प्रकृति की गोद में स्थित और पहाड़ियों को काटकर बनाई गई गुफाओं के भीतर मौजूद त्रिमूर्ति बालाजी मंदिर श्रद्धा और आस्था का एक विशेष केंद्र है। यह मंदिर भक्तों को त्रेतायुग और द्वापरयुग की आध्यात्मिक अनुभूति कराता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका गुफानुमा स्वरूप है, जिससे होकर गुजरते हुए श्रद्धालु मुख्य गर्भगृह तक पहुंचते हैं। यह मंदिर चंडीगढ़ के पास हरियाणा के कालका-शिमला रोड पर स्थित श्री त्रिमूर्तिधाम पंचतीर्थ आश्रम में, शिवालिक पहाड़ियों के बीच बसा हुआ एक दिव्य स्थल है।
धार्मिक विश्वासों के अनुसार, मंदिर परिसर और इसकी रहस्यमयी गुफाओं में हिंदू धर्म के सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं का सूक्ष्म रूप में वास माना जाता है। कहा जाता है कि त्रिमूर्ति बालाजी के दर्शन से भगवान विष्णु के साथ-साथ ब्रह्मा और महेश की संयुक्त शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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मंदिर का महत्व और आकर्षण
यह मंदिर हरियाणा के पंचकूला जिले के कालका क्षेत्र में स्थित है, जो चंडीगढ़ के काफी नजदीक है। इसका नाम ‘त्रिमूर्ति’ इसलिए पड़ा क्योंकि यहां भगवान विष्णु (बालाजी स्वरूप) के साथ ब्रह्मा और शिव की ऊर्जा का भी समावेश माना जाता है। भक्तों की मान्यता है कि यहां की गई प्रार्थना सीधे त्रिदेवों तक पहुंचती है।
गुफाओं की विशेषता
मंदिर तक पहुंचने के लिए संकरी और टेढ़ी-मेढ़ी गुफाओं से होकर गुजरना पड़ता है। यह यात्रा मानव जीवन के संघर्षों और अंत में ईश्वर प्राप्ति के सुख का प्रतीक मानी जाती है। गुफाओं के भीतर टपकती जल बूंदें और प्राकृतिक ठंडक पूरे वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना देती हैं।
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श्रद्धालुओं की आस्था
देशभर से श्रद्धालु यहां अपनी समस्याओं के समाधान और मन्नतें लेकर आते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से किए गए बालाजी के दर्शन से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सभी तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय गुफा संस्कृति और देव-परंपरा को जीवंत रखने वाली एक पवित्र धरोहर भी है।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।