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17 या 18 जून कब है प्रद्युम्न चतुर्थी? सही तारीख से लेकर पूजा की विधि जानिए

इस साल जून महीने में प्रद्युम्न चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व की सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त यहां जानिए।

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Photo Credit- Gemini

सनातन धर्म में प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व का एक खास महत्व है। इस पर्व में हर भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करता है। साथ ही इस पर्व में कई लोग व्रत भी रखते हैं, जिससे भक्तों पर भगवान गणेश की कृपा बरसती है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन जो भक्त व्रत रखते हैं, उन्हें न केवल जीवन में सुख-शांति मिलती है, बल्कि जीवन के कई विघ्न यानी कष्ट भी दूर हो जाते हैं। इस साल का प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस वजह से सभी भक्तों को व्रत रखना चाहिए।

 

इस साल प्रद्युम्न चतुर्थी पर्व 17 जून की रात से शुरू होगा। 18 जून की शाम को यह पर्व समाप्त होगा। ऐसे में कई भक्तों के मन में दुविधा है कि प्रद्युम्न चतुर्थी की सही तारीख क्या है। साथ ही सवाल उठता है कि इस साल प्रद्युम्न चतुर्थी का व्रत किस दिन रखा जाए। आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं।

 

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क्या है प्रद्युम्न चतुर्थी की सही तारीख?

हिंदू पंचांग के मुताबिक, 17 जून की रात 9 बजकर 38 मिनट पर चतुर्थी तिथि शुरू होगी। इसके बाद यह तिथि 18 जून को शाम 6 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि के हिसाब से व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इसी आधार पर 18 जून को प्रद्युम्न चतुर्थी की उदया तिथि पड़ रही है, इसलिए 18 जून को ही व्रत रखना चाहिए।

प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन शुभ मुहूर्त

प्रद्युम्न चतुर्थी पर शुभ ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:03 बजे से शुरू होगा, जो 4:43 बजे तक रहेगा। सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त 10:58 बजे से लेकर 1:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा इस दिन का विजय मुहूर्त दोपहर 11:54 बजे से लेकर 12:50 बजे तक रहेगा।

 

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किस तरह करें पूजा?

 

प्रद्युम्न चतुर्थी के दिन भक्तों को सुबह स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहन लें। फिर अपने घर के मंदिर में पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश को फूलों की माला पहनाएं और फूल अर्पित करें। फिर चंदन का तिलक लगाएं। सबसे खास बात यह है कि प्रद्युम्न चतुर्थी की पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा घास जरूर चढ़ाएं।

 

प्रद्युम्न चतुर्थी की पूजा में मोदक या लड्डू का भोग अवश्य लगाएं क्योंकि यह भगवान गणेश की प्रिय मिठाई मानी जाती है। पूजा के बाद गणेश चालीसा का पाठ करें। इसके बाद पूर्ण श्रद्धा भाव से 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें।

 

नोट: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

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