नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा की मां कूष्मांडा के रूप में पूजा होती है। धार्मिक मान्यता है कि जब सृष्टि की रचना नहीं हुई थी और चारों तरफ अंधकार था। तब देवी ने अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि की रचना की थी। इसलिए उन्हें आदिशक्ति और आदिस्वरूपा भी कहा जाता है। मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में सुख -समृद्धि आती है।
मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा होता है। इसके अलावा उनके हाथों में जाप माला होती है। उनका वाहन सिंह है। आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना कैसे करें। उन्हें प्रसन्न करने के लिए किन चीजों का भोग लगाना चाहिए?
यह भी पढ़ें: देवी चंद्रघंटा की पूजा कैसे होती है, मंदिर कहां हैं, मंत्र कौन से हैं?
मां कूष्मांडा की पूजा कैसे करें?
मां कूष्मांडा की पूजा करने के लिए सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मां कूष्मांडा के नाम का दीपक जलाएं। माता के चरणों में फूल, धूप, दीप और मिठाई अर्पित करें। मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाया जाता है। इसके बाद पाठ और आरती करनी चाहिए। मां कूष्मांडा का प्रिय रंग लाल है। इसलिए उन्हें लाल कमल, लाल गुलाब और लाल गुड़हल के फूल अर्पित करें। जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना करते हैं। उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
मां कूष्मांडा का मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
मां कूष्मांडा का बीज मंत्र:
ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः
मां कूष्मांडा का स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
यह भी पढ़ें: 13 अक्टूबर का राशिफल: मां चंद्रघंटा के प्रभाव से आपके लिए खुलेंगे तरक्की के राह?
कूष्मांडा देवी के प्रसिद्ध मंदिर
कानपुर- देशभर में कूष्मांडा देवी के कई मंदिर हैं। कानपुर के घाटमपुर में मां कूष्मांडा का प्रसिद्ध मंदिर है। इसे मंदिर की कुड़हा देवी के नाम से भी जाना जाता है। यहां मां कूष्मांडा एक पिंडी के रूप में है। इस पिंडी से हमेशा पानी रिसता रहता है। मान्यता है कि इस मंदिर में अर्पित किया जाने वाला पानी दुखों का निवारण करता है।
दुर्गाकुंड मंदिर- वाराणसी का प्रसिद्ध मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। यहां मां दुर्गा की कूष्मांडा स्वरूप में पूजा अर्चना होती है। मंदिर के पास दुर्गाकुंड स्थिति है।
धौलरा मंदिर- बिलासपुर के धौलरा मंदिर में मां दुर्गा की कूष्मांडा रूप में पूजा होती है। नवरात्रि के समय में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।