सचिन तेंदुलकर
ने
वैभव सूर्यवंशी
को उपकप्तान बनाए जाने पर अपनी राय रखी है। सचिन ने कहा है कि वैभव को इतनी कम उम्र में टीम के नेतृत्व की जिम्मेदारी देना जल्दबाजी होगी। मास्टर ब्लास्टर का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी को अभी और रेड बॉल क्रिकेट खेलना चाहिए। पिछले दिनों यूथ सनसनी वैभव सूर्यवंशी को नई जिम्मेदारी मिली थी। वैभव को दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की टीम का उपकप्तान बनाया गया था। सेमीफाइनल मुकाबले में नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने पर वैभव को टीम की कप्तानी करने का मौका मिला था। वैभव आज यानी 6 नवंबर को 15 साल, 7 महीने के हैं। इतनी कम उम्र में वैभव को नेतृत्व की जिम्मेदारी देने के फैसले पर खूब चर्चा हो रही है।
वैभव सूर्यवंशी के पास कुल 8 रेड बॉल मैचों का ही अनुभव है। ईस्ट जोन में अभिमन्यु ईश्वरन जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं। अभिमन्यु के पास 100 से अधिक फर्स्ट क्लास मैचों का अनुभव है। इसके बावजूद वैभव को उपकप्तान बनाया गया है, जिसकी वजह से कुछ क्रिकेट पंडित इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं। हालांकि, ईस्ट जोन की चयन समिति ने वैभव को अधिक मैच्योर और अनुभवी बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लेने का तर्क दिया है।
वैभव पर क्या बोले सचिन?
सचिन तेंदुलकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 'रेडिट' पर सवाल-जवाब का एक सेशन कर रहे थे। इस दौरान एक फैन ने सचिन से वैभव सूर्यवंशी को उपकप्तान बनाए जाने पर सवाल पूछा। इस पर जवाब देते हुए सचिन ने कहा, 'मुझे लगता है कि दलीप ट्रॉफी में उसे उपकप्तान बनाना अभी जल्दबाजी है। हमें उसे रेड बॉल से और मैच खेलने देने चाहिए और एक-एक कदम आगे बढ़ना चाहिए।'
सचिन तेंदुलकर का डेब्यू भी बहुत कम उम्र में हुआ था। सचिन के डेब्यू के समय उनकी उम्र 16 साल, 205 दिन थी। हालांकि, सचिन को पहली बार टीम का नेतृत्व करने का मौका डेब्यू के करीब पांच साल बाद यानी 1993 में मिला था। उस समय उनकी उम्र करीब 20 साल थी और वह मुंबई की रणजी टीम के कप्तान बने थे।
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चयन समिति का क्या तर्क है?
ईस्ट जोन की चयन समिति ने इस फैसले का बचाव किया था। समिति का कहना था कि वैभव को उपकप्तान बनाने का मकसद उनके विकास में मदद करना है। इसे टीम में खिलाड़ियों की वरीयता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। टूर्नामेंट के दौरान नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होने पर वैभव को कप्तानी करने का मौका भी मिला। इस दौरान उन्होंने मैदान पर कई अहम फैसलों में भूमिका निभाई। डीआरएस लेने जैसे फैसलों में भी उनकी भागीदारी रही। इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आए हैं।
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वैभव की इतनी चर्चा क्यों है?
वैभव सूर्यवंशी ने एक साल में इतनी उपलब्धियां और लोकप्रियता हासिल की, जितनी पाने में कई खिलाड़ियों का पूरा करियर निकल जाता है। 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। उन्होंने आईपीएल के एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में जगह बनाई और अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में मैच जिताने वाला शतक लगाकर भारत को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इंटरनेशनल क्रिकेट में भी वैभव का सिक्का चल पड़ा है। शीर्ष तीन में जगह बनाने के लिए वह
संजू सैमसन
, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों को चुनौती दे रहे हैं।
सचिन ने बताए अपने पसंदीदा कप्तान
इसी बातचीत के दौरान सचिन तेंदुलकर ने अपने कप्तानी के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम की कप्तानी करना उनके लिए बड़े सम्मान की बात थी, लेकिन उस समय उन्हें हमेशा अपनी पसंद की टीम चुनने की पूरी आजादी नहीं मिलती थी। अपने पसंदीदा कप्तानों के बारे में पूछे जाने पर सचिन ने सौरव गांगुली और
एमएस धोनी
का नाम लिया। उन्होंने दोनों को अपने पसंदीदा कप्तानों में सबसे ऊपर बताया।