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चंद्रभागा शक्तिपीठ: वह पवित्र स्थान जहां गिरा था देवी सती का पेट

चंद्रभागा शक्तिपीठ से जुड़ी एक विशेष महत्व है। आइए जानते हैं, इस शक्तिपीठ की कथा और इस स्थान से जुड़ी मान्यताएं।

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देवी दुर्गा सांकेतिक चित्र।(Photo Credit: Freepik)

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भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक, चंद्रभागा शक्तिपीठ गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित है। बता दें कि शक्तिपीठ वह पवित्र स्थल हैं, जहां देवी सती के शरीर के अंग के गिरने से उत्पन्न हुए, जिनका उल्लेख शिव पुराण, देवी पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। शास्त्रों में बताया गया है कि चंद्रभागा शक्तिपीठ में माता सती का पेट गिरा था, जिससे यह स्थान शक्ति उपासकों के लिए अत्यंत पवित्र बन गया। यह मंदिर सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पास स्थित है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

चंद्रभागा शक्तिपीठ की पौराणिक कथा

चंद्रभागा शक्तिपीठ की उत्पत्ति की कथा देवी सती और भगवान शिव से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, सती राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं और उन्होंने भगवान शिव से विवाह किया था। एक बार राजा दक्ष ने भगवान शिव को अपमानित करने के उद्देश्य से एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया और उसमें शिवजी को आमंत्रित नहीं किया। माता सती भगवान शिव के बिना यज्ञ में चली गईं, जहां उन्होंने अपने पति का अपमान होते देखा। वह इस अपमान को सहन नहीं कर सकीं और यज्ञ की अग्नि में कूदकर आत्मदाह कर लिया।

 

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माता सती के प्राण त्यागने से भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने अपने गणों के साथ दक्ष के यज्ञ को नष्ट कर दिया और सती के शरीर को उठाकर ब्रह्मांड में तांडव करने लगे। इस स्थिति से सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा, जिससे देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया। ये अंग जहां-जहां गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई।

 

कहा जाता है कि माता सती का पेट गुजरात के जूनागढ़ में गिरा था, और यही स्थान चंद्रभागा शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यहां माता के साथ भगवान शिव को भैरव कपालीश्वर के रूप में पूजा जाता है।

चंद्रभागा शक्तिपीठ का इतिहास

चंद्रभागा शक्तिपीठ हजारों वर्षों से शक्ति की उपासना का केंद्र रहा है। प्राचीन ग्रंथ और लोक कथाओं में इस स्थान की महिमा का वर्णन मिलता है। इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का पुनर्निर्माण गुप्त और चालुक्य शासकों द्वारा किया गया था।

 

साथ ही यह शक्तिपीठ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पास स्थित है, जो इसे और अधिक पवित्र बनाता है। कई श्रद्धालु पहले सोमनाथ के दर्शन करके चंद्रभागा शक्तिपीठ की यात्रा करते हैं। जिससे वह अपनी धार्मिक यात्रा पूर्ण मानते हैं।

चंद्रभागा शक्तिपीठ की धार्मिक मान्यताएं और महत्व

मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से माता की पूजा करता है, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं। इसके साथ एक लोकमान्यता यह भी यहां देवी आदिशक्ति की उपासना करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। ऐसा भी माना जाता है भगवान श्री कृष्ण का मुंडन संस्कार इसी स्थान पर हुआ था।

 

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नवरात्रि और अन्य उत्सवों का विशेष महत्व

नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भक्त माता को प्रसन्न करने के लिए उपवास रखते हैं। इसके साथ मकर संक्रांति और शिवरात्रि के दिन भी विशेष भव्य अनुष्ठान होते हैं। इसके साथ पूर्णिमा और अमावस्या जैसी प्रमुख तिथियों पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। साथ ही यह स्थान सिर्फ माता शक्ति का नहीं बल्कि भगवान शिव के एक रूप भैरव कपालीश्वर की भी पूजा का प्रमुख स्थल है। यह दर्शाता है कि शिव और शक्ति का मिलन संपूर्ण सृष्टि की ऊर्जा का आधार है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी ज्योतिष शास्त्र, सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।


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