हिमाचल प्रदेश का त्रिलोकनाथ मंदिर पूरी दुनिया में एक लौता मंदिर है, जहां दो धर्मों के लोग दर्शन करने जाते हैं। यहां एक तरफ भगवान शिव की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी तरफ इस मंदिर में गौतम बुद्ध की प्रतिमा और स्तंभ विराजमान हैं, जहां लोग पूजा करने आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रिलोकनाथ मंदिर में दर्शन करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही इस मंदिर के आस-पास का मौसम बेहद खूबसूरत नजर आता है, जहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं। साल के 6 महीने तक यह मंदिर बर्फ से ढका रहता है, जहां तापमान माइनस 25 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले में चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक त्रिलोकनाथ मंदिर का निर्माण पांच पांडवों ने किया था। वहीं दूसरी तरफ बौद्ध धर्म में मंदिर की स्थापना को लेकर अलग अवधारणा है। बौद्ध धर्म में माना जाता है कि 8वीं शताब्दी में पद्मसंभव यहां आए थे, जिन्होंने इस मंदिर में पूजा की थी। अब सवाल उठता है कि इस मंदिर में दो अलग-अलग धर्मों का संगम क्यों माना जाता है।
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त्रिलोकनाथ मंदिर की खासियत
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मंदिर की स्थापना पांडवों ने कराई थी, जहां तीनों लोकों के गुरु भगवान शिव की पूजा की जाती है। जबकि बौद्ध अनुयायी इन्हें अवलोकितेश्वर के रूप में पूजते हैं, जो करुणा के स्वरूप माने जाते हैं। यहां हिंदू और बौद्ध धर्म को मानने वाले भक्त अपने-अपने तरीके से पूजा करते हैं।
त्रिलोकनाथ मंदिर के गर्भगृह में एक तरफ हिंदू पुजारी और एक बौद्ध लामा साथ-साथ बैठते हैं। दोनों पुजारी बारी-बारी से शिवलिंग की पूजा करते हैं। साथ ही मंदिर में आने वाले भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इस मंदिर में बौद्ध मान्यताओं से जुड़ा एक स्तंभ भी है, जो दीवार के बेहद नजदीक है। माना जाता है कि जो व्यक्ति स्तंभ और दीवार के बीच से गुजर जाता है, उसने कोई पाप नहीं किया है। वहीं जो व्यक्ति बीच से नहीं निकल पाता, उसे पापी माना जाता है। हालांकि, यह मंदिर की अनोखी संस्कृति को दर्शाता है।
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धर्म और संस्कृति के संगम की वजह
कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि त्रिलोकनाथ मंदिर के शिवलिंग में न सिर्फ भगवान शिव विराजमान हैं, बल्कि शिव जी के माथे पर गौतम बुद्ध भी विराजमान हैं। इसी वजह से इस मंदिर में हिंदू भक्तों के साथ-साथ बौद्ध धर्म के अनुयायी भी पूजा-अर्चना करने आते हैं।
कैसे जाएं त्रिलोकनाथ मंदिर?
त्रिलोकनाथ मंदिर जाने के लिए सबसे पहले बस, गाड़ी या ट्रेन के जरिए हिमाचल प्रदेश पहुंचना होगा। हिमाचल प्रदेश में स्थित त्रिलोकनाथ मंदिर जाने के लिए वहां से गाड़ी या बस के जरिए लाहौल पहुंचा जा सकता है। इसके बाद गाड़ी के जरिए मंदिर तक जाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर - यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं की जाती।