सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में फसल और प्रकृति से जुड़े पारंपरिक पर्व मनाए जाते हैं। उत्तर भारत में मकर संक्रांति, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में खिचड़ी, पंजाब-हरियाणा में लोहड़ी और तमिलनाडु में पोंगल के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व अलग-अलग नामों और परंपराओं के बावजूद एक ही खगोलीय घटना और कृषि चक्र से जुड़ा हुआ है। यह समय सूर्य के उत्तरायण होने का माना जाता है, जिसे भारतीय परंपरा में शुभ और सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक माना गया है।
इन पर्वों का केंद्र बिंदु नई फसल का आगमन और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना है। कहीं दान और स्नान की परंपरा है तो कहीं अलाव, लोकगीत और सामूहिक उत्सव, वहीं दक्षिण भारत में यह पर्व कई दिनों तक चलने वाले कृषि उत्सव के रूप में मनाया जाता है। भोजन, पूजा-पाठ और लोक परंपराओं के माध्यम से किसान, पशुधन और प्रकृति के योगदान को सम्मान दिया जाता है।
यह भी पढ़ें: पूजा में कुछ ही चीजों का हो सकता है दोबारा इस्तेमाल, इन चीजों से बनाएं दूरी
चारों त्योहारों मे मूल समानता
- सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
- उत्तरायण की शुरुआत
- नई फसल के आगमन पर कृतज्ञता
- जनवरी के मध्य (14–15 जनवरी) में आयोजन
खिचड़ी पर्व
क्षेत्र: पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार
स्वरूप: धार्मिक और दान प्रधान पर्व
विशेषताएं:
- चावल और दाल से बनी खिचड़ी का भोग
- गरीबों और ब्राह्मणों को दान
- गंगा स्नान का विशेष महत्व
- अन्नदान को सर्वोत्तम दान माना जाता है
- भावना: दान, पुण्य और सामाजिक समरसता
यह भी पढ़ें- घर छोटा है, जगह कम है, खड़े होकर पूजा कर सकते हैं या नहीं?
लोहड़ी
क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा
स्वरूप: लोक और कृषि उत्सव
विशेषताएं:
- अलाव जलाकर नई फसल का स्वागत
- तिल, मूंगफली, रेवड़ी अग्नि में अर्पित
- लोकगीत और नृत्य
- मकर संक्रांति की पूर्व संध्या को आयोजन
- भावना: उल्लास, सामूहिकता और लोक परंपरा
मकर संक्रांति
क्षेत्र: सम्पूर्ण भारत
स्वरूप: खगोलीय और धार्मिक पर्व
विशेषताएं:
- सूर्य के राशि परिवर्तन का दिन
- स्नान, दान और पूजा
- तिल-गुड़, खिचड़ी का सेवन
- पतंग उड़ाने की परंपरा (गुजरात, राजस्थान)
- भावना: आध्यात्मिक शुद्धि और सूर्य उपासना
पोंगल
क्षेत्र: तमिलनाडु
स्वरूप: कृषि और पारिवारिक उत्सव (4 दिन तक मनाया जाता है)
विशेषताएं:
- नई फसल के चावल से पोंगल पकाना
- सूर्य देव, पशुधन और प्रकृति का सम्मान
- भोगी, सूर्य, मट्टू और कानुम पोंगल
- घरों की सफाई और रंगोली
- भावना: प्रकृति, पशु और किसान का सम्मान