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जरूरत से ज्यादा सामान जोड़ना परेशानी की वजह? जैन धर्म का अपरिग्रह सिद्धांत समझिए

कई लोग जरूरत से ज्यादा चीजें इकट्ठा करते हैं। यही आदत व्यक्ति की परेशानी का कारण बनती है। इससे बचने के लिए लोगों को अपरिग्रह सिद्धांत अपनाना चाहिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

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आज के दौर में वही व्यक्ति खुश है जो अपने जीवन से संतुष्ट है। जबकि कई लोगों की चीजों को पाने की इच्छा खत्म नहीं होती है। यही इच्छा व्यक्ति की परेशानी का कारण बन जाती है। जब व्यक्ति आर्थिक चुनौती का सामना करता है, तब व्यक्ति के मन में ज्यादा से ज्यादा धन कमाने की इच्छा जाग जाती है। धन-संपत्ति कमाने की इच्छा कभी खत्म नहीं होती है। यानी जब व्यक्ति के पास साइकिल होती है, तो व्यक्ति के मन में बाइक खरीदने की इच्छा जाग जाती है। जब व्यक्ति बाइक खरीद लेता है, तो भी यह इच्छा खत्म नहीं होती, बल्कि कार खरीदने की इच्छा जाग जाती है। इसी तरह व्यक्ति की इच्छाएं हमेशा बढ़ती रहती हैं, जो कभी खत्म नहीं होती हैं। इन्हीं इच्छाओं पर काबू पाने के लिए जैन धर्म में अपरिग्रह की सीख दी गई है। अपरिग्रह के बारे में हर व्यक्ति को जानना चाहिए, जो अपनी इच्छाओं पर काबू पाना चाहता है।

 

जैन धर्म का मूल मंत्र अहिंसा के मार्ग पर चलना है। उसके साथ ही जैन धर्म हमें संसार के हर जीव के प्रति दया का भाव सिखाता है। इसके अलावा जैन धर्म में अपरिग्रह का सिद्धांत दिया गया है। जैन धर्म की इन सभी बातों को अपनाकर व्यक्ति जीवन के सभी दुखों से मुक्ति पा सकता है। खास तौर पर अपरिग्रह का सिद्धांत अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन की कई परेशानियों का निपटारा कर सकता है। अब सवाल उठता है कि अपरिग्रह का सिद्धांत क्या है? आइए जानते हैं।

 

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क्या है अपरिग्रह?

 

जैन धर्म में हर व्यक्ति अहिंसा के मार्ग पर चलता है, उसी तरह अपरिग्रह का मार्ग भी है। जैन धर्म में अपरिग्रह शब्द का अर्थ है कि जरूरत से ज्यादा किसी चीज को इकट्ठा न करना। इस मार्ग को अपनाने वाले व्यक्ति उन सभी चीजों को दूसरों को देते हैं, जिनकी उन्हें जरूरत नहीं है। अपरिग्रह सिद्धांत को जैन धर्म के लोग व्रत की तरह रखते हैं।

 

जैन धर्म के प्राचीन धर्म ग्रंथों में भी अपरिग्रह व्रत के बारे में बताया गया है। इसमें साफ तौर पर बताया गया है कि व्यक्ति को भूमि, चांदी, सोना, अनाज, व्यापार, धन-संपत्ति का त्याग कर मोक्ष के मार्ग पर चलना चाहिए।

 

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अपरिग्रह से कैसे मिलेगी शांति?

जैन धर्म में माना जाता है कि वस्तुओं को इकट्ठा रखने से व्यक्ति के जीवन में परेशानियां आ सकती हैं क्योंकि भौतिक चीजें व्यक्ति को मोह का शिकार बना लेती हैं। इसके प्रभाव से व्यक्ति इच्छाओं और चीजों की कामना में डूब जाता है, जिसके प्रभाव से व्यक्ति हमेशा परेशान रहता है। इसी वजह से व्यक्ति को अपनी इच्छाओं पर काबू पाने के लिए अपरिग्रह का सिद्धांत अपनाना चाहिए। अपरिग्रह का मार्ग अपनाने से व्यक्ति को न सिर्फ अपनी इच्छाओं के जाल से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में शांति और संतुष्टि भी मिलती है।

 

नोट: यह कथा धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

 


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