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विश्वकर्मा पूजा कब है, कथा से मुहूर्त तक सब जानिए

हर साल की तरह इस साल भी पूरे देश में विश्वकर्मा पूजा मनाई जाएगी। आइए जानते हैं विश्वकर्मा पूजा से जुड़ी कथा, महत्व और वैदिक मुहूर्त।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: Photo Credit: AI

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हिंदू धर्म में विश्वकर्मा पूजा को बहुत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन सभी लोग घर में मौजूद लोहे के समान की पूजा करते हैं। हर साल की तरह इस साल भी देशभर में 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा मनाई जाएगी। सूर्य के सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करने के दिन, यानी कन्या संक्रांति पर होने वाला यह पर्व देवताओं के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का पहला अभियंता (इंजीनियर) और वास्तुकार माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने स्वर्गलोक, इंद्रप्रस्थ, द्वारका नगरी और सोने की लंका जैसी भव्य रचनाएं की थीं।

 

इस दिन घरों, कारखानों, फैक्ट्रियों और गाड़ियों के लिए खास पूजा का आयोजन किया जाता है। लोग अपने औजारों और मशीनों की पूजा कर उनसे आने वाले वर्ष में शुभ और सुरक्षित काम की कामना करते हैं। परंपरा के अनुसार, पूजा के बाद प्रसाद वितरण और कामकाज की शुरुआत की जाती है।

 

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विश्वकर्मा पूजा 2025

वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2025 में विश्वकर्मा पूजा आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि  को मनाया जाएगा। यह तिथि 17 सितम्बर को बुधवार के दिन पड़ेगी। पंचांग के अनुसार, 17 सितम्बर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा पूरे दिन की जा सकती है।   

विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाई जाती है?

इस दिन को मेहनतकश लोगों, कामगारों, इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स, तकनीशियनों और कलाकारों के सम्मान का दिन माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से औजार और मशीनें सुरक्षित और सुचारू रूप से चलती हैं। इसलिए इस दिन को खास महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से कामकाज में प्रगति होती है और जीवन में सफलता मिलती है।

 

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पौराणिक कथा क्या है?

पुराणों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मा जी के मानस पुत्र माने जाते हैं। उन्हीं ने स्वर्गलोक, सोने की लंका, हस्तिनापुर, द्वारका और कई दिव्य नगरी बनाई। त्रेतायुग में जब भगवान राम ने लंका पर विजय प्राप्त की, तो सोने की लंका का निर्माण भी विश्वकर्मा द्वारा ही किया गया था। उन्हें देवताओं का दिव्य वास्तुकार माना गया है।

विश्वकर्मा पूजा कैसे करें?

  • सुबह स्नान कर घर या कार्यस्थल को साफ करें।
  • भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • फूल, फल, अक्षत, पान-सुपारी, मिठाई और दीपक से पूजा करें।
  • इस दिन खासकर औजार, मशीनें और वाहन की भी पूजा की जाती है।
  • पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है और कार्यस्थल पर कामकाज का शुभारंभ किया जाता है।
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