में सफल रहे। यही वजह है कि यूपी में शमी की संभावित राजनीतिक एंट्री की चर्चा के बीच यूसुफ पठान का उदाहरण भी दिया जा रहा है। हालांकि दोनों चुनावों की परिस्थितियां और स्थानीय राजनीतिक समीकरण अलग हैं।

 

यह भी पढ़ें: राहुल लोधी के घर चाय पीने क्यों जा रहे अखिलेश? 24 सितंबर के दौरे की पूरी कहानी

मुलाकात के क्या हो सकते हैं सियासी मायने?

शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात के बाद अमरोहा में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह सिर्फ मुलाकात थी या इसके पीछे कोई राजनीतिक बातचीत भी हुई। अभी इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन शमी का अमरोहा से जुड़ाव और आरएलडी अध्यक्ष के साथ मुलाकात ने 2027 के चुनाव को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। एक दूसरा पहलू शमी के परिवार से भी जुड़ा है। अमरोहा सदर सीट से उनके भाई मोहम्मद हसीब के आरएलडी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर भी पहले चर्चा सामने आ चुकी है। ऐसे में अब जयंत चौधरी और शमी की मुलाकात ने इस पूरे घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया है।


और पढ़ें