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तिरुमनंचेरी मंदिर: जिनकी शादी में होती है देरी, यहां क्यों आते हैं?

तमिलनाडु के मयिलादुथुराई जिले में स्थित तिरुमनंचेरी मंदिर अपनी मान्यताओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने के बाद विवाह के योग जल्दी बन जाते हैं।

Thirumanancherry Temple

तिरुमनंचेरी मंदिर: Photo Credit: Social media

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शादी में देरी, बार-बार रिश्ते टूटना या कुंडली के दोष, इन समस्याओं से जूझ रहे हजारों लोग तमिलनाडु के मयिलादुथुराई जिले में स्थित तिरुमनंचेरी मंदिर की ओर रुख करते हैं। भगवान शिव और देवी पार्वती के विवाह से जुड़ा यह प्राचीन मंदिर दक्षिण भारत में विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने वाले सबसे आस्थावान स्थलों में गिना जाता है। मान्यता है कि जिस स्थान पर माता पार्वती की तपस्या सफल हुई और भगवान शिव से उनका विवाह संपन्न हुआ, वही आज भक्तों के वैवाहिक जीवन की अड़चनों को दूर करता है।

 

तिरुमनंचेरी मंदिर में हर दिन देश-भर से अविवाहित युवक-युवतियां और उनके परिवार पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। यहां भगवान उध्वागनाथर और देवी कोकिलांबा के दर्शन कर लोग जल्दी विवाह और सुखद दांपत्य जीवन की कामना करते हैं। स्थानीय पुजारियों और श्रद्धालुओं के अनुसार, सच्चे मन से की गई प्रार्थना के बाद कई भक्तों को विवाह का शुभ समाचार जल्द मिलता है, जिससे यह मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र बन गया है।

 

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तिरुमनंचेरी मंदिर की विशेषता क्या है?

यह मंदिर उन लोगों के लिए विशेष माना जाता है, जिनकी शादी में देरी हो रही हो, जिनका विवाह तय होकर टूट गया हो और जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष या अन्य विवाह बाधाएं हों। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने से जल्दी विवाह होता है। यह मंदिर शैव परंपरा का महत्वपूर्ण स्थल है।

मंदिर से जुड़ी प्रमुख मान्यता

लोक मान्यता के अनुसार,  माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए यहीं कठोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी स्थान पर पार्वती से विवाह किया। इसी वजह से इस स्थान को 'तिरु-मन-चेरी' कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है विवाह संपन्न होने का पवित्र स्थान। आज भी लोग मानते हैं कि जैसे देवी पार्वती का विवाह यहां संपन्न हुआ, वैसे ही भक्तों के विवाह के योग भी यहां बनते हैं।

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं। उन्होंने इस स्थान पर घोर तप किया उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए। मान्यता के अनुसार, यहीं भगवान शिव और देवी पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। इसी वजह से यहां भगवान शिव को उध्वागनाथर और देवी पार्वती को कोकिलांबा कहा जाता है।

 

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विवाह के लिए क्या पूजा की जाती है?

अविवाहित युवक-युवतियां यहां भगवान शिव–पार्वती की पूजा करते हैं। यहां विशेष विवाह प्रार्थना अर्चना कराते हैं। नवविवाहित जोड़े भी दांपत्य जीवन में सुख-शांति के लिए इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। कहा जाता है कि पूजा के बाद कई लोगों के विवाह प्रस्ताव जल्दी आ जाते हैं।

तिरुमनंचेरी मंदिर कहां स्थित है?

जिला: मयिलादुथुराई, तमिलनाडु

यह मंदिर कुथालम कस्बे के पास स्थित है

मयिलादुथुराई से दूरी: लगभग 15–20 किलोमीटर

मंदिर तक कैसे पहुंचें

ट्रेन से

 

नजदीकी रेलवे स्टेशन: मयिलादुथुराई जंक्शन

स्टेशन से टैक्सी/ऑटो लेकर मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है

 

बस से

 

मयिलादुथुराई और कुंभकोणम से कुथालम के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है।

सड़क के रास्ते कैसे पहुंचें

चेन्नई, तिरुचिरापल्ली, कुंभकोणम जैसे शहरों से सड़क मार्ग से सीधी कनेक्टिविटी है।


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