हिंदू विवाह में बोले जाने वाले वैदिक मंत्रों को लेकर हमेशा लोगों के मन में सवाल पैदा होते रहते हैं। बदलते समय में जब शादी को केवल सामाजिक रस्म मानने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, तब विशेषज्ञों और धर्माचार्यों का कहना है कि विवाह के दौरान उच्चारित मंत्रों का महत्व आज भी उतना ही गहरा और प्रासंगिक है। ये मंत्र केवल परंपरा निभाने के लिए नहीं बोले जाते, बल्कि वेदों से निकले ये शब्द विवाह को एक पवित्र संस्कार का स्वरूप देते हैं। ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद से जुड़े ये मंत्र पति-पत्नी को जीवन भर साथ निभाने, धर्मपूर्वक गृहस्थ जीवन जीने और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का संकल्प कराते हैं।
ऐसे समय में जब विवाह की परिभाषा पर सवाल उठ रहे हैं, वैदिक मंत्रों की यह भूमिका याद दिलाती है कि हिंदू शादी केवल दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों से जुड़ा एक गहरा बंधन है।
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विवाह के मंत्र किन वेदों से जुड़े हैं?
हिंदू विवाह में इस्तेमाल होने वाले ज्यादा से ज्यादा मंत्र वेदों, विशेष रूप से ऋग्वेद और यजुर्वेद से लिए गए हैं। कुछ भाव और प्रार्थनाएं अथर्ववेद से भी जुड़ी मानी जाती हैं।
ऋग्वेद
ऋग्वेद में विवाह से संबंधित कई सूक्त मिलते हैं, जिनमें पति-पत्नी के बीच प्रेम, सहयोग, समानता और लंबेसमय तक साथ की कामना की गई है।
प्रसिद्ध विवाह मंत्र -
'सम्राज्ञी श्वशुरे भव…' ऋग्वेद से ही लिया गया है, जिसमें कन्या को नए परिवार की सम्मानित सदस्य बनने का आशीर्वाद दिया जाता है।
यजुर्वेद
यजुर्वेद कर्मकांड और विधि-विधान का वेद है। विवाह की पूरी प्रक्रिया अग्नि स्थापना, हवन, पाणिग्रहण और सप्तपदी में बोले जाने वाले अधिकतर मंत्र यजुर्वेद से ही हैं।
इस वेद के मंत्र विवाह को एक यज्ञ के रूप में स्थापित करते हैं।
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अथर्ववेद
अथर्ववेद में गृहस्थ जीवन, संतान सुख, स्वास्थ्य और पारिवारिक समृद्धि से जुड़े मंत्र मिलते हैं। विवाह में बोले जाने वाले कई आशीर्वादात्मक मंत्रों की भावना अथर्ववेद से प्रेरित है।
विवाह मंत्रों का महत्व क्या है?
विवाह मंत्र केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि वे-
- पति-पत्नी के बीच धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के संतुलन का संकल्प कराते हैं
- दोनों को जीवन भर साथ निभाने, एक-दूसरे का सम्मान करने और कर्तव्यों को साझा करने की प्रेरणा देते हैं
- विवाह को केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और समाज का पवित्र बंधन बनाते हैं
- अग्नि को साक्षी मानकर बोले जाने की वजह से ये मंत्र सत्य और जिम्मेदारी का प्रतीक होते हैं
- सप्तपदी के सात वचनों में भोजन, शक्ति, समृद्धि, सुख-दुख में साथ, संतान, मित्रता और आध्यात्मिक उन्नति जैसे जीवन के हर पहलू का संकल्प शामिल होता है।
शादी में इन्हीं मंत्रों का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
विवाह को हिंदू धर्म में सोलह संस्कारों में से एक माना गया है। वेदों में बताए गए मंत्रों का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है क्योंकि
- वे मंत्र शाश्वत और सार्वकालिक हैं, जो हजारों वर्षों से मानव जीवन को दिशा देते आए हैं
- मान्यता के अनुसार, इन्हें ऋषि-मुनियों ने गहन तपस्या और अनुभव के बाद रचा, इसलिए इन्हें आध्यात्मिक रूप से प्रमाणित माना जाता है
- इन मंत्रों के उच्चारण से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्थिरता मानी जाती है
- ये मंत्र पति-पत्नी को याद दिलाते हैं कि विवाह केवल भावनाओं का नहीं, बल्कि कर्तव्य और अनुशासन का भी बंधन है
- इन्हीं मंत्रों की वजह से विवाह को सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक धार्मिक और आध्यात्मिक संकल्प माना जाता है।