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29 या 30 सितंबर कब है भरणी श्राद्ध? पितरों के तर्पण से मिलेगी पूर्वजों को मोक्ष

पिछले कुछ दिनों से पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान की भरणी श्राद्ध तिथि बेहद खास मानी जाती है। जानें भरणी श्राद्ध कब है और इस दिन लोगों को क्या करना चाहिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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27 सितंबर से ही पितृ पक्ष के पावन दिनों की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान व्यक्ति अपने मृत पूर्वजों को याद करते हैं। इसके साथ ही पितरों के लिए कुछ परंपराएं निभाते हैं। पितृ पक्ष के दौरान भरणी श्राद्ध तिथि को सबसे खास दिन माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, इस दिन पिंडदान और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इस वजह से लोगों को भरणी श्राद्ध के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए कुछ खास काम करना चाहिए।

 

 पितृ पक्ष के दौरान भरणी तिथि तो शुभ मानी ही जाती है, इसके साथ ही दो और तिथियां हैं, जिन्हें बेहद विशेष माना जाता है। भरणी तिथि के अलावा मातृ नवमी और सर्वपितृ अमावस्या है। इन तीनों तिथियों का अलग महत्व और खासियत है। भक्तों को कोशिश करनी चाहिए कि वे इन दिनों कोई ऐसी गलती न करें, जिससे पूर्वज नाराज हो जाएं। जानकारी के लिए बता दें, 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक पितृ पक्ष रहेगा। अब सवाल उठता है कि भरणी श्राद्ध कब है? आइए जानते हैं।

 

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कब है भरणी श्राद्ध?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 29 सितंबर को भरणी तिथि है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, भरणी नक्षत्र की शुरुआत सुबह 9 बजकर 3 मिनट से होगी। इसके बाद 30 सितंबर को सुबह 7 बजकर 36 मिनट तक भरणी श्राद्ध रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्यक्ति को कुतुप मुहूर्त में तर्पण करना चाहिए। यह समय पितरों को याद करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

 

कुतुप मुहूर्त वह समय है, जब यमराज देवता का खास प्रभाव रहता है। पितरों पर यमराज की सकारात्मक कृपा बनी रहे, इसलिए व्यक्ति को भरणी श्राद्ध के कुतुप मुहूर्त में तर्पण करना चाहिए। इस बार 29 सितंबर को सुबह 11 बजकर 47 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक कुतुप मुहूर्त रहेगा।

 

यह भी पढ़ें: पितृपक्ष शुभ है, मांगलिक कामों को शुरू करने पर रोक क्यों? गरुड़ पुराण से समझिए

भरणी श्राद्ध का क्या है महत्व?

कई लोगों का मानना है कि बिहार के गया जी में पितरों का तर्पण बेहद अहम है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गया जी में पितरों का तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। उसी तरह माना जाता है कि भरणी श्राद्ध के दिन तर्पण करने से गया जी में किए गए तर्पण के समान लाभ मिलता है। इसी वजह से व्यक्ति को खास तौर पर भरणी श्राद्ध के दिन तर्पण करना चाहिए।

इस दिन क्या न करें?

भरणी श्राद्ध के दिन लोगों को अपने पितरों को याद करना चाहिए। इसके बाद मांगलिक कार्यों में व्यस्त नहीं होना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो लोग भरणी श्राद्ध के दिन अपने सांसारिक उत्सव में व्यस्त होते हैं और पिंडदान और तर्पण जैसे काम नहीं करते, तो इससे पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलती है। जिस वजह से व्यक्ति से पूर्वज नाराज हो सकते हैं। इसी वजह से व्यक्ति को भरणी श्राद्ध के दिन न कोई नई संपत्ति खरीदनी चाहिए और न ही उत्सव मनाना चाहिए।

 

नोट:यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

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