सनातन धर्म में माना जाता है कि शिव भगवान हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। शिव भगवान ने संसार को सही राह दिखाने के लिए कई अवतार लिए थे, साथ ही पापी राक्षसों का वध करने के लिए भी अवतार धारण किए थे। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, शिव भगवान ने 19 बार अवतार लिया था। इन अवतारों के जरिए उन्होंने अधर्म को खत्म कर धर्म की स्थापना की थी। शिव जी ने कई अवतार सिर्फ राक्षसों को खत्म करने के लिए नहीं लिए थे, बल्कि अपने कई अवतारों के जरिए भक्तों को महत्वपूर्ण शिक्षाएं भी दी हैं।
शिव भगवान के कुछ ऐसे अवतार हैं, जिनके जरिए हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। शिव भगवान ने जहां एक तरफ भैरव अवतार में अपना कठोर रूप दिखाया था, वहीं दूसरी तरफ भिक्षुवर्य अवतार में शांत और ईमानदार स्वभाव का परिचय दिया। इन्हीं अवतारों में से 5 खास अवतार भैरव, पिपलाद, नंदी, गृहपति और भिक्षुवर्य हैं। आइए जानते हैं इन अवतारों से जुड़ी पौराणिक कथाएं।
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शिव भगवान का भैरव अवतार
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी अपने अहम में डूब गए थे। इस अहंकार में वह अपनी सारी हदें भूल गए थे। उन्हें समझाना बेहद जरूरी हो गया था। इस वजह से शिव भगवान ने भैरव रूप धारण किया। भैरव भगवान ने ब्रह्मा जी का एक सिर काट लिया था, जिससे उनका अहंकार खत्म हो गया। इस अवतार के जरिए शिव भगवान ने भक्तों को सीख दी कि लोगों को अहंकार को खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
पिपलाद अवतार
शिव भगवान के 19 अवतारों में से पहला अवतार पिपलाद माना जाता है। कई भक्त शनि देव की दृष्टि से बेहद डरते हैं। ऐसे लोग यदि पिपलाद भगवान की पूजा करते हैं तो शनि देव के प्रकोप से बच सकते हैं।
कथा के अनुसार, पिपलाद ऋषि दधीचि के पुत्र के रूप में जन्मे थे। पिपलाद के पिता की जल्द मृत्यु हो गई थी। साथ ही उनकी मां भी उन्हें छोड़कर चली गई थीं, जिस वजह से पिपलाद बचपन में ही अकेले पड़ गए थे। हालांकि, वह शिव भगवान की आराधना करते थे। अकेलेपन की वजह से एक बार पिपलाद ने शनि देव को श्राप दे दिया। जिसे शनि देव सहन नहीं कर पाए और वहां से चले गए। बाद में जब पिपलाद जी का क्रोध शांत हुआ तो उन्होंने शनि देव से माफी मांग ली। गुस्सा ठंडा होने पर पिपलाद को समझ आया कि उन्होंने गलत श्राप दिया था। इस अवतार के जरिए शिवजी ने संदेश दिया कि गुस्से में आकर किसी को श्राप नहीं देना चाहिए, बल्कि क्षमा करना चाहिए।
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नंदी अवतार
नंदी जी सिर्फ शिव भगवान के वाहन नहीं हैं, बल्कि वह स्वयं शिव भगवान का एक अवतार माने जाते हैं। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, नंदी हमेशा कैलाश पर्वत पर शिव जी के पास रहते हैं। जब किसी देवता को भी शिवजी से मिलना होता है, तो वह पहले नंदी जी से ही अनुमति लेते हैं। नंदी जी को ऋषियों के समान धर्म का ज्ञान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति नंदी जी के कान में अपनी इच्छा कहकर उसे शिव भगवान तक पहुंचा सकता है।
गृहपति अवतार
धार्मिक कथाओं के मुताबिक, गृहपति ऐसे घर में जन्मे थे, जहां उनकी सिर्फ मां थीं और उनके पिता का निधन हो चुका था। गृहपति बाल अवस्था से ही हमेशा शिव भगवान की आराधना करते थे। उन्हें देखकर आसपास के लोग कहते थे कि वह सिर्फ समय बर्बाद कर रहे हैं।
एक दिन एक बाबा ने गृहपति की मां को बताया कि गृहपति की आयु अधिक नहीं है। यह सुनकर उनकी मां रोने लगीं। तब गृहपति ने अपनी मां से कहा, 'मां, तुम चिंता मत करो, शिव भगवान मुझे लंबी उम्र देंगे।' इसके बाद गृहपति ने शिव नाम का जप किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव भगवान ने उन्हें लंबी आयु का वरदान दिया।
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भिक्षुवर्य अवतार
इस अवतार में शिव भगवान भिक्षु बने थे, जिनके शरीर पर हमेशा राख लगी रहती थी। भिक्षुवर्य के जीवन में धन का अभाव था, इसके बावजूद वह हमेशा खुश और मुस्कुराते रहते थे। इस अवतार के जरिए शिव भगवान ने हमें यह शिक्षा दी कि धन के अभाव में दुखी नहीं होना चाहिए।