ल 2011 में वनडे वर्ल्ड कप जीत के बाद टीम इंडिया को टेस्ट क्रिकेट में लगातार हार का सामना करना पड़ा। उस साल जुलाई अगस्त में इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम चारों टेस्ट मैच हार गई। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे (2011-12) पर भी यही हाल हुआ। 6 महीने के अंतराल में लगातार दो बड़ी सीरीज में सूपड़ा साफ होने के बाद राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण का करियर खत्म हो गया। इन दोनों दिग्गजों ने अगस्त 2012 में हुई न्यूजीलैंड सीरीज से पहले रिटायरमेंट ले ली। अब सीनियर खिलाड़ियों में सिर्फ सचिन तेंदुलकर ही बचे थे।
सचिन को टीम से बाहर करना भारतीय क्रिकेटर कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के बस का नहीं था लेकिन साल 2012 के अंत में घरेलू टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड के हाथों मिली शर्मनाक हार के बाद बोर्ड ने उनका रिप्लेसमेंट ढूंढना शुरू कर दिया। जब सचिन को इस बारे में बताया गया तो वह चौंक गए, क्योंकि उनका मानना था कि उनमें अभी और क्रिकेट बाकी है। मगर BCCI के सेलेक्शन कमिटी ने उनसे आगे बढ़ने का फैसला कर लिया था। सेलेक्शन कमिटी का मानना था कि सचिन का योगदान टीम के काम नहीं आ पा रहा है। उस समय सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन रहे संदीप पाटिल ने बताया है कि सचिन को पहले तो पहले यकीन नहीं हुआ कि उनका रिप्लेसमेंट ढूंढा जा रहा है लेकिन बाद में उन्होंने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी।
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पहले ODI से रिटायर हुए सचिन
संदीप पाटिल ने विक्की लालवानी के पॉडकास्ट में कहा, "मुझे नागपुर टेस्ट का आखिरी दिन याद है, जब हम 2012 में इंग्लैंड से हार गए थे। मेरे साथी सेलेक्टर राजेंद्र सिंह हंस और मैं सचिन तेंदुलकर से मिलने की अनुमति लेने के लिए ACU (एंटी करप्शन यूनिट) के पास गए थे। हमने मैनेजर की इजाजत ली और सचिन को बुलावा भेजा। मैंने चेयरमैन के नाते उनसे पूछा, 'आपका क्या प्लान है?' सेलेक्शन कमिटी ने फैसला कर लिया था कि उनका योगदान टीम के लिए मददगार नहीं रह गया है। पूरा देश मेरे खिलाफ हो गया था, लेकिन हमने उन्हें कभी टीम से बाहर नहीं किया। उन्होंने पहले वनडे इंटरनेशनल से और फिर टेस्ट से संन्यास की घोषणा की।"
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हैरान रह गए थे सचिन
संदीप पाटिल ने आगे बताया कि रिटायरटमें का प्लान पूछे जाने पर सचिन हैरान रह गए थे। पूर्व चीफ सेलेक्टर ने कहा, "वह हैरान थे और ऐसा होना भी चाहिए। उन्होंने पूछा, 'क्यों?' मैंने कहा कि सेलेक्शन कमिटी को लगता है कि आपके विकल्प पर विचार करने की जरूरत है और वह चौंक गए। उन्होंने मुझे फिर फोन किया और पूछा, 'क्या आप सच कह रहे हैं?' मैंने कहा, हां। बाद में जब उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया, तो उन्होंने मुझे फोन करके कहा, 'सैंडी, मैं संन्यास की घोषणा कर रहा हूं।' मुझे दुख है कि हमें इतना कड़ा फैसला लेना पड़ा लेकिन उनकी जगह पर अजिंक्य रहाणे जैसे खिलाड़ी भी तो आया।"
संदीप पाटिल ने खुलासा किया कि इस बातचीत के बाद सचिन ने उनसे कहा था कि वह कुछ और साल खेलना चाहते थे लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने वनडे इंटरनेशनल से रिटायरमेंट की घोषणा कर दी। इसके बाद वह 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में खेले लेकिन 4 टेस्ट मैचों में वह सिर्फ 192 रन ही बना पाए। इस साल के अंत में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया।