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तेजस्विन का डेकाथलॉन में मेडल, अस्मिता का गोल्ड; CWG में भारत के बेस्ट मोमेंट्स

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने 39 मेडल जीते। कई ऐसे इवेंट रहे जिनमें पहली बार मेडल आए। जानिए ग्लास्गो के बेस्ट मोमेंट्स क्या रहे।

Tejaswin Shankar

तेजस्विन शंकर, Photo Credit: AIR News/X

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स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा। भारत के खाते 13 गोल्ड समेत कुल 39 मेडल रहे। पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स से मेडल की संख्या इसलिए कम है, क्योंकि ग्लास्गो में सिर्फ 10 खेल ही शामिल थे। भारत ने बर्मिंघम में हुए 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में 61 मेडल हासिल किए थे। उस समय 19 खेल रखे गए थे। इस बार शूटिंग, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और क्रिकेट जैसे खेल नहीं थे, जिनमें बर्मिंघम में भारत को 30 मेडल मिले थे। इसलिए मेडल घटने के बावजूद भारत का प्रदर्शन अच्छा माना जा रहा है। आइए ग्लास्गो में भारतीय एथलीट्स के बेस्ट मोमेंट्स पर एक नजर डालते हैं।

तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में रचा इतिहास

घुटने की चोट के बावजूद तेजस्विन शंकर का डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज मेडल जीतना कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के बेस्ट मोमेंट्स में एक रहा। डेकाथलॉन एथलेटिक्स का सबसे मुश्किल इवेंट है। इसमें दो दिनों तक एथलीट की स्पीड, स्ट्रेंथ और तकनीक की कड़ी परीक्षा होती है। एथलीट को 10 अलग-अलग इवेंट में उतरना पड़ता है। तेजस्विन ने दर्द से जूझते हुए डेकथलॉन में भारत को पहला कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल दिलाकर बता दिया कि वह किस मिट्टी के बने हैं। गौरतलब है कि उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने के लिए कुछ साल पहले कोर्ट की मदद लेनी पड़ी थी।

 

यह भी पढ़ें: बॉक्सिंग-एथलेटिक्स में बजा डंका, किन खेलों में ग्लास्गो से खाली हाथ लौटा भारत?

अस्मिता डे का ऐतिहासिक गोल्ड

जूडो में भारत इससे पहले कभी कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड नहीं जीत पाया था। त्रिपुरा की अस्मिता डे ने इस सूखे को खत्म किया। अस्मिता एक साधारण परिवार से आती हैं। उन्होंने एक पॉइंट से पीछे रहने के बाद शानदार वापसी करते हुए गोल्ड जीतकर इस कॉमनवेल्थ गेम्स को यादगार बना दिया।

महिला मुक्केबाजों ने बरसाए गोल्ड

भारत की छह महिला मुक्केबाजों ने फाइनल में जगह बनाई थी, जिसमें से पांच ने गोल्ड मेडल जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए ग्लास्गो पहुंचीं सात मुक्केबाजों में से छह ने कोई न कोई मेडल जरूर जीता, जो बताता है कि भारत का महिला बॉक्सिंग प्रोग्राम अभी कितना शानदार है। मालूम हो कि निकहत जरीन, नीतू घंघास, मीनाक्षी हुड्डा जैसी मुक्केबाज क्वालिफाई भी नहीं कर सकी थीं। 

 

यह भी पढ़ें: कॉमनवेल्थ गेम्स में किन-किन एथलीट्स ने भारत को दिलाए मेडल? पूरी लिस्ट

 

इन महिला मुक्केबाजों ने जीते मेडल

  • साक्षी चौधरी - गोल्ड (विमेंस 51 किग्रा)
  • प्रीति पवार - गोल्ड (विमेंस 54 किग्रा)
  • जैस्मिन लम्बोरिया - गोल्ड (विमेंस 57 किग्रा)
  • प्रिया घंघास - गोल्ड (विमेंस 60 किग्रा)
  • अरुंधति चौधरी - गोल्ड (विमेंस 70 किग्रा)
  • लवलिना बोरगोहेन - सिल्वर (विमेंस 75 किग्रा)

गुलवीर सिंह का डबल मेडल

एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह ने दो-दो मेडल जीतकर नया आयाम स्थापित किया। वह एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में दो व्यक्तिगत मेडल जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बने। गुलवीर ने पहले 10000 मीटर रेस में सिल्वर जीता। इस इवेंट में आमतौर पर पूर्वी अफ्रीकी एथलीट्स का दबदबा रहता है। इसके तीन दिन बाद उन्होंने 5000 मीटर रेस में ब्रॉन्ज अपने नाम किया।

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