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शेषनाग से कालिया तक, पढ़िए हिंदू धर्म के नाग देवताओं की कथाएं

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के अलावा नागों (सांपों) की भी पूजा की जाती है। कुछ विशेष नाग देवताओं का वर्णन महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में किया गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर| Photo Credit: AI

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हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के अलावा नागों (सांप) की भी पूजा की जाती है। इनके पूजा की विशेष प्रक्रिया होती है। नाग केवल डर और रहस्य के प्रतीक नहीं होते हैं, बल्कि हिंदू धर्म में इन्हें शक्ति, संरक्षण और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। नाग देवताओं की चर्चा पुराणों में भी की गई है। महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में नाग देवताओं का गहराई से वर्णन किया गया है। पुराणों में शेषनाग, वासुकी नाग, तक्षक नाग, कार्कोट नाग और कालिया नाग का विशेष स्थान है। 

 

नागों की पूजा विशेष रूप से नाग पंचमी के दिन की जाती है और मंदिरों में भी इनके लिए विशेष स्थान होता है। आइए जानते हैं, कुछ प्रमुख नाग देवताओं का महत्व और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं।

 

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शेषनाग की कथा (अनंत)

शेषनाग को नागों का राजा कहा जाता है। इन्हें 'अनंत' भी कहा जाता है क्योंकि इनका अंत नहीं है। पुराणों की मान्यता के अनुसार, इनके हजारों फन होते हैं। शेषनाग भगवान विष्णु की शैया (सोने का स्थान) बनते हैं। जब-जब विष्णु जी सृष्टि के बीच समुद्र में आराम करते हैं, तब वे शेषनाग के ऊपर ही लेटे होते हैं। यह संकेत है कि शेषनाग स्वयं पूरी सृष्टि को संतुलित रखने का काम करते हैं। एक अन्य कथा के अनुसार, जब सृष्टि का भार बढ़ गया, तब शेषनाग ने पृथ्वी को अपने फनों पर धारण किया, जिससे संतुलन बना रहे।

वासुकी नाग की कथा

वासुकी नाग को नागों का दूसरा राजा माना जाता है। पुराणों की मानें तो वासुकी नाग भगवान के शिव भक्त हैं और भगवान शिव के गले में लिपटे रहते हैं। समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों को मंथन की रस्‍सी चाहिए थी, तब वासुकी नाग ने स्वयं को रस्सी बनने की अनुमति दी थी। देवता और असुर उन्हें पकड़कर मंदराचल पर्वत से समुद्र मंथन कर रहे थे। कथाओं के मुताबिक, वासुकी ने समुद्र मंथन के दौरान विष भी निकाला था, जिसे भगवान शिव ने अपने गले में धारण कर लिया था। तभी से वासुकी भगवान शिव के गले का श्रृंगार माना जाने लगा।

तक्षक नाग की कथा

तक्षक एक शक्तिशाली नाग हैं जो कश्यप ऋषि के वंशज माने जाते हैं। ये महाभारत से जुड़ी कथाओं में आते हैं। महाभारत के अनुसार, राजा परीक्षित ने एक ऋषि का अपमान कर दिया था। ऋषि के पुत्र ने क्रोध में आकर श्राप दिया कि परीक्षित को तक्षक नाग काटेगा। तक्षक ने छिपकर राजा को काटा और राजा की मृत्यु हो गई। इसके बाद परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने तक्षक और सभी नागों के नाश के लिए सर्पसत्र यज्ञ किया, जिसमें सभी नागों को बुलाया गया। अंत में आस्तिक मुनि के कहने पर यज्ञ को रोक दिया गया।

 

 

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कर्कोटक नाग

कर्कोटक एक रहस्यमयी और चमत्कारी नाग हैं। इनका वर्णन भी महाभारत में मिलता है। एक समय राजा नल को अपनी किस्मत बदलने के लिए कर्कोटक नाग से मिलना पड़ा था। कर्कोटक ने नल को काटा, जिससे उनका रूप बदल गया और वह पहचान में नहीं आ रहे थे।

 

इसका उद्देश्य था कि नल भविष्य में दोबारा अपना राज्य प्राप्त करें। बाद में, जब सही समय आया, तो राजा ने अपना असली रूप पाया और कर्कोटक के आशीर्वाद से सब कुछ फिर से दोबारा हासिल कर लिया।

पद्मनाभ, कुलिक, ऐरावत आदि अन्य नाग

पद्मनाभ – शांत और ज्ञानी नाग माने जाते हैं।

कुलिक – यह विशेष रूप से सांपों की रक्षा करने वाले माने जाते हैं।

धृतराष्ट्र, वामन, शंख, धूम्र, अनिल, आदि भी पौराणिक नाग हैं जिनकी पूजा की जाती है।

कालिया नाग की कथा

पुराणों के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण छोटे थे, तब यमुना नदी में एक भयानक और विषैला कालिया नाग रहता था। वह जल को जहरीला कर रहा था और लोगों को डराता था। कृष्ण जी नदी में कूद पड़े और नाग के फनों पर नृत्य किया। आखिरकार, कालिया ने हार मान ली और भगवान कृष्ण की स्तुति की। तब भगवान ने उसे माफ किया और यमुना छोड़कर समुद्र में चले जाने को कहा।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।


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