logo

मूड

ट्रेंडिंग:

Gen Z को नहीं है स्वाद पर कंट्रोल? नवपद ओली पर्व सिखाता है स्वाद पर विजय पाना

कई लोग अपने स्वाद पर नियंत्रण करना भूल गए हैं। खासकर जनरेशन जेड (Gen Z)  के युवाओं के लिए यह सबसे बड़ी समस्या है। वे जैन धर्म के नवपद ओली पर्व को मनाकर जीभ पर नियंत्रण कर सकते हैं।

women

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

आज के दौर में  जनरेशन जेड (Gen Z)  के लोगों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें अपनी जीभ पर कंट्रोल नहीं है। वे लोग हर तरह का जंक फूड खाना पसंद करते हैं। जिन्हें कम मसालों की जगह ज्यादा तेल-मसाले वाला भोजन पसंद है। अनहेल्दी खाना भी लोगों के शरीर का सबसे बड़ा दुश्मन है। ज्यादा जंक फूड खाने की वजह से व्यक्ति को न केवल मोटापे का सामना करना पड़ता है, बल्कि कई बीमारियां भी हो सकती हैं। इसी वजह से व्यक्ति को अपनी जीभ यानी स्वाद पर कंट्रोल करना चाहिए। जीभ पर कंट्रोल पाने के लिए लोगों को नवपद ओली पर्व मनाना चाहिए।

 

जैन धर्म में नवपद ओली पर्व बेहद खास है। यह सिर्फ एक दिन का पर्व-त्योहार नहीं है, बल्कि इस त्योहार को कुल 9 दिनों तक मनाया जाता है। इस साल 17 अक्टूबर से लेकर 26 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इस त्योहार की नौ दिनों की सभी परंपराएं निभाकर व्यक्ति न सिर्फ अपनी जीभ पर कंट्रोल पा सकता है, बल्कि व्यक्ति अपनी सहन क्षमता भी बढ़ा सकता है। अब सवाल उठता है कि इस पर्व में ऐसा क्या किया जाता है, जिस वजह से व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल कर सकता है।

 

यह भी पढ़ें:  जैनों के लिए खास है अक्टूबर का महीना, कौन से व्रत-त्योहार पड़ रहे हैं? जानें

पर्व से पा सकते हैं जीभ पर काबू

जैन धर्म के नवपद पर्व में लोगों को आयंबिल भोजन खाना होता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति को दूध, दही, तेल, घी, तली हुई चीजें और शक्कर नहीं खानी होती। इसके साथ ही नवपद पर्व के दौरान सिर्फ एक बार भोजन करने की परंपरा है, जिसमें सिर्फ उबला हुआ और बिना स्वाद का भोजन खाया जाता है।

 

अगर इस परंपरा को 9 दिनों तक  नरेशन जेड (Gen Z)  के लोग अपना लें, तो तेल में भूने खाने की लत कम हो सकती है। इसके साथ ही अगर व्यक्ति 9 दिनों तक घी, तेल, शक्कर और मसाला न खाए, तो शरीर में डिटॉक्स होता है, जिससे व्यक्ति का डाइजेस्टिव सिस्टम मजबूत हो जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: पितृपक्ष शुभ है, मांगलिक कामों को शुरू करने पर रोक क्यों? गरुड़ पुराण से समझिए

बढ़ती है सहन शक्ति

नवपद पर्व के दौरान सभी लोग ब्रह्मचर्य अपनाते हैं। इसमें व्यक्ति नौ दिनों तक सुबह और शाम ध्यान करते हैं। इसके साथ ही व्यक्ति भगवान के सामने अपने पापों को लेकर माफी मांगते हैं। सात्विक जीवन के जरिए व्यक्ति न सिर्फ अपनी इंद्रियों पर कंट्रोल करना सीखता है, बल्कि उसकी सहन शक्ति भी बेहतर हो सकती है। इसी वजह से आज की युवा पीढ़ी को यह पर्व मनाना चाहिए, ताकि अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण पाया जा सके।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और समान्य धारणाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

Related Topic:#Vrat Tyohar

और पढ़ें