इस साल 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक हिंदू धर्म में पितृ पक्ष था, जब लाखों लोगों ने अपने पितरों को याद किया, उनके लिए तर्पण किया और वस्तुओं का दान किया। कई लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि हिंदू धर्म की तरह ईसाई धर्म में भी पूर्वजों को याद करने की परंपरा निभाई जाती है। ईसाई धर्म के लोग ऑल सोल्स डे पर न सिर्फ अपने पूर्वजों के लिए प्रार्थना करते हैं, बल्कि कब्रिस्तान में जाकर उनकी कब्रों पर फूल भी चढ़ाते हैं।
हर साल की तरह इस साल 2 नवंबर को सोल्स डे मनाया जाएगा। इससे पहले 1 नवंबर को ऑल सेंट्स डे मनाया जाता है। इस दिन लोग न सिर्फ प्रसिद्ध संतों को याद करते हैं, बल्कि अपने जान-पहचान के दिवंगत संतों और गुरुओं को भी याद करते हैं। अब सवाल उठता है कि ईसाई धर्म के लोग सोल्स डे किस प्रकार मनाते हैं।
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कैसे मनाया जाता है सोल्स डे?
ऑल सोल्स डे पर कैथोलिक परंपरा के हिसाब से पूर्वजों को याद किया जाता है। इस दिन लोग अपने परिवार के साथ कब्रिस्तान जाते हैं। इसके बाद जरूरतमंद लोगों को दान-पुण्य करके अपने पूर्वजों को याद करते हैं। कैथोलिक जानकारों के मुताबिक, ऑल सोल्स डे खुशी या दुख मनाने का त्योहार नहीं है। इसके बजाय लोग इस दिन अपने पूर्वजों की आत्मा के लिए प्रार्थना करते हैं।
इसी वजह से कई लोग चर्च में जाकर अपने पूर्वजों के लिए प्रार्थना करते हैं, ताकि ईसा मसीह उनके पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए आशीर्वाद दें। इसके अलावा ईसाई धर्म के लोग अपने घर में पूर्वजों की तस्वीर एक साफ मेज पर रखते हैं, जहां तस्वीर के सामने जलती हुई मोमबत्ती रखी जाती है।
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पूर्वजों को याद करने की परंपरा
ईसाई धर्म में मृत लोगों के लिए प्रार्थना करने की परंपरा सिर्फ ऑल सोल्स डे पर ही नहीं निभाई जाती है। इससे पहले ऑल सेंट्स डे और हैलोवीन डे पर भी मृत लोगों को याद किया जाता है। हालांकि, आजकल कई लोग हैलोवीन डे पर भूतिया गेटअप पहनकर उत्सव मनाते हैं। ऑल सेंट्स डे पर लोग प्रसिद्ध संतों और अपने गुरुओं को ईसा मसीह के समक्ष याद करते हुए उनके लिए प्रार्थना करते हैं।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।