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आपको भी करियर में चाहिए कामयाबी? गीता के इस श्लोक से समझें सफलता का मंत्र

कई बार लोगों को करियर में सफलता हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें भगवद्गीता की खास सीख को अपनाना चाहिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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आज के दौर में हर व्यक्ति अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और सफलता हासिल करने की होड़ में लगा रहता है। कई लोग अपनी सूझ-बूझ के हिसाब से लगातार कठिन मेहनत भी करते हैं। कठिन मेहनत करने के बावजूद भी कुछ लोग लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाते हैं। इसी वजह से लोग सफलता हासिल करने में भी पीछे रह जाते हैं। इसी सिलसिले में भगवद्गीता में एक श्लोक बताया गया है, जिसे अपने जीवन में अपनाकर हर व्यक्ति सफलता हासिल कर सकता है। भगवद्गीता के श्लोक के अनुसार, सफलता के लिए सिर्फ लक्ष्य या ज्ञान ही काफी नहीं है। इसके साथ ही व्यक्ति को कुछ चीजों को भी अपनाना चाहिए।

 

सनातन धर्म में भगवद्गीता को बेहद खास ग्रंथ माना जाता है। यह ग्रंथ 18 उपदेशों में से एक माना जाता है। भगवद्गीता में लिखे श्लोक भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश हैं। भगवान के उपदेशों को अपनाकर कई व्यक्ति अपने जीवन की चुनौतियों का समाधान पा सकते हैं। भगवद्गीता के 18वें अध्याय के श्लोक में सफलता का मंत्र बताया गया है, जिसे व्यक्ति को अपनाना चाहिए।

 

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श्लोक से मिलती है काम करने की प्रेरणा

भगवद्गीता में बताया गया है कि व्यक्ति को सफलता प्राप्त करने के लिए सिर्फ बुद्धि ही काफी नहीं है। इसके साथ-साथ व्यक्ति के पास साधन, आत्मचिंतन और नियंत्रित कर्म भी होने चाहिए। जब व्यक्ति इन सारी चीजों का उपयोग करता है, तो उसे जल्द से जल्द सफलता मिल सकती है। कोई भी व्यक्ति कर्म करके ही सफलता हासिल कर सकता है।

 

कर्म के बारे में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझा रहे हैं कि कोई भी कर्म अचानक नहीं होता। उसके पीछे एक पूरी प्रक्रिया काम करती है। पहले कर्म की प्रेरणा बनती है, फिर कर्म के आधार मिलकर उसे पूरा करते हैं। यह श्लोक असल में कर्म का पूरा विज्ञान समझाता है और यही विज्ञान हमारे करियर पर भी लागू होता है।

 

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ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना।
करणं कर्म कर्तेति त्रिविधः कर्मसंग्रहः॥

 

इस श्लोक का अर्थ है कि कोई भी कर्म करने के लिए व्यक्ति को तीन प्रकार की प्रेरणा लेनी पड़ती है। कर्म करने से पहले व्यक्ति को उस कर्म के बारे में ज्ञान होना चाहिए। दूसरा, व्यक्ति के लिए वह कर्म जानने योग्य होना चाहिए। तीसरा, व्यक्ति का स्वभाव है। यही तीन कारक व्यक्ति को काम करने की प्रेरणा देते हैं।

सफलता के 3 सूत्र

1. साधन-कोई काम करने के लिए व्यक्ति के पास संसाधन भी होने चाहिए। बिना संसाधनों के व्यक्ति को लक्ष्य की प्राप्ति करने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही सही साधन चुनना और उनका समझदारी से उपयोग करना काम को आसान और तेज बनाता है।

 

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2. कर्म-व्यक्ति के पास ज्ञान और लक्ष्य कितने भी मजबूत क्यों न हों, अगर उन पर अमल नहीं होता, तो नतीजा कभी भी नहीं मिल पाएगा। इसलिए कर्म करना बेहद जरूरी है।

3. कर्ता- व्यक्ति को अपने कर्म को लेकर ईमानदारी, धैर्य और अनुशासन रखना चाहिए। तभी व्यक्ति अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सफलता हासिल कर पाएगा।

 

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