बंगाल में सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक सामाजिक और भावनात्मक उत्सव है। बसंत पंचमी के दिन पूरा बंगाल पीले रंग की आभा में डूब जाता है और हर गली में पंडालों की रौनक दिखाई देती है। उत्तर भारत में जहां इस दिन पीले पकवान बनाने और मंदिरों में दर्शन करने की परंपरा है, वहीं बंगाल में यह दिन युवाओं, कला और विद्या के प्रति एक अलग ही जुनून के साथ मनाया जाता है।
उत्तर भारत में सरस्वती पूजा अक्सर बसंत ऋतु के स्वागत का प्रतीक होती है लेकिन बंगाल में इसे 'हाते खोड़ी' और 'वैलेंटाइन डे' के मेल के रूप में देखा जाता है। बंगाल में मां सरस्वती की प्रतिमाएं हर घर और पंडाल में स्थापित की जाती हैं, जबकि उत्तर भारत में मुख्य रूप से तस्वीरों की पूजा का चलन अधिक है।
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बंगाल बनाम उत्तर भारत
- बंगाल में दुर्गा पूजा की तरह ही यहां बड़े-बड़े पंडाल बनाए जाते हैं। मिट्टी की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और पूरी रात उत्सव जैसा माहौल रहता है। वहीं उत्तर भारत में पूजा व्यक्तिगत या संस्थागत अधिक होती है। स्कूलों में प्रार्थना सभाएं होती हैं और घरों में पीले चावल बनाए जाते हैं।
- बंगाल में छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत इसी दिन 'हाते खोड़ी' अनुष्ठान से होती है जिसमें बच्चा पहली बार स्लेट पर चाक से अक्षर लिखता है। जबकि उत्तर भारत में यहां बच्चों को मंदिर ले जाकर आशीर्वाद दिलाया जाता है लेकिन लिखने की कोई विशेष रस्म उतनी प्रचलित नहीं है।
- बंगाल में यह दिन युवाओं के लिए विशेष है। लड़के पीले कुर्ते और लड़कियां पीली साड़ियों में सजकर बाहर निकलती हैं। इसे बंगाल का वैलेंटाइन डे भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन युवाओं को घुलने-मिलने की सामाजिक छूट मिलती है। वहीं उत्तर भारत में यह दिन पूरी तरह से आध्यात्मिक और अकादमिक माना जाता है, जिसमें सादगी पर जोर रहता है।
- बंगाल में एक अनोखी परंपरा के तहत, छात्र अपनी किताबें और पेन मां सरस्वती के चरणों में रख देते हैं और उस दिन पढ़ाई नहीं करते। जबकि उत्तर भारत में किताबों की पूजा की जाती है लेकिन पढ़ाई छोड़ने का कोई सख्त नियम नहीं है।
- बंगाल में 'खिचड़ी' और 'लाबड़ा' ( मिक्स सब्जी) का भोग अनिवार्य है। साथ ही 'कुल' यानी बेर के फल को पूजा से पहले खाना वर्जित माना जाता है। वहीं उत्तर भारत में केसरिया भात, पीले लड्डू और मालपुआ बनाने की परंपरा अधिक है।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।