सनातन धर्म में करवा चौथ बेहद खास पर्व माना जाता है। इस त्योहार पर सभी सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग यानी पति के सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिलाएं यह व्रत रखती हैं, उन्हें शिव जी, पार्वती और करवा माता के आशीर्वाद से सुखी वैवाहिक जीवन का वरदान मिलता है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, इस दिन महिलाओं को व्रत कथा पढ़नी या सुननी चाहिए, वरना व्रत का प्रभाव अधूरा माना जाएगा।
इस साल 29 अक्टूबर को देशभर में करवा चौथ का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन लाखों महिलाओं के साथ-साथ उनके पति भी व्रत रखते हैं, जिससे उन्हें देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। अब सवाल उठता है कि करवा चौथ त्योहार की व्रत कथा क्या है?
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करवा चौथ व्रत कथा
पौराणिक काल में एक साहूकार था, जिसके सात बेटे थे और सिर्फ एक बेटी थी। पूरा परिवार एक साथ बैठकर भोजन करता था। जब कार्तिक महीने की चतुर्थी तिथि पर बहन ने निर्जला व्रत रखा, तब सभी भाइयों ने बहन से कहा कि बहन, तुम भी खाना खा लो। तब उनकी मां बोली कि आज यह खाना नहीं खाएगी क्योंकि इसने करवा चौथ का व्रत रखा है। अब रात को चंद्रमा देखने के बाद ही यह खाना खाएगी।
भाई अपनी बहन को भूखा-प्यासा नहीं देख पाए। इसलिए भाइयों ने जंगल में जाकर आग जलाकर चांद दिखा दिया। तब सभी भाभियां बोलीं कि चंद्रमा उग चुका है। भाइयों ने लड़की से कह दिया कि यह चंद्रमा तुम्हारे लिए निकला है। यह सुनकर लड़की ने अर्घ्य दिया और खाना खाने बैठी तो पहले निवाले में बाल निकल आया। रोटी का दूसरा टुकड़ा तोड़ा तो उसे छींक आ गई। इसके बाद जब तीसरा टुकड़ा तोड़ा तो राजा के घर से बुलावा आ गया कि राजा का लड़का बीमार है।
इसके बाद मां ने लड़की के पहनने के लिए तीन बार संदूक खोला लेकिन तीनों बार सफेद कपड़े निकले। अब उसे सफेद कपड़े पहनाकर ही ससुराल भेज दिया गया। मां ने लड़की के पल्लू में एक सोने का सिक्का बांध दिया और बोली कि रास्ते में जो भी मिले, उसके पैर पड़ती जाना।
जो लोग तुझे सुहाग का आशीर्वाद दें, उन्हें सोने का सिक्का दे देना और पल्लू में गांठ लगा लेना। अब उसे रास्ते में जो कोई भी मिला, वह सबके पैर पड़ी, पर किसी ने भी सुहाग का आशीर्वाद नहीं दिया। जब लड़की अपने ससुराल पहुंची तो दरवाजे पर छोटी ननद मिली। वह उसके पैर पड़ी तो ननद बोली, पुत्रवती हो।
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तब लड़की ने उसे सोने का सिक्का देकर पल्लू में गांठ मार ली। उसके बाद वह अंदर आई तो उसने देखा कि पति मरा पड़ा है। अब वह उसे लेकर एक कोठरी में पड़ी रही। एक साल तक उसकी सेवा की। उसकी सास दासी के हाथ बची-खुची रोटी भेज देती। इस प्रकार उसे अपने पति की सेवा करते-करते एक साल हो गया।
करवा चौथ का व्रत आया। सारी पड़ोसनें नहा-धोकर करवा चौथ का व्रत रखने लगीं। सबने सिर धोकर हाथों में मेहंदी लगाई और चूड़ियां पहनीं। वह सब देखती रही। एक पड़ोसन बोली, तुम भी करवा चौथ का व्रत कर लो। तब लड़की बोली कि मैं कैसे करूं? तो वह बोली कि चौथ माता की कृपा से सब ठीक हो जाएगा।
उसके कहने पर उसने भी व्रत रखा। महिला ने अपनी सातों भाभियों से आशीर्वाद मांगा था। इससे पहले उसका व्रत छोटे भाई की वजह से टूट गया था। इसी वजह से जब छठी भाभी ने ननद को आशीर्वाद दिया तो करवा माता के आशीर्वाद से ननद का पति पूर्णजीवित हो गया। पति के जीवित होने पर सास ने बहू से पूछा, 'बहू बता तूने क्या किया?' तब बहू ने करवा चौथ व्रत की महीमा अपनी सास को बता दीं।
जब महिला के ससुर ने सारे शहर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि सभी महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखें। पहले करवे को अपने मायके में जाकर रखें। इसी वजह से सभी महिलाओं को अपने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।