logo

ट्रेंडिंग:

उत्तर भारत से कितनी अलग होती है बंगाल की सरस्वती पूजा? परंपराओं का अंतर समझिए

जहां उत्तर भारत में सरस्वती पूजा मुख्य रूप से स्कूलों और घरों में सादगीपूर्ण पूजा तक सीमित है, वहीं बंगाल में यह एक विशाल सार्वजनिक उत्सव और सांस्कृतिक पर्व है। इसे बंगाली वैलेंटाइन डे के रूप में भी मनाया जाता है।

Representative Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Budget2

बंगाल में सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक सामाजिक और भावनात्मक उत्सव हैबसंत पंचमी के दिन पूरा बंगाल पीले रंग की आभा में डूब जाता है और हर गली में पंडालों की रौनक दिखाई देती हैउत्तर भारत में जहां इस दिन पीले पकवान बनाने और मंदिरों में दर्शन करने की परंपरा है, वहीं बंगाल में यह दिन युवाओं, कला और विद्या के प्रति एक अलग ही जुनून के साथ मनाया जाता है

 

उत्तर भारत में सरस्वती पूजा अक्सर बसंत ऋतु के स्वागत का प्रतीक होती है लेकिन बंगाल में इसे 'हाते खोड़ी' और 'वैलेंटाइन डे' के मेल के रूप में देखा जाता हैबंगाल में मां सरस्वती की प्रतिमाएं हर घर और पंडाल में स्थापित की जाती हैं, जबकि उत्तर भारत में मुख्य रूप से तस्वीरों की पूजा का चलन अधिक है

 

यह भी पढ़ें: गुफाओं में बसा त्रिमूर्ति बालाजी मंदिर, जहां वास करते हैं 33 करोड़ देवी-देवता

बंगाल बनाम उत्तर भारत

  • बंगाल में दुर्गा पूजा की तरह ही यहां बड़े-बड़े पंडाल बनाए जाते हैंमिट्टी की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और पूरी रात उत्सव जैसा माहौल रहता हैवहीं उत्तर भारत में पूजा व्यक्तिगत या संस्थागत अधिक होती हैस्कूलों में प्रार्थना सभाएं होती हैं और घरों में पीले चावल बनाए जाते हैं
  • बंगाल में छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत इसी दिन 'हाते खोड़ी' अनुष्ठान से होती है जिसमें बच्चा पहली बार स्लेट पर चाक से अक्षर लिखता हैजबकि उत्तर भारत में यहां बच्चों को मंदिर ले जाकर आशीर्वाद दिलाया जाता है लेकिन लिखने की कोई विशेष रस्म उतनी प्रचलित नहीं है
  • बंगाल में यह दिन युवाओं के लिए विशेष हैलड़के पीले कुर्ते और लड़कियां पीली साड़ियों में सजकर बाहर निकलती हैंइसे बंगाल का वैलेंटाइन डे भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन युवाओं को घुलने-मिलने की सामाजिक छूट मिलती हैवहीं उत्तर भारत में यह दिन पूरी तरह से आध्यात्मिक और अकादमिक माना जाता है, जिसमें सादगी पर जोर रहता है
  • बंगाल में एक अनोखी परंपरा के तहत, छात्र अपनी किताबें और पेन मां सरस्वती के चरणों में रख देते हैं और उस दिन पढ़ाई नहीं करतेजबकि उत्तर भारत में किताबों की पूजा की जाती है लेकिन पढ़ाई छोड़ने का कोई सख्त नियम नहीं है
  • बंगाल में 'खिचड़ी' और 'लाबड़ा' ( मिक्स सब्जी) का भोग अनिवार्य हैसाथ ही 'कुल' यानी बेर के फल को पूजा से पहले खाना वर्जित माना जाता हैवहीं उत्तर भारत में केसरिया भात, पीले लड्डू और मालपुआ बनाने की परंपरा अधिक है

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

Related Topic:#Religious Story

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap