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तुलसी मानस मंदिर: रामायण की चौपाइयों से सजे इस मंदिर का इतिहास क्या है?

वाराणसी में स्थित तुलसी मानस मंदिर अपनी नक्काशी और वास्तुकला के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। मान्यता के अनुसार, यह वही स्थान है जहां गोस्वामी तुलसीदास ने रामायण की रचना की थी।

Tulsi Manas mandir

तुलसी मानस मंदिर: Photo Credit: Social Media

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वाराणसी में स्थित प्रसिद्ध तुलसी मानस मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। माना जाता है कि इसी पावन धरती पर संत गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की थी। यही वजह है कि यह मंदिर देशभर के करोड़ों रामभक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। संगमरमर से बना यह भव्य मंदिर मानस की चौपाइयों से सुसज्जित है, जहां हर दीवार रामकथा की महिमा बयां करती है।

 

वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र में स्थित यह मंदिर न केवल वाराणसी का प्रमुख धार्मिक स्थल है, बल्कि आध्यात्मिक शांति, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व का जीवंत प्रतीक भी है। मंदिर परिसर में रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियां, श्रद्धालुओं को भगवान राम के जीवन की ओर और ज्यादा आकर्षित करती हैं।

 

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तुलसी मानस मंदिर का इतिहास

तुलसी मानस मंदिर वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र हिन्दू मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण 1970 के दशक में वाराणसी के प्रतिष्ठित उद्योगपति परिवार बिड़ला परिवार ने कराया था।

 

मंदिर का नाम महान कवि-संत गोस्वामी तुलसीदास के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इसी काशी (वाराणसी) में रामचरितमानस की रचना की थी। ऐसा माना जाता है कि जिस स्थान पर आज तुलसी मानस मंदिर स्थित है, वही स्थान वह पवित्र जगह है जहां तुलसीदास जी बैठकर अवधी भाषा में रामचरितमानस लिखते थे।

 

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मंदिर की विशेषताएं

रामचरितमानस के दोहे-चौपाइयों से सजा मंदिर

 

मंदिर की सफेद संगमरमर दीवारों पर रामचरितमानस के दोहे, चौपाइयां और श्लोक सुंदर नक्काशी के साथ लिखे हुए हैं। यह मंदिर एक तरह से 'रामचरितमानस का जीवित संग्रहालय' जैसा लगता है।

 

संगमरमर से बना भव्य मंदिर

 

पूरा मंदिर दूधिया सफेद संगमरमर से बना है, जिससे इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है।

 

रामायण आधारित जीवंत झांकियां

 

मंदिर परिसर में रामायण के प्रमुख प्रसंगों की इलेक्ट्रॉनिक और मूर्तिकला आधारित झांकियां भी हैं, जो भक्तों के लिए बड़ा आकर्षण केंद्र मानी जाती हैं।

 

शांत आध्यात्मिक वातावरण

 

यह मंदिर एक शांत, स्वच्छ और बेहद सौम्य माहौल के लिए जाना जाता है। यहां भक्त घंटों बैठकर रामचरितमानस का पाठ करते हैं।

मंदिर से जुड़ी मान्यता

तुलसीदास जी ने यहां लिखी रामचरितमानस

 

मान्यता है कि यही वह स्थान है जहां तुलसीदास जी को भगवान शिव का आशीर्वाद मिला और उन्होंने भगवान राम की कथा को सामान्य जन तक पहुंचाने के लिए रामचरितमानस की रचना शुरू की।

 

मंत्रसिद्ध और कल्याणकारी स्थान

 

स्थानीय लोग इसे मनोकामना सिद्ध स्थान मानते हैं। कहा जाता है कि यहां रामचरितमानस का पाठ करने से मानसिक शांति, कठिनाइयों का समाधान और परिवार में सद्भाव प्राप्त होता है।

तुलसी मानस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता

स्थान: दुर्गाकुंड के पास, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
यह मंदिर वाराणसी के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र में स्थित है।

 

वाराणसी जंक्शन (कैण्ट स्टेशन) से दूरी

 

लगभग 7–8 किलोमीटर, ऑटोरिक्शा, टैक्सी और ई-रिक्शा आसानी से मिल जाते हैं।

 

सड़क मार्ग

 

मंदिर मुख्य सड़क पर ही स्थित है, इसलिए पहुंचने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती।

 

नजदीकी एयरपोर्ट

 

लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से दूरी – 30–32 किलोमीटर

टैक्सी/कैब से लगभग 45–50 मिनट

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