पूर्वोत्तर भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले गुवाहाटी में स्थित नवग्रह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र माना जाता है। चित्रशाल पहाड़ी पर विराजमान यह प्राचीन मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की प्राचीन ज्योतिष और खगोलीय परंपरा का भी साक्षी माना जाता है। कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में नवग्रह मंदिर का रुख करते हैं, जिससे यहां लगातार भीड़-भाड़ बनी रहती है।
नवग्रह मंदिर को 'पूर्व का खगोलीय केंद्र' कहा जाता है, क्योंकि यहां देवी-देवताओं की मूर्तियों के बजाय सूर्य, चंद्रमा समेत नौ ग्रहों की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा-अर्चना और ग्रह शांति कराने से कुंडली के दोष शांत होते हैं और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव से मुक्ति पाने की कामना लेकर पहुंच रहे हैं।
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नवग्रह मंदिर की विशेषता
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी देवता की मूर्ति नहीं, बल्कि नौ ग्रहों (नवग्रह) की पूजा की जाती है। सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु इन सभी ग्रहों को यहां अलग-अलग रूपों में स्थापित किया गया है। हर ग्रह को एक विशेष रंग के पत्थर से दर्शाया गया है और उनके ऊपर ग्रहों के अनुसार रंगीन कपड़ा चढ़ाया जाता है। यही वजह है कि यह मंदिर ज्योतिष और ग्रह शांति से जुड़ी आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है।
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मंदिर का इतिहास
नवग्रह मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में अहोम वंश के राजा राजेश्वर सिंह ने करवाया था। माना जाता है कि यह स्थान पहले खगोल अध्ययन और ज्योतिष गणनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता था। असम प्राचीन काल से ही ज्योतिष और तंत्र विद्या का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और यह मंदिर उसी परंपरा का प्रतीक है।
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं
ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने और ग्रह शांति कराने से कुंडली के दोष, जैसे कालसर्प दोष, शनि दोष, राहु-केतु दोष और ग्रहों की अशुभ दशा शांत हो जाती है। खासतौर पर शनि, राहु और केतु से पीड़ित लोग यहां विशेष पूजा कराने आते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नवग्रह मंदिर में की गई पूजा से जीवन में बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है।
पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान नवग्रहों का निवास माना जाता है। कहा जाता है कि प्राचीन ऋषि-मुनि यहां बैठकर ग्रहों की गति और उनके प्रभाव का अध्ययन करते थे। कुछ कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव की कृपा से इस स्थान को ग्रहों की शक्तियों का केंद्र माना गया। इसी वजह से इसे अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है।
मंदिर तक पहुंचने का रास्ता
नवग्रह मंदिर गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से लगभग 5–6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां तक टैक्सी, ऑटो या प्राइवेट से आसानी से पहुंचा जा सकता है। चित्रशाल पहाड़ी पर चढ़ने के लिए पक्की सड़क बनी हुई है। पहाड़ी पर पहुंचने के बाद गुवाहाटी शहर का खूबसूरत नजारा भी देखने को मिलता है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को आकर्षित करता है।