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'कागज दिखाओ...', कर्नाटक सरकार RSS के वजूद पर सवाल क्यों खड़े कर रही है?

कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से पूछा है कि क्या यह रजिस्टर्ड संस्था है, अगर है तो अभी इसकी विधिक स्थिति क्या है।

Mohan Bhagwat RSS Chief PTI

RSS प्रमुख मोहन भागवत। Photo Credit: PTI

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कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत से संगठन की कानूनी स्थिति बताने के लिए प्रतिनिधि भेजने को कहा है। गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने मोहन भागवत को पत्र लिखा है और आधिकारिक तौर पर पदाधिकारियों की सूची मांगी है। प्रियांक खड़गे ने पूछा है कि इतने बड़े संगठन के रूप में वह बिना औपचारिक पंजीकरण के कैसे काम कर रहा है।
 
प्रियांक खड़गे ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की 2025-26 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक में संगठन की उपस्थिति ज्यादा है। यहां 4,127 शाखाएं हर दिन लगती हैं, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियां चलाई जाती हैं। संघ कर्नाटक में 562 रूट मार्च निकालता है, जिसमें 2.21 लाख यूनिफॉर्मधारी कार्यकर्ता शामिल होते हैं। 

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RSS से क्या सवाल पूछ रहे हैं कर्नाटक के गृहमंत्री?

कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियाकं खड़गे ने कहा, 'इतना बड़ा संगठन निजी या अनौपचारिक तरीके से नहीं चल सकता। इसमें कानूनी स्थिति, जवाबदेही, फंडिंग के स्रोत, खर्च, संपत्ति और सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति जैसे कई सवाल उठते हैं।'

'RSS खुद को संस्था के तौर पर दर्ज कराए'

प्रियांक खड़गे ने कहा कि आरएसएस राष्ट्रवाद, अनुशासन और कर्तव्य की बात करता है तो उसे खुद इन मूल्यों को निभाते हुए पारदर्शिता दिखानी चाहिए। उन्होंने आरएसएस से अपील की है कि वह अपने शताब्दी वर्ष में खुद को कानूनी रूप से पंजीकृत करें, अपनी गतिविधियां और आय-व्यय सार्वजनिक करें। 

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RSS से क्या-क्या पूछ रहे हैं प्रियांक खड़गे?

प्रियांक खड़गे ने कहा है कि संघ को भी सभी टैक्स भरना चाहिए। सरकार ने RSS से कई जानकारियां मांगी हैं, जिनमें कानूनी आधार, दान के स्रोत, खर्च का विवरण, संपत्तियां, टैक्स भुगतान और सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमतियां शामिल हैं।

दूसरे दलों ने क्या कहा है?

कर्नाटक सरकार क फैसले पर DMK नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, 'RSS ऐसा संगठन है, जिसका रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। अगर वे दर्ज नहीं करा रहे हैं तो यह नियमों का उल्लंघन है। कोई भी सामाजिक संगठन रजिस्टर्ड होना चाहिए।' 

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लोग क्या कह रहे हैं?

RSS के समर्थकों ने कहा है कि संघ की पैठ कर्नाटक में गहरी हो रही है। हर दिन हजारों की संख्या में शाखाएं लगती है, जो कांग्रेस को खटक रहा है। हिंदुत्ववादी लोग संघ की विचारधारा से प्रभावित होकर संगठन में आ रहे हैं। शीतल चोपड़ा ने X पर लिखा है, 'क्या आपको पता है कि कांग्रेस RSS को कर्नाटक में निशाना बना रही है। हर दिन संघ की 4,127 शाखाएं लगती हैं, 1389 सप्ताहिक मिलन और 60 मंडली राज्यभर में लगती है।' कांग्रेस को इसी से डर है। 

RSS के वजूद पर कांग्रेस सवाल क्यों उठाती है?

साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने प्रतिबंध लगा दिया था। 11 जुलाई को 1949 में प्रतिबंध हट गया। जब देश में आपात काल लगा, तब इंदिरा गांधी ने इस संगठन को प्रतिबंधित किया, 1977 में बैन हटा। बाबरी विध्वंस के बाद पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने 1992 में कुछ सख्ती बढ़ाई थी। 

विश्लेषकों का कहना है कि कांग्रेस का रुख, संघ के हमेशा खिलाफ रहा है। संघ खुद को धार्मिक-सामाजिक संगठन कहता है, कांग्रेस इसे हिंदुत्ववादी संगठन कहती है। कांग्रेस का कहना है कि संघ और बीजेपी के ध्रुवीकरण की वजह सामाजिक दरार बढ़ रही है। संघ दक्षिणपंथी संगठन है, जिसका झुकाव हिंदुत्व की ओर रहा है। कांग्रेस जब-जब संघ का विरोध करती है, अल्पसंख्यक मतदाता कांग्रेस के रुख पर समर्थन देते हैं। कांग्रेस, संघ के विरोध से अपना वोट बैंक मजबूत कर रही है।

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