सावन महीने की जल्द ही शुरुआत होने वाली है। इस महीने लाखों भक्त कांवड़ यात्रा पर जाते हैं, जहां कई श्रद्धालु हरिद्वार की गंगा नदी या अन्य पवित्र नदियों से कलश में जल भरकर अपने स्थानीय शिवालय ले जाते हैं। जिसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कांवड़ यात्रा कई प्रकार की होती है, जिन्हें डाक, खड़ी, दांडी और सामान्य कांवड़ के नाम से जाना जाता है। इन सभी कांवड़ों के अलग-अलग नियम होते हैं। धार्मिक जानकारों के मुताबिक कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले सभी भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है। इन सभी प्रकार की कांवड़ यात्राओं में सबसे कठिन दांडी कांवड़ मानी जाती है।
इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसी दिन से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाती है। इस यात्रा में लाखों लोग हरिद्वार के हर की पौड़ी पहुंचते हैं, गंगा नदी का जल कलश में भरकर शिवरात्रि के दिन अपने राज्य लौटते हैं और शिवालय में जाकर जलाभिषेक करते हैं। मान्यता के अनुसार जल से भरे कलश को कांवड़ कहा जाता है। हर साल की तरह इस साल भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में शामिल होने के लिए उत्साहित हैं। अब सवाल उठता है कि अलग-अलग प्रकार की कांवड़ यात्राओं के नियम क्या हैं?
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सबसे कठिन कांवड़ यात्रा
दांडी कांवड़ - धार्मिक जानकारों के अनुसार यह कांवड़ यात्रा सबसे कठिन मानी जाती है। इसमें शिव भक्त पूरी यात्रा दंडवत प्रणाम करते हुए तय करते हैं। इस प्रक्रिया में श्रद्धालु अपनी पूरी लंबाई के बराबर जमीन पर लेटकर आगे बढ़ते हैं। इस तरह की यात्रा पूरी करने में कई बार पूरे महीने तक का समय लग जाता है।
डाक कांवड़ - इस प्रकार की कांवड़ यात्रा में भक्त बिना रुके लगातार चलते हैं। यानी शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से पहले यात्रा के दौरान कहीं विश्राम नहीं करते। इस यात्रा को 24 घंटे के भीतर पूरा करना होता है। इसके लिए मंदिरों में विशेष व्यवस्था की जाती है और डाक कांवड़ियों के लिए अलग रास्ता भी छोड़ा जाता है, ताकि वे बिना रुके जलाभिषेक कर सकें।
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खड़ी कांवड़ - इस प्रकार की यात्रा करने वाले भक्तों के साथ एक या अधिक सहयोगी भी चलते हैं। जब एक कांवड़िया आराम करता है, तब दूसरा भक्त अपने कंधे पर जल का कलश उठाता है। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि यात्रा के दौरान जल का कलश हमेशा कंधे पर ही रहना चाहिए।
सामान्य कांवड़ - यह यात्रा अन्य प्रकार की कांवड़ यात्राओं की तुलना में कम कठिन मानी जाती है। इसमें श्रद्धालु यात्रा के दौरान विश्राम के लिए पंडालों में रुक सकते हैं, आराम कर सकते हैं और भोजन भी कर सकते हैं।कांवड़ यात्रा के नियम
1.कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले संकल्प लें।
2.यात्रा के दौरान मांस, मदिरा, लहसुन, प्याज और शराब के सेवन से बचें।
3.यात्रा के दौरान आराम करना वर्जित नहीं है, जल का कलश किसी पेड़ के नीचे रखना वर्जित माना जाता है।
4.कोई भी शिव भक्त कांवड़ यानी जल का कलश अपने सिर पर न रखें।