एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजों का खराब प्रदर्शन गुरुवार (24 सितंबर) को भी जारी रहा। भारत की मजबूत स्पर्धाओं में शुमार मेंस 10 मीटर एयर पिस्टल टीम भी मेडल जीतने में नाकाम रही। कमलजीत 580 अंक के साथ 9वें स्थान पर रहे और फाइनल में जगह बनाने से सिर्फ एक अंक से चूक गए। आकाश भारद्वाज ने 579 अंक के साथ 11वां और केदारलिंग बालकृष्ण उचागनवे ने 568 अंक के साथ 35वां स्थान हासिल किया।
भारतीय टीम ने कुल 1727 अंक जुटाए। जापान ने 1730 अंक के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। चीन ने 1743 अंक के साथ गोल्ड और इंडोनेशिया ने इतने ही अंक के साथ सिल्वर मेडल जीता। चीन ने अधिक इनर-10 के आधार पर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
केदारलिंग के प्रदर्शन में मुकाबले के दौरान लगातार गिरावट आई। वह अंक हासिल करने के लिए अपनी पिस्टल की सेटिंग भी बदलते नजर आए लेकिन इसका खास फायदा नहीं हुआ। आखिरी चरण में उनके एक शॉट में 8 अंक आने के बाद भारत की टीम मेडल की रेस से बाहर हो गई।
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पिछले एशियन गेम्स जितने भी नहीं आएंगे मेडल?
शूटिंग में लगातार पांच दिन का खेल पूरा होने के बावजूद भारत के खाते में अब तक एक भी गोल्ड मेडल नहीं आया है। एशिया की मजबूत टीमों में गिनी जाने वाली भारतीय शूटिंग टीम के लिए यह असामान्य सूखा है। हालांकि उसने अब तक 4 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज मेडल जरूर जीते हैं।
इससे पहले भारत की स्टार खिलाड़ियों से सजी महिला 10 मीटर एयर पिस्टल टीम भी फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रही थी। दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर, वर्ल्ड कप की गोल्ड मेडल विजेता ईशा सिंह और सुरूचि सिंह की तिकड़ी से काफी उम्मीदें थीं लेकिन वे मेडल हासिल नहीं कर सकीं। लगातार दो दिनों की इन निराशाओं ने 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में शूटिंग के 7 गोल्ड समेत 22 मेडलों के अपने रिकॉर्ड प्रदर्शन को दोहराने की भारत की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
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केदारलिंग का खराब प्रदर्शन
मेंस 10 मीटर एयर पिस्टल की क्वालिफिकेशन में भी कोई खास राहत नहीं मिली। कमलजीत आखिरी राउंड तक फाइनल की दौड़ में बने रहे लेकिन एक अंक से चूक गए। आकाश भारद्वाज भी फाइनल में प्रवेश के बेहद करीब रहे लेकिन कट में जगह नहीं बना पाए। केदारलिंग की मुश्किलें हलांकि कहीं अधिक गंभीर रहीं। भारतीय सेना के निशानेबाज केदारलिंग ने लगभग शुरुआत से ही संघर्ष किया।
वह लगातार अंक गंवाते रहे और प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए जरूरी ऊंचे स्कोर हासिल करने में भी नाकाम रहे। प्रदर्शन बिगड़ता देख उन्होंने समाधान की तलाश में अपनी पिस्टल की सेटिंग बदलनी शुरू कर दी। दर्शक दीर्घा में मौजूद भारतीय कोच उन्हें लेकर स्पष्ट रूप से चिंतित नजर आए। इस बीच हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर पियरे ब्यूशां दर्शक दीर्घा में लगातार चहलकदमी करते रहे और केदारलिंग अपने खराब प्रदर्शन को थामने की कोशिश करते रहे। इन बदलावों का उनकी स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
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केदारलिंग की नाकामी भारत को पड़ा भारी
केदारलिंग की शूटिंग में लगातार अनिश्चितता बनी रही। उनके खाते में 9 अंक वाले शॉट ज्यादा आ रहे थे, जबकि ऊंचे स्कोर वाले निशाने बेहद कम थे। मुकाबला अंतिम चरण में पहुंचा तो भारत के लिए टीम ब्रॉन्ज मेडल बचाने की उम्मीद लगभग खत्म होने के कगार पर थी। मुकाबले में एक असाधारण मोड़ आया। टीम मेडल की स्थिति बेहद करीबी होने के बीच जापानी कोचिंग स्टाफ के कुछ सदस्य दर्शक दीर्घा में केदारलिंग के पीछे आकर खड़े हो गए। वे उनके आखिरी शॉट देख रहे थे और उम्मीद कर रहे थे कि भारतीय निशानेबाज इतने अंक गंवा दें कि उनकी टीम ब्रॉन्ज मेडल की स्थिति में पहुंच जाए।
अपने आखिरी 10 शॉट्स के क्रम में आठ अंक का एक शॉट भारत की मेडल उम्मीदों के लिए निर्णायक साबित हुआ और जापान के लिए मेडल का रास्ता खोल गया। जापानी कोच वहां से स्पष्ट रूप से संतुष्ट नजर आए, क्योंकि केदारलिंग की आखिरी चूक ने उनकी टीम को मेडल की स्थिति में पहुंचा दिया था। जापान ने 1730 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया और भारत से तीन अंक आगे रहा। केदारलिंग गुस्से और निराशा में रेंज से बाहर निकले, जबकि भारतीय खेमे को एक और निराशाजनक नतीजे को स्वीकार करना पड़ा।