logo

ट्रेंडिंग:

बिहार का बाबा विदेश्वरनाथ मंदिर, जानिए क्यों कहते हैं छोटा देवघर

बिहार में स्थित विदेश्वरनाथ महादेव मंदिर मिथिला की प्राचीन संस्कृति और राजा जनक के इतिहास को खुद में समेटे हुए है। इसे देवघर (बाबा वैद्यनाथ) का छोटा भाई माना जाता है, जहां शिवभक्तों की अटूट आस्था जुड़ी है।

Baba Videshwarnath Temple

बाबा विदेश्वरनाथ मंदिर, Photo Credit- Wikipedia

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

बिहार के मिथिलांचल में आस्था के कई केंद्र हैं लेकिन मधुबनी जिले के झंझारपुर में 'विदेश्वरनाथ महादेव मंदिर' या बाबा बिदेश्वर स्थान का स्थान इन सभी में मुख्य है।  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का सीधा संबंध विदेह के राजा जनक से है। ऐसी चर्चा है कि 'विदेह' शब्द से ही इस मंदिर का नाम 'विदेश्वर' पड़ा, जिसका अर्थ है 'विदेह के स्वामी'। स्थानीय लोग इसे बाबा वैद्यनाथ धाम का छोटा भाई मानते हैं। लोगों में यह विश्वास है कि यहां जल चढ़ाने से वही फल मिलता है जो देवघर में मिलता है।

 

इतिहास की बात करें तो यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्वपूर्ण है। मंदिर की दीवारों पर 'मिथिलाक्षर' लिपि में शिलालेख मौजूद हैं, जो बताते हैं कि सन 1300 ईस्वी के आसपास इस पुराने मंदिर की फिर से मरम्मत करने का प्रयास किया गया था। 

 

यह भी पढ़ें: क्यों खास है गढ़मुक्तेश्वर धाम? जानें मुक्ति से जुड़ी कहानी

शिवलिंग और महाशिवरात्रि में आयोजन

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थापित शिवलिंग 'स्वयंभू' है, जिसका अर्थ है कि यह स्वयं प्रकट हुआ है। पहली धारणा के अनुसार, मिथिलांचल के लोगों के लिए इस मंदिर का महत्व ‘छोटा देवघर’ के समान है जबकि कुछ लोग इसे काशी विश्वनाथ मंदिर के समान भी मानते हैं। कुल मिलाकर, अलग-अलग मान्यताओं के बावजूद यह स्थान शिव भक्तों के बीच बहुत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। लोग आज भी पूरी श्रद्धा से यहां की परंपराओं और विश्वासों का पालन करते हैं।

 

महाशिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। भक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा का जलाभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर में मुख्य शिवलिंग के साथ माता पार्वती और नंदी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां की एक अनोखी परंपरा भगवान भैरवनाथ से जुड़ी है। कहा जाता है कि भाद्र पूर्णिमा के दिन यहाँ पूरे शिव परिवार का मिलन होता है, जिसे देखने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।

 

सावन के महीने और माघ की मकर संक्रांति के दौरान यहां मेले जैसा माहौल रहता है। लाखों भक्त यहां महादेव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। यहां होने वाले मुंडन और उपनयन संस्कार विशेष फलदायी माने जाते हैं।

 

यह भी पढ़ें: आज का राशिफल: 12 फरवरी को गुरु और मूलांक 3 का बन रहा खास संयोग

कैसे पहुंचें? 

यह मंदिर झंझारपुर-दरभंगा स्टेट हाईवे के पास विदेश्वर गांव में स्थित है। ट्रेन से आने वाले यात्रियों के लिए लोहना रोड रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी विकल्प है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।


और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap