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शादी में 27 गुणों का मिलना क्यों जरूरी, नक्षत्रों से जुड़ा है रहस्य

हिंदू ज्योतिष में शादी से पहले 36 गुणों का मिलान किया जाता है, जिसमें 27 या उससे अधिक गुणों का मिलना बेहद शुभ माना जाता है। गुणों के साथ-साथ नक्षत्रों का मेल भी विवाह की सफलता के लिए जरूरी होता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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हिंदू ज्योतिष में विवाह से पहले कुंडली मिलान या गुण मिलान को बहुत अहम माना जाता है। शादी के लिए कुल 36 गुणों का मिलान किया जाता है लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि इनमें से कितने गुण मिलना शुभ माना जाता है। सिर्फ गुण ही नहीं, बल्कि नक्षत्रों का मेल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। यदि 36 में से 27 गुण मिल जाते हैं, तो इसे बेहद शुभ संकेत माना जाता है। यही कारण है कि लोग अक्सर 27 गुणों का जिक्र करते हैं, क्योंकि 27 या उससे अधिक गुणों का मिलना उत्तम मिलान' की श्रेणी में आता है।

 

नक्षत्रों और गुणों के बीच संबंध भी बहुत खास होता है। गुण तो 36 ही होते हैं लेकिन 27 गुणों का मिलना बहुत ही शुभ माना जाता है। नक्षत्र की संख्या कुल 27 होते हैं। दोनों के बीच एक गहरा विज्ञान छिपा है। समझते हैं-

 

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नक्षत्रों का रहस्य 

वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्र होते हैं। जब किसी व्यक्ति का जन्म होता है तो चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही उसका 'जन्म नक्षत्र' कहलाता है। गुण मिलान पूरी तरह से वर और वधू के चंद्र नक्षत्रों और उनकी राशियों पर आधारित होता है। इन 27 नक्षत्रों के स्वभाव, तत्व और ऊर्जा अलग-अलग होती है। मिलान के जरिए यह देखा जाता है कि दो अलग-अलग नक्षत्रों वाले व्यक्ति एक साथ मिलकर जीवन कैसा बिताएंगे।

 

आकाश मंडल को 27 भागों में बांटा गया है, जिन्हें नक्षत्र कहते हैं (जैसे अश्विनी, भरणी, रोहिणी आदि)। जब किसी का जन्म होता है, तो चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही उस व्यक्ति का जन्म नक्षत्र कहलाता है। शादी के लिए जब 'गुण मिलान' होता है तो वह पूरी तरह से वर और वधू के इन्ही 27 नक्षत्रों पर आधारित होता है। बिना नक्षत्र के गुण मिलान संभव ही नहीं है।

36 गुण क्या होते हैं?

ज्योतिष में 'अष्टकूट मिलान' किया जाता है, जिसमें 8 अलग-अलग बिंदुओं पर जांच की जाती है। इन 8 बिंदुओं के कुल अंकों का योग 36 होता है। जैसे- वर्ण का कुल 1 अंक है जिसमें तालमेल की जांच की जाती है। वश्य का कुल अंक 2 है जिसमें एक-दूसरे पर प्रभाव/नियंत्रण इसकी जांच की जाती है। ऐसे ही तारा, योनि, मैत्री, गण, भकूट, नाड़ी की जांच होती है जिसको मिलाकर कुल अंक 36 निकलता है।

नक्षत्रों और गुणों में कनेक्शन

गुण इस आधार पर तय होता है कि वर और वधू का नक्षत्र क्या है। उदाहरण के लिए, यदि वर का नक्षत्र 'अश्विनी' है और वधू का 'भरणी', तो इन नक्षत्रों की आपस में मित्रता, गण और योनि देखी जाएगी और उसी हिसाब से 36 में से नंबर दिए जाएंगे।

 

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27 का जादुई आंकड़ा:

  • 18 से कम: मिलान अच्छा नहीं माना जाता।
  • 18 से 24: औसत मिलान जिसमें शादी की जा सकती है।
  • 25 से 32: बहुत अच्छा मिलान। यहीं 27 का आंकड़ा आता है, जिसे श्रेष्ठ माना जाता है।
  • 33 से 36: अत्यंत दुर्लभ और सर्वोत्तम मिलान।

क्या सिर्फ गुण मिलना ही काफी है?

एक भ्रम यह भी है कि अगर 27 या 30 गुण मिल गए तो शादी सफल होगी ही। लेकिन ज्योतिष के अनुसार, कई बार गुण ज्यादा मिलते हैं लेकिन नक्षत्रों के बीच 'नाड़ी दोष' या 'भकूट दोष' होता है, जो गंभीर माना जाता है। गुणों के अलावा कुंडली में मंगल दोष और ग्रहों की स्थिति देखना भी उतना ही जरूरी है।

 

27 नक्षत्र वे उपकरण हैं जिनसे गणना की जाती है और 36 गुण वह रिजल्ट हैं जो बताते हैं कि रिश्ता कैसा रहेगा। 27 गुणों का मिलना एक बेहतरीन संकेत माना जाता है क्योंकि यह 'सुपर मेजॉरिटी' (75%) अंक हैं।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।


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