सनातन धर्म में करवा चौथ का पर्व बेहद खास माना जाता है, जिसमें सभी शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। महिलाओं के साथ ही कई पुरुष भी अपनी पत्नी के स्वस्थ जीवन के लिए व्रत रखते हैं। इस त्योहार में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही करवा माता की भी पूजा की जाती है। करवा चौथ के इस त्योहार में महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। उसके बाद ही व्रत खोलती हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, करवा चौथ पर जो महिलाएं व्रत रखती हैं, उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। इसी वजह से हर सुहागिन महिला को कोशिश करनी चाहिए कि वह करवा चौथ पर व्रत रखे। अब सवाल उठता है कि करवा चौथ की सही तारीख क्या है? आइए जानते हैं।
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करवा चौथ किस तारीख को है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का पर्व कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। उस हिसाब से इस साल 29 अक्टूबर को करवा चौथ मनाया जाएगा। 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट पर चतुर्थी तिथि शुरू हो रही है। इसी वजह से 29 अक्टूबर को ही सभी महिलाओं और पुरुषों को व्रत रखना चाहिए।
29 अक्टूबर को चार मुहूर्त ऐसे हैं, जो बेहद शुभ हैं। पहला मुहूर्त सुबह 4:58 बजे से सुबह 5:46 बजे तक होगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 8:17 बजे से सुबह 9:44 बजे तक होगा। तीसरा मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इसके बाद शाम 5:42 बजे से शाम 6:30 बजे तक का समय पूजा के लिए बेहद शुभ है।
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पर्व में करें सोलह शृंगार
यह पर्व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पर्व में भगवान शिव और माता पार्वती की मुख्य रूप से आराधना की जाती है। इनके साथ ही भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है। देवी-देवताओं के आशीर्वाद से सुहागिन महिलाओं के पति की उम्र लंबी होती है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, जो महिलाएं करवा चौथ के पर्व पर व्रत रखती हैं, उन्हें खास तौर पर व्रत कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। व्रत कथा सुनने से पहले महिलाओं को सोलह श्रृंगार करना चाहिए। वरना व्रत अधूरा माना जाएगा। महिलाओं को इस दिन हाथों में चूड़ियां पहननी चाहिए। मंगलसूत्र, सिंदूर और बिंदी लगानी चाहिए।
नोट:यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।