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6 या 7 नवंबर कब मनाएं धनतेरस? जानिए क्या है खरीदारी और पूजा का शुभ मुहूर्त

नवंबर महीने में धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन लोग सोना, चांदी जैसी चीजों की खरीदारी करते हैं। यहां जानिए पूजा के शुभ समय से लेकर खरीदारी का शुभ मुहूर्त क्या है।

godess laxmi

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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धनतेरस एक ऐसा त्योहार है, जिस दिन पूरे देश के बाजार लोगों की भीड़ से चमक उठते हैं। इस त्योहार पर सनातन धर्म को मानने वाले लाखों लोग नए सामान की खरीदारी करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नई चीजें खरीदने से लोगों के घर में धन-संपत्ति का निवास होता है। इसी वजह से लाखों लोग अपने बजट के हिसाब से नई चीजें खरीदते हैं। नई चीजें खरीदने के अलावा इस दिन लोग भगवान कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा भी करते हैं। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन या कोई मशीन खरीद सकते हैं। धार्मिक जानकारों के अनुसार, इन चीजों को खरीदने से लोगों के जीवन में सुख-समृद्धि का निवास होता है।

 

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान कुबेर धन के रक्षक हैं, जिनके आशीर्वाद से लोगों के घर में धन ठहरता है। इसी वजह से धनतेरस के दिन देवी मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की भी पूजा-पाठ की जाती है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, इस दिन शुभ समय पर पूजा-पाठ करना चाहिए। आइए जानते हैं इस दिन पूजा के शुभ मुहूर्त से लेकर खरीदारी का शुभ समय क्या है।

 

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कब मनाएं धनतेरस?

धनतेरस का त्योहार कार्तिक महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। उस हिसाब से इस बार 6 नवंबर को धनतेरस है क्योंकि इसी दिन त्रयोदशी तिथि होगी। पंचांग के मुताबिक, धनतेरस पर्व 6 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से लेकर 7 नवंबर को सुबह 06:37 बजे तक रहेगा। इस दिन कई शुभ मुहूर्त हैं।

 

अमृत मुहूर्त सुबह 10:23 से लेकर 10:43 बजे तक।
चर मुहूर्त:शाम 04:11 से लेकर 05:33 बजे तक।
शुभ मुहूर्त: रात 12:05 से लेकर 01:27 बजे तक।
लाभ मुहूर्त: रात 08:49 से लेकर 10:27 बजे तक।

 

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धनतेरस पर कैसे करें पूजा?

इस पर्व पर शाम के समय भगवान कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इनके साथ ही भगवान धन्वंतरि की आराधना भी की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। शाम के समय लोगों को फूल, फल और मिठाई चढ़ाकर देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए। विधिवत पूजा करने के बाद 'ॐ ह्रीं कुबेराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

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