हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। शास्त्रों में पूजा की शुद्धता पर खास जोर दिया गया है। चाहे कोई अनुष्ठान हो या रोज की पूजा, हर पूजा से जुड़े कुछ नियम, परंपराएं और मान्यताएं होती हैं। ऐसा माना जाता है कि पूजा में उपयोग होने वाली हर वस्तु की अपनी अलग ऊर्जा होती है। कुछ वस्तुएं एक बार अर्पित करने के बाद ‘निर्मल्य’ हो जाती हैं, यानी उनका दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करना दोषपूर्ण माना जाता है।
वहीं पूजा में कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं जिन्हें शुद्ध करके फिर से उपयोग किया जा सकता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि किन वस्तुओं से दूरी रखनी चाहिए और किनका दोबारा प्रयोग किया जा सकता है। आइए इसके बारे में जानते हैं-
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इनका दोबारा इस्तेमाल 'कभी न करें'
- एक बार भगवान को चढ़ाए गए फूल या माला दोबारा नहीं चढ़ाई जाती। इन्हें 'बासी' या ''निर्मल्य'' माना जाता है।
- दीपक में एक बार जल चुकी रुई या बत्ती का बचा हुआ हिस्सा दोबारा नहीं जलाना चाहिए। हमेशा नई बत्ती का उपयोग करें।
- पूजा में कभी भी टूटे हुए चावलों का उपयोग नहीं करना चाहिए। साथ ही, जो चावल एक बार चढ़ा दिए गए हों, उन्हें दोबारा पूजा की थाली में न रखें।
- भगवान को स्नान कराने या 'आचमन' के लिए उपयोग किया गया जल दोबारा इस्तेमाल न करें। इसे पौधों में डाल देना चाहिए।
- जो भोजन या फल एक बार भगवान को अर्पित कर दिया गया हो, उसे दोबारा पूजा के लिए नहीं रखा जाता। उसे प्रसाद के रूप में वितरित कर देना चाहिए।
- यदि कोई मूर्ति या फ्रेम कांच टूट जाए, तो उसे पूजा घर से हटा देना चाहिए। खंडित वस्तु की पूजा नकारात्मक फल दे सकती है।
चीजें जो 'दोबारा इस्तेमाल' की जा सकती हैं
- तांबे, पीतल, चांदी या सोने के पात्र (कलश, थाली, चम्मच) को हर बार धोकर उपयोग किया जा सकता है।
- शंख और शालिग्राम को कभी भी पुराना या अशुद्ध नहीं माना जाता। हर पूजा में इन्हें स्नान कराकर दोबारा शामिल किया जाता है।
- मूर्तियों को रोज स्नान (अभिषेक) कराकर इनकी पूजा की जा सकती है।
- बैठने के लिए उपयोग किए जाने वाले ऊनी या रेशमी आसन को झाड़कर या साफ करके बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है।
- भगवान को पहनाए गए रेशमी या सूती वस्त्रों को धोकर दोबारा पहनाया जा सकता है।
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शास्त्रों के अनुसार विशेष अपवाद
- पद्म पुराण के अनुसार, तुलसी के पत्ते 7 दिनों तक बासी नहीं माने जाते। इन्हें पानी से धोकर दोबारा भगवान विष्णु को अर्पित किया जा सकता है।
- भगवान शिव को चढ़ाया गया बेलपत्र यदि फटा न हो, तो उसे धोकर दोबारा चढ़ाया जा सकता है।
- गंगाजल कभी बासी या अशुद्ध नहीं होता। इसे आप कितने भी समय तक रखकर पूजा में इस्तेमाल कर सकते हैं।
- माना जाता है कि कमल का फूल 5 से 10 दिनों तक शुद्ध रहता है।
इन चीजों से हमेशा बनाएं दूरी
- पूजा में प्लास्टिक वर्जित है। हमेशा धातु, मिट्टी या कांच का उपयोग करें।
- रात भर लोटे में रखा हुआ पानी (यदि गंगाजल न हो) अगले दिन पूजा में इस्तेमाल न करें।
- यदि पूजा सामग्री को गंदे हाथों या बिना स्नान किए छू लिया गया हो, तो उसे चढ़ाने से बचें।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।