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'पुजारी महिला के सिर पर नहीं रखेगा हाथ', हरिद्वार के मंदिर ने क्यों लिया फैसला?

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर के एक महंत ने फैसला लिया है कि अब से कोई भी पुजारी महिलाओं के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद नहीं देगा। यहां जानिए इस फैसले के पीछे की मंशा क्या है।

Ravindra Puri

महंत रविंद्र पुरी, Photo Credit- Gemini

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उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर कमेटी ने एक फैसला लिया है। इस फैसले के मुताबिक मंदिर में कोई भी पुजारी आशीर्वाद देने के लिए किसी भक्त के सिर पर हाथ नहीं रखेगें। यह नियम महिलाओं की सुरक्षा और मंदिर की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इस नियम को लेकर मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख महंत रविंद्र पुरी ने अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में यहां कुंभ मेला लगेगा, जहां लाखों लोग आएंगे। ऐसे में पुजारियों के खिलाफ कोई शिकायत न आए, इसलिए यह फैसला लिया गया है।


महंत रविंद्र पुरी ने हाल ही में एएनआई को इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने बताया कि पुजारी अपने हाथों से भक्तों के माथे पर तिलक लगा सकते हैं, हालांकि वे किसी भी भक्त के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद नहीं दे सकते। नियम के मुताबिक जो पुजारी इस नियम का पालन नहीं करेगा, उसे मंदिर की सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।

 

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महंत रविंद्र पुरी ने क्या कहा?


इस नियम को लेकर महंत रविंद्र पुरी ने कहा, 'हमने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने की परंपरा पर रोक लगाई है। अब से कोई भी पुजारी महिला या पुरुष के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद नहीं दे सकता। पुजारी भक्तों से प्रसाद ले सकते हैं और उन्हें आशीर्वचन दे सकते हैं। आशीर्वाद देने वाला कोई पुजारी नहीं है, बल्कि मां भवानी हैं, जो भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।'


आगे उन्होंने कहा, 'मैं समझता हूं कि पुजारी द्वारा सिर छूकर आशीर्वाद देना सही नहीं है। आने वाले दिनों में कुंभ का मेला लगेगा, जहां करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आने वाले हैं। कई पुजारी अलग-अलग सोच और विचारों के होते हैं, जिनके मन में क्या चल रहा है, यह किसी को पता नहीं होता। इसलिए हम कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में कोई शिकायत न आए। भक्तों के साथ कोई अप्रिय घटना न हो, इसलिए हमने इस नियम की शुरुआत की है।'भक्तों को मां भवानी देंगी आशीर्वाद


महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि जो भक्त इस मंदिर में दर्शन करने आएंगे, उन्हें पुजारी क्या आशीर्वाद देंगे? वे तो माता भवानी का आशीर्वाद लेने आते हैं। जिस प्रकार श्रद्धालु भगवान के भक्त हैं, उसी प्रकार पुजारी भी भगवान के भक्त हैं। ऐसे में एक भक्त दूसरे भक्त को क्या आशीर्वाद दे सकता है? इसलिए पुजारियों द्वारा सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने की परंपरा को समाप्त करने का नियम लाया गया है।


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