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CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स में इस बार भारत का टॉप-5 में रहना मुश्किल क्यों है?

कॉमनवेल्थ गेम्स में पिछले 20 साल से भारत टॉप-5 में रहा है लेकिन इस बार मुश्किल है। समझिए इस बार हमारे मेडल क्यों कम होंगे।

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ग्लास्गो में कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियां तेज हैं, Photo Credit: Glasgow 2026

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भारत के लिए पिछले दो दशक से कॉमनवेल्थ गेम्स में टॉप-5 में रहने का सिलसिला कायम रखना इस बार मुश्किल हो सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत 23 जुलाई से होने जा रही है, जो 2 अगस्त तक चलेगा। इस मल्टी-स्पोर्ट इवेंट का आयोजन स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में हो रहा है। पिछले तीन दशक में यह सबसे छोटा कॉमनवेल्थ गेम्स है, जिसमें लागत में कटौती के कारण चार वेन्यू पर सिर्फ दस खेलों की स्पर्धाएं होंगी और 74 देशों के करीब 3000 खिलाड़ी जोर आजमाइश करेंगे।

 

ओवो हाइड्रो पर गुरुवार को उद्घाटन समारोह के जरिए इन खेलों की औपचारिक शुरूआत होगी। इनमें से छह खेलों में पैरा खेलों के इवेंट्स भी साथ में होंगे। भारत को मुक्केबाजी, वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में ज्यादा मेडल आने की उम्मीदें हैं।

 

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लागत कटौती से भारत की मुश्किलें बढ़ीं

आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को CWG 2026 की मेजबानी मिली थी लेकिन बढ़ती लागत के कारण उसने हाथ खींच लिया। कॉमनवेल्थ गेम्स का भविष्य ही खतरे में पड़ते देख ग्लास्गो ने मेजबानी के लिए हामी भरी। पहले भी 2014 में मेजबान रह चुके स्कॉटलैंड के इस शहर ने करीब 160 मिलियन पाउंड के बजट में इन खेलों का आयोजन किया है, जो बर्मिंघम में 2022 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स से 60 प्रतिशत कम है। 

 

ग्लास्गो के सामने चुनौती यह साबित करने की है कि कम बजट में भी खेल हो सकते हैं जबकि खेलों में कटौती ने भारत की राह मुश्किल कर दी है। भारत मैनचेस्टर में 2002 कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद से हर बार टॉप-5 में रहा है। इस बार हॉकी, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और निशानेबाजी के नहीं होने से यह कर पाना मुश्किल लग रहा है। बर्मिघम में इन्हीं खेलों में भारत के 61 में से लगभग आधे मेडल आए थे। ऐसे में अब एथलेटिक्स, बॉक्सिंग और वेटलिफ्टिंग पर जिम्मेदार आन पड़ी है।

 

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नीरज से मेडल की फिर उम्मीद

भारत ने एथलेटिक्स में 32 सदस्यीय दल उतारा है जो 22 मेडल इवेंट्स में भाग लेगा। इसकी अगुवाई दो बार के ओलंपिक मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा करेंगे। वह इस बार मेडल के प्रबल दावेदार के रूप में नहीं बल्कि चैलेंजर के रूप में उतरेंगे। श्रीलंका के रूमेश थरंगा मेस जैवलिन में प्रबल दावेदार हैं, जिन्होंने पिछले महीने रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का थ्रो फेंककर सनसनी फैला दी थी। पेरिस ओलंपिक चैम्पियन पाकिस्तान के अरशद नदीम भी दौड़ में हैं लेकिन नीरज भी दावेदारों में से हैं।

एथलेटिक्स में ये भी कर सकते हैं कमाल

भारत को हाई-जम्प में सर्वेश कुशारे, लॉन्ग-जम्प में मुरली श्रीशंकर, ट्रिपल जम्प में प्रवीण चित्रावेल से मेडल की उम्मीद है। मेंस और विमेंस टीमें चार गुणा 400 मीटर रिले टीमों से भी मेडल की उम्मीद है। भारत ने बर्मिंघम में एथलेटिक्स में आठ मेडल जीते थे।

वेटलिफ्टिंग में मीराबाई से आस

वेटलिफ्टिंग में नजरें ओलंपिक सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई चानू पर लगी होंगी। मणिपुर की 31 साल की मीराबाई पिछले दो कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं। वेटलिफ्टिंग में भारत के 11 खिलाड़ी ही भाग लेंगे, क्योंकि नेशनल कैम्प में कई खिलाड़ी डोप टेस्ट में नाकाम हुए हैं, जिससे भारत की मेडल की उम्मीदें कम हो गई हैं।

 

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बॉक्सिंग में कौन-कौन?

बॉक्सिंग में टोक्यो ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन (75 किलो) कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला मेडल जीतना चाहेंगी। वहीं 57 किलो वर्ग की वर्ल्ड चैम्पियन जैस्मिन लंबोरिया बर्मिंघम में जीते ब्रॉन्ज को गोल्ड में बदलने को बेताब होंगी। एशियन चैंपियन प्रीति पवार (54 किलो), साक्षी चौधरी (51 किलो) और अरूंधति चौधरी (70 किलो) भी दावेदारों में हैं। 

 

मेंस कैटेगरी में नरेंदर बेरवाल (प्लस 90 किलो) और वर्ल्ड कप मेडलिस्ट सचिन सिवाच (60 किलो) से उम्मीदें हैं। लॉन बॉल में भारत ने बर्मिंघम में महिला कैटेगरी में गोल्ड और मेंस कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीते थे और इस बार भी उसे दोहराना चाहेंगे। जूडो में पिछले खेलों में तीन मेडल मिले थे, जिसे बेहतर करने का लक्ष्य होगा। पैरा एथलीट्स से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। इस बार छह खेलों में पैरा इवेंट्स भी साथ में हो रही है।

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