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यूट्यूब से सीखा चेस, अब बने भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर, कौन हैं मयंक चक्रवर्ती?

भारत के 17 साल के चेस खिलाड़ी मयंक चक्रवर्ती ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। मयंक नॉर्थ ईस्ट से आने वाले पहले ग्रैंडमास्टर हैं। उन्होंने चेस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेने से पहले यूट्यूब और चेसबेस DVD से इस खेल की बारीकियां सीखी।

Mayank Chakraborty Chess

मयंक चक्रवर्ती, Photo Credit: AIR

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असम के मयंक चक्रवर्ती ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। 17 साल के मयंक ने शुक्रवार (13 मार्च) को अपने उभरते करियर की आखिरी बाधा पार करते हुए अपना तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल किया और वह भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बने। मयंक इस टाइटल को हासिल करने वाले नॉर्थ ईस्ट के पहले खिलाड़ी हैं। गुवाहाटी के रहने वाले मयंक 2024 में इंटरनेशनल मास्टर बने थे। उन्होंने स्वीडन के 'होटल स्टॉकहोम नॉर्थ बाय फर्स्ट होटल्स चेस टैलेंट्स टूर्नामेंट' के आठवें राउंड में फिलिप लिंडग्रेन को हराया और एक राउंड बाकी रहते ही अपना आखिरी ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल कर लिया।

 

लिंडग्रेन पर जीत के दौरान मंयक ने जबरदस्त खेल दिखाया। उन्होंने जरूरी 6.5 पॉइंट्स जुटाए, जो उनका अंतिम ग्रैंडमास्टर नॉर्म पक्का करने के लिए काफी थे। आखिरी राउंड में उन्होंने इंग्लिश इंटरनेशनल मास्टर जोना बी विलो के साथ एक रोमांचक ड्रॉ खेला और इस तरह अपने अब तक के सबसे यादगार प्रदर्शन पर मुहर लगा दी। साथ ही मंयक ने 2500 Elo रेटिंग का आंकड़ा भी पार कर लिया। उनकी मौजूदा रेटिंग इस सीमा से कुछ पॉइंट्स ऊपर है, जिससे इंटरनेशनल चेस फेडरेशन (FIDE) के नियमों के अनुसार उनका ग्रैंडमास्टर टाइटल पक्का हो गया है।

 

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मयंक ने जीते 6 गेम 

मयंक ने इस टूर्नामेंट में एक बाजी गंवाई, दो ड्रॉ खेले और बाकी छह गेम जीते। इस तरह उन्होंने कुल नौ में से सात पॉइंट हासिल किए। उन्होंने ग्रैंडमास्टर टाइटल के साथ टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया। मंयक अंडर-11 कैटेगरी में भारत और एशिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी रह चुके हैं। उनके लिए 2021 का सीजन बेहद शानदार रहा था। उस साल उन्होंने यूरोप में कई टूर्नामेंट खेले जिससे उनकी Elo रेटिंग 1800 से बढ़कर 2200 के करीब पहुंच गई थी। इससे वह 2009 या उसके बाद जन्मे खिलाड़ियों की Elo रैंकिंग में दुनिया के छठे नंबर के खिलाड़ी बन गए थे।

 

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मयंक ने यूट्यूब से सीखा है चेस 

मयंक अपनी असाधारण प्रतिभा की बदौलत अंडर-9 वर्ग में नेशनल सिल्वर मेडल और अंडर-11 वर्ग में नेशनल गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने चेस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेने से पहले यूट्यूब और चेसबेस DVD से इस खेल की बारीकियां सीखी। इसके बाद उन्होंने ग्रैंडमास्टर सप्तऋषि रॉय चौधरी से कोचिंग ली। मंयक श्रीलंका में आयोजित एशियन युथ चेस चैंपियनशिप के अंडर-10 वर्ग में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। उनकी सफलता में उनके परिवार की अहम भूमिका रही है। मयंक की मां पेशे से डॉक्टर हैं। वहीं उनके पिता कॉर्पोरट जॉब करते थे। उन्होंने टूर्नामेंट के दौरान मयंक के साथ सफर करने के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी।


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