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भद्रा और पंचक में कौन सी गलतियां करते हैं लोग, जिनका पड़ता है कुंडली पर बुरा असर

हिंदू ज्योतिष में भद्रा और पंचक को संवेदनशील समय माना गया है। इसमें मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है ताकि किसी भी अनिष्ट या नुकसान से बचा जा सके।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

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हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरूआत से पहले समय की गणना या  मुहूर्त को बहुत अहमियत दी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा और पंचक दो ऐसे कालखंड हैं जिन्हें सामान्यतः  शुभ नहीं माना जाता। जानकारों का कहना है कि इन अवधियों में की गई चूक भविष्य में भारी पड़ सकती है या काम में बाधाएं आ सकती हैं, इसलिए इस दौरान सावधानी बरतना ही समझदारी है।

 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं। स्वभाव से कठोर होने के कारण जब भद्रा का असर पृथ्वी पर होता है, तब शादी, मुंडन या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। वहीं, पंचक पांच विशेष नक्षत्रों, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती का एक समूह है। कहा जाता है कि इस दौरान ऊर्जा ऐसी होती है कि कोई भी काम पांच बार दोहराया जा सकता है, इसलिए बुरे कामों या अशुभ घटनाओं की पुनरावृत्ति से बचने के लिए खास नियम बनाए गए हैं।

 

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भद्रा काल में क्या करें और क्या टालें?

भद्रा के समय (विष्टि करण) को लेकर ज्योतिषियों की सलाह स्पष्ट है:

  • इन कामों पर लगाएं ब्रेक: शादी-ब्याह, नया व्यापार शुरू करना, बड़े निवेश, गृह प्रवेश और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों में भद्रा का खास ख्याल रखा जाता है। माना जाता है कि इस दौरान शुरू किए गए कार्य सफल नहीं होते।
  • इनमें मिल सकती है सफलता: हालांकि यह समय शुभ कार्यों के लिए बुरा है लेकिन दुश्मनों पर जीत पाने, अदालती मामले जैसे मुकदमा दायर करने या किसी ऑपरेशन के लिए इसे ठीक माना जा सकता है। हनुमान जी और शिव जी की उपासना इस समय सबसे श्रेष्ठ रहती है।

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पंचक के दौरान इन 5 बातों का रखें ध्यान

पंचक के पांच दिनों में कुछ खास कामों को लेकर सख्त नियम दिए गए हैं, जिन्हें आम बोलचाल में इस तरह समझा जा सकता है:

  • लकड़ी इकट्ठा करना: मान्यता है कि ऐसा करने से आग लगने का डर बना रहता है।
  • दक्षिण दिशा में यात्रा करना: दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए इस ओर किया गया सफर कष्टदायक हो सकता है।
  • घर की छत डलवाना: ऐसा करने से घर में झगड़े बढ़ने और धन की कमी होने की आशंका बताई जाती है।
  • बिस्तर या खाट बनाना: पुरानी मान्यताओं के अनुसार इससे स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • अंतिम संस्कार: यदि इस समय दाह संस्कार करना पड़े, तो आटे के पाँच पुतले साथ में जलाने की परंपरा मानी जाती है।

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

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