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6 या 7 जनवरी किस दिन मनाई जाएगी गणेश चौथ, जानें सकट से जुड़ी की मान्यता

नए साल की शुरुआत के साथ ही त्योहारों की भी शुरुआत हो चुकी है। साल 2026 में गणेश चौथ का व्रत साल के पहले सप्ताह में मनाया जाएगा, आइए जानते हैं कब और किस दिन कैसे गणेश चौथ का व्रत रखना है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: Photo Credit: AI

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नए साल की शुरुआत के साथ ही धार्मिक गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिल रही है और इसी क्रम में गणेश चौथ को लेकर श्रद्धालुओं के बीच खास उत्साह नजर आ रहा है। इस व्रत को सकट चौथ के नाम से भी जानते हैं। विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना का यह पावन व्रत आस्था, विश्वास और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। 

 

ऐसे में गणेश चौथ न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन जाती है, जहां भक्त पूरे श्रद्धाभाव के साथ गणपति बप्पा से अपने जीवन में सफलता और मंगल कामनाओं की प्रार्थना करते हैं।

 

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गणेश चौथ साल 2026

वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में गणेश चौथ माघ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाएगा। इस तिथि की शुरुआत 6 जनवरी के दिन सुबह 7 बजकर 55 मिनट से होगी और इसका समापन 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में पंचांग के अनुसार, गणेश चौथ या सकट चौथ 6 जनवरी 2026 के दिन मनाया जाएगा। 

गणेश चौथ क्यों मनाई जाती है

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे जीवन से बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं। गणेश चौथ का व्रत रखने से कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं, बुद्धि और विवेक की वृद्धि होती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। यह दिन विशेष रूप से नए कार्य की शुरुआत, शिक्षा, व्यापार और विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए शुभ माना जाता है।

 

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गणेश चौथ से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण डाल दिए। उन्होंने उस बालक को आदेश दिया कि वह द्वार पर पहरा दे और जब तक वह स्नान कर रही हैं, किसी को अंदर न आने दे। तभी भगवान शिव वहां पहुंचे लेकिन बालक ने उन्हें रोक दिया। क्रोधित होकर भगवान शिव ने उस बालक का सिर काट दिया। जब माता पार्वती को यह पता चला तो वह बहुत दुखी हो गईं और विलाप करने लगीं। तब भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा में भेजा और जो पहला जीव मिले उसका सिर लाने को कहा। गणों को हाथी का सिर मिला, जिसे शिव जी ने बालक के धड़ से जोड़ दिया। इस प्रकार गणेश जी का पुनर्जन्म हुआ। भगवान शिव ने उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। कहा जाता है कि यही घटना चतुर्थी तिथि को हुई थी, इसलिए इस दिन गणेश चौथ मनाई जाती है।

गणेश चौथ की पूजा विधि

गणेश चौथ के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थान को साफ कर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद उन्हें दूर्वा घास, लाल फूल, सिंदूर, अक्षत और मोदक अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उनका भोग विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान 'ॐ गण गणपतये नमः' मंत्र का जप करें और गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें। अंत में आरती कर भगवान से अपने जीवन के कष्ट दूर करने की प्रार्थना करें।

गणेश चौथ का व्रत रखने की विधि

इस दिन व्रती सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करता है और व्रत का संकल्प लेता है। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार करते हैं। व्रत के दौरान सात्विक भोजन ही ग्रहण किया जाता है। इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा भी है, क्योंकि मान्यता है कि चंद्र दर्शन करने से मिथ्या दोष लग सकता है। रात में या अगले दिन चतुर्थी तिथि समाप्त होने पर व्रत का पारण किया जाता है।

गणेश चौथ का महत्व

गणेश चौथ का व्रत श्रद्धा और नियम के साथ रखने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है, निर्णय क्षमता मजबूत होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विद्यार्थियों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। भगवान गणेश की कृपा से जीवन की कठिन राहें भी सरल हो जाती हैं।


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